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मोदी राज में भी सैनिक कर रहे खुदखुशी

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(Image Credits: dailyhunt)
हमारी देश की रक्षा करने को तैयार सैनिक चाहे वो पुलिस हो या बॉर्डर पर स्थित आर्मी हो देश के लिए जान देने को हमेशा तैयार रहते है। सरकार की तरफ से उन्हें मदद भी मिलती है फिर क्या ऐसी वजह है जिससे हर साल कई सैनिक खुदखुशी कर लेते है। इनमे से सबसे ज्यादा CRPF के जवान है शामिल है।
हालही में एक रिपोर्ट पेश की गयी जिसमे 2012-18  में जवानो की खुदखुशी की संख्या ज्यादा रही। मोदी सरकार के आने के बाद भी जवानो ने ऐसे कदम को उठाये। जो सरकार हमेशा अपने आप को सेना के साथ बताती रही और खुद को उनकी मदद के उपस्थित रही उनके राज में ऐसा क्या हुआ की खुदखुशी की संख्या कम होने की वजह ज्यादा हो गयी।
सरकार के जरिये लोकसभा में आंकड़ों पेश किए गए जिसके मुताबिक, साल 2011 से 2018 के बीच भारतीय सैन्य बलों जिनमे थल, वायु और नौसेना शामिल है  के 891 जवानों की मौत आत्महत्या के कारण हुई।
इस दौरान सबसे अधिक, 707 जवानों ने थलसेना में आत्महत्या की। वायुसेना में यह संख्या करीब पांच गुना कम रही जिसके 148 जवानों ने इस दौरान आत्महत्या की। नौसेना में सबसे कम, 36 जवानों ने आत्महत्या की।
साल 2011 में थलसेना में आत्महत्या के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई जहां 105 जवानों की आत्महत्या के मामले सामने आए। इसके बाद सबसे अधिक, 104 जवानों ने साल 2016 में आत्महत्या की. वहीं थलसेना में पिछले साल आत्महत्या के 80 मामले सामने आए थे।
इस तरह से तीनों सेनाओं में हर साल जवानों की आत्महत्या का औसत 111 है. थलसेना में सालाना यह औसत 88 है जबकि वायुसेना में 18.5 और नौसेना में 4.5 है।
आखिर ऐसा क्यों ऐसा हो रहा है की देश की रक्षा करने वाले जवान अपनी जान खुद दे रहे है। भाजपा की सरकार में किस प्रकार जवान खुदखुशी कर रहे है यह सरकार को नजर नहीं आ रहा।
तीनों सेनाओं के अलावा सरकार ने केंद्रीय सैन्य पुलिस बलों (सीएपीएफ) और असम राइफल्स में जवानों द्वारा किए गए आत्महत्या का भी आंकड़ा दिया है.
सीएपीएफ में साल 2012-15 के बीच आत्महत्या के सबसे अधिक मामले केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में देखे गए जहां 149 जवानों ने आत्महत्या की. इसी दौरान, सीमा सुरक्षा बल के 134 जवानों ने अपनी जान ले ली।
इन चार सालों में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के 56 जवानों ने आत्महत्या की जबकि भारत तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB ) के 25-25 जवानों ने आत्महत्या की. इसी दौरान असम राइफल्स के 30 जवानों ने आत्महत्या की।
आंकड़े दिखाते हैं कि अधिकतर जवान गजट अधिकारी, जूनियर कमांडिंग अधिकारी या अधीनस्थ अधिकारी नहीं थे बल्कि अन्य रैंकों के थे। क्या इन्हे सरकार की तरफ से पूरी सुविधाएँ नहीं मिल रही थी ? क्या सरकार इनके हित में कोई काम नहीं कर रही थी ?
आंकड़ों के अनुसार, आत्महत्या के सबसे अधिक मामले तमिलनाडु और महाराष्ट्र से सामने आए।
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि आत्महत्या का कारण लंबे समय तक और लगातार तैनाती जैसी पेशेवर परेशानियां हैं। मंत्रालय के अनुसार, इसके साथ ही जवान पारिवारिक मुद्दों, धरेलू समस्याओं और शादीशुदा जिंदगी को लेकर भी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार वे आर्थिक संकट के कारण भी तनाव में रहते हैं।
सरकार का दावा है कि आत्महत्या के अधिक मामलों का कारण जवानों का तनाव और उससे न निकल पाना है। सरकार का कहना है कि सैन्य जवानों के लिए स्वस्थ एवं अनुकूल माहौल बनाने के लिए उन्होंने कई कदम उठाए हैं।
सरकार का कहना है कि वह कपड़ा, खाना, यात्रा और मनोरंजन जैसी बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही वह शादीशुदा दंपत्ति के रहने के लिए आवास और बच्चों के लिए स्कूल की भी व्यवस्था भी करती है। सरकार ने छुट्टी की नीति को बेहतर बनाने के साथ समस्याओं के निपटारे का भी रास्ता निकला है।
मुंबई के नौसेना अस्पताल आईएनएचएस अश्विनी में एक सैन्य मनोरोग चिकित्सा केंद्र की स्थापना की गई है। इसके साथ ही मुंबई, गोवा, कोच्चि, विजाग, पोर्ट ब्लेयर और करवार में अन्य मानसिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए गए हैं।
जवानों के लिए समय-समय पर बैठकें भी होती रहती हैं। सभी यूनिटों में प्रशिक्षित काउंसलरों की तैनाती की गई है. सेना में शामिल किए जाने से पहले भी जवानों को मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूक किया जाता है। तनाव को दूर करने के लिए सभी यूनिटों में योग और मेडिटेशन की व्यवस्था की गई है।
सरकार सिर्फ थल सेना, वायु सेना और नौ सेना  को रहने की सुविधा उनके बच्चो के लिए स्कूल और अन्य चीज़ो के लिए सुविधाएं देती है परन्तु CRPF, ITBP SSB को यह सब सुवधाएं उपलब्ध नहीं होती। यह एक परेशानी का मुद्दा है आखिर क्यों हमारी सेना ऐसा कदम उठाने के लिए मजबूर हो जाते है।
मोदी सरकार आने के बाद भी यह सिलसिला जारी रहा। मोदी ने अपने आप को सैनको के साथ बताया परन्तु उनकी समस्या को हल करने में नाकाम रहे जिसके चलते मोदी सरकार में भी सैनिको ने आत्महत्या की।
इस रिपोर्ट के बाद देखना यह है की सरकार इन मामलो को किस तरह से सुलझाएगी। हमारी देश के लिए जान देने वाले सैनिक खुद अपने हालातो से लड़ने में नाकाम रहे पर इसका ज़िम्मेदार कौन है। यह काफी शर्मानक बात है की इन  घटनाओ में कोई कमी नहीं आयी है।

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