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मोदी के इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम वाली नीति पर चुनाव आयोग ने खड़े किये कई सवाल

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(Image Credits: Live law)

एक तरफ चुनावी टिकटों को लेकर बीजेपी अपने ही लोगो के बगावत से लड़ रही है तो दूसरी ओर मोदी सरकार पर फंडिंग को लेकर मुसीबते बढ़ गयी है। अक्सर मोदी सरकार दूसरी पार्टियों पर फंडिंग को लेकर सवाल उठती रही है परन्तु इस बार मोदी सरकार पर ही सवाल उठाये जा रहे है। चुनावों के लिए इकठ्ठा किये जाने वाला चंदा का हिसाब ठीक से न देने के चलते कोर्ट ने इसे गलत बताया है। केंद्र सरकार की इलेक्टोरल बॉन्ड्स स्कीम वाली नीति पर चुनाव आयोग ने कई सवाल खड़े किये।

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चुनावों में फंडिंग को लेकर चुनाव आयोग ने ‘इलेक्टोर बॉन्ड्स स्कीम’ को पारदर्शिता के लिए बड़ा खतरा बताया है। केंद्र सरकार की नीति पर असहमति जाहिर करते हुए चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि राजनीतिक दलों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए दिया जाने वाला चंदा कहीं से भी सही नहीं है। आयोग ने केंद्र सरकार के इस कदम को गलत फैसला बताया।

बुधवार को दाखिल किये गए एक हलफनामें में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि 26 मई 2017 को उसने विधि एवं न्याय मंत्रालय को पत्र लिखकर अपने इस विचार से अवगत कराया था। आयोग का कहना है कि उसने अपने पत्र में बताया था कि आयकर कानून, जनप्रतिनिधित्व कानून और वित्त कानून में बदलाव राजनीतिक दलों के चंदे में पारदर्शिता के खिलाफ है। यह साफ़ है कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29 C में हुए संशोधन के तहत इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए हासिल चंदे की जानकारी राजनीतिक दलों को चुनाव आयोग को नहीं देनी होगी। आयोग ने चंदे के संदर्भ में लागू पारदर्शिता की नीति के खिलाफ बताया।

चुनाव आयोग ने कहा है कि यदि राजनीतिक दल इल्टोरल बॉन्ड के जरिए मिलने वाले चंदे की जानकारी नहीं देते हैं तो इससे उनके जरिये सरकारी कंपनियों और अनजान विदेशी श्रोतों से पैसे लेने की गुंजाइश बढ़ जाएगी, जिसकी जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 29B के तहत मना है। गौरतलब है कि 2017 में एनडीए की सरकार ने तमाम राजनीतिक दलों के विरोध के बावजूद इलेक्टोरल बॉन्ड को लागू करने का फैसला लिया था। केंद्र सरकार ने यह तर्क दिया था कि इससे राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में साफगोई देखने को मिलेगी।

केंद्र सरकार के इस नीति से यह तो बात साफ़ नजर आती है की चुनावों में मिलने वाला चंदा ब्लैक मनी भी हो सकती है। कोर्ट में इसके खिलाफ दी अर्जी से मोदी सरकार की मुसीबत कम नहीं होगी। केंद्र सरकार को चंदा कहा से आता है और कौन देता है इसका हिसाब तो वह देने से रहे पर चंदा के नाम पर लिए जाने वाले पैसे पार्टिया खूब मज़े से उदा रही है।


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