fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

साध्वी प्रज्ञा को स्पेशल कोर्ट ने नहीं दिया क्लीन चिट, फिर भी NIA ने कहा- नहीं है पुख्ता सबूत

Special-Court-did-not-give-Sadhvi-Pragya-a-clean-chit,-yet-NIA-said - No-solid-proof-against-her
(Image Credits: India Today)

साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के मालेगांव ब्लास्ट मामले में मुंबई की स्पेशल कोर्ट द्वारा क्लीनचिट देने की याचिका को ख़ारिज किया गया। और इसके साथ साथ भले ही मुंबई कोर्ट ने उन्हें क्लीनचिट देने से मना करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय कर दिए हो। लेकिन इसके बाद भी सरकारी अभियोजन एजेंसी एनआईए ने कोर्ट में मंगलवार को कहा कि ठाकुर के खिलाफ केस चलाने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं हैं।

Advertisement

ब्लास्ट में अपने बेटे सैयद अजहर को खो चुके पिता निसार अहम सैयद बिलाल ने याचिका दायर की थी। इस याचिका पर जवाब देते हुए एनआईए ने अपना रुख एक बार फिर दोहराया। बता दे की मालेगांव धमाके में 6 लोगों की जान से हाथ धोना पड़ा था, जबकि 101 लोग घायल हो गए थे। सैयद बिलाल ने अपनी याचिका में मांग की थी कि मामले के मुख्य आरोपियों में से एक प्रज्ञा को चुनाव लड़ने से रोका जाए क्योंकि इस मामले में अभी भी ट्रायल चल रहा है। प्रज्ञा सिंह ठाकुर को बीजेपी ने भोपाल से उम्मीदवार बनाया है।

अभियोजन एजेंसी एनआईए ने कहा प्रज्ञा की उम्मीदवारी के खिलाफ याचिका पर उसे कुछ नहीं कहना है। एनआईए की ओर से कहा गया, ‘यह मामला चुनाव और निर्वाचन आयोग से जुड़ा हुआ है। इस मामले पर कुछ कहना एनआईए के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता क्योंकि चुनाव लड़ने का मामला केस से नहीं जुड़ा हुआ है। यह फैसला सिर्फ चुनाव आयोग द्वारा लिया जाना चाहिए। इसलिए इस पर कोई टिप्पणी नहीं करेंगे।’

एनआईए ने कोर्ट से कहा, ‘हालांकि, यहां यह जिक्र करना उचित होगा कि एनआईए की ओर से 13 मई 2016 को चार्जशीट दाखिल की गई थी। एनआईए ने 10 आरोपियों के खिलाफ केस चलाने की सिफारिश की थी। यह भी बताया था कि आरोपी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (और 5 लोगों) के खिलाफ पर्याप्त सबूत नहीं मिले…जो उनके खिलाफ मामला चलाने लायक नहीं हैं।’

इस बारे में स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर अविनाश रसल ने कहा कि ठाकुर को क्लीनचिट देने वाले पैराग्राफ को केस के बैकग्राउंड में जोड़ा गया था। जब उनसे पूछा गया कि प्रज्ञा के खिलाफ आरोप तय होने का जिक्र एनआईए के जवाब में क्यों नहीं है, इस पर रसल ने कहा, वह आगे चलने वाले प्रज्ञा के खिलाफ मुकदमे में सबूत रखेंगे।


आपको यह बता दे की अगर एजेंसी फाइनल रिपोर्ट स्वीकार नहीं करती है तो, एजेंसी का दायित्व होता है कि वह आरोपी के खिलाफ सभी सबूत पेश करे। वहीं दूसरी तरफ आपराधिक साजिश और यूएपीए की धाराओं के तहत मुकदमे का सामना कर रही साध्वी ने बिलाल की याचिका को राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित बताया। और इसके साथ ही इस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। साध्वी प्रज्ञा सिंह ने कहा है कि जनप्रतिनिधित्व कानून 1951 में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो उन्हें केस लंबित होने की दशा में चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराता हो।

इतना ही कुछ होने बावजूद भी बीजेपी साध्वी प्रज्ञा का बचाव करने में पीछे नहीं हट रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में साध्वी प्रज्ञा का बचाव करते हुए कहा था, साध्वी उन लोगो का प्रतीक है जिन्होंने हिन्दुओं को आतंकवादी बताया था। पीएम मोदी ने कहा था कि प्रज्ञा भोपाल से कांग्रेस को कड़ी चुनौती देंगी।

साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने पर विपक्षी पार्टियों ने मौजूदा सरकार पर सवाल भी उठाये थे। इन सवालों का बचाव करते हुए बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा, ‘जहां तक साध्वी प्रज्ञा का सवाल है तो कहना चाहूंगा कि हिंदू टेरर के नाम से एक फर्जी केस बनाना गया था, दुनिया में देश की संस्कृति को बदनाम किया गया, कोर्ट में केस चला तो इसे फर्जी पाया गया. उन्होंने आगे कहा कि सवाल ये है कि स्वामी असीमानंद और बाकी लोगों को आरोपी बनाकर फर्जी केस बनाया तो, समझौता एक्सप्रेस में ब्लास्ट करने वाले लोग कहां है, जो लोग पहले पकड़े गए थे, उन्हें क्यों छोड़ा.’

अब देखने वाली बात यह ही की मुंबई कोर्ट द्वारा साध्वी को क्लीन चिट देने से इंकार करने के बावजूद एनआई द्वारा साध्वी के खिलाफ पुख्ता सबूत न होने की बात करना थोड़ा अजीब लगता है। आखिर एनआई किस प्रकार की जाँच कर रही है, या ऐसे कौन से तथ्य हैं जो अभियोजन एजेंसी एनआईए से छिपे हुए है।

साध्वी प्रज्ञा के मामले में मुंबई की स्पेशल कोर्ट के द्वारा उन्हें क्लीनचिट देने से इंकार करने से पता चलता है की, उनके ऊपर लगे आरोप जायज है। परन्तु दुसरी ओर अभियोजन एजेंसी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के खिलाफ केस चलाने के विरोध में है। इससे तो ऐसा प्रतीत होता है की अभियोजन एजेंसी भी कहीं न कहीं किन्ही कारणों से प्रभावित होती नजर आ रही है। या कोई इसे प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। खैर साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर दोषी है भी या नहीं यह तो सरकार और न्यायपालिका के रवैये पर निर्भर करता है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved