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अयोध्या मामले में नया मोड़, वकील ने कहा मंदिर शिफ्ट हो सकता है, राम जन्मभूमि नहीं

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अयोध्या के राम जन्मभूमि विवाद पर मंगलवार को उच्चचम न्यायालय में 13वें दिन की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों ने अपनी अपनी दलीलें सामने रखी। जिसमें मामले के एक पक्ष निर्मोही अखाड़े ने अपनी बहस पूरी कर ली।  उसके बाद राम जन्मभूमि पुनरुद्धार समिति की तरफ से वकील पीएन मिश्रा ने अपनी दलीलें रखीं। 

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निर्मोही अखाड़ा की ओर से वकील सुशील कुमार जैन ने कहा की विवादित स्थल के अंदरूनी आंगन में एक मंदिर था। वही जन्मभूमि का मंदिर है।  उन्होंने कहा कि वहां कभी कोई मस्जिद नहीं थी। इतना ही नहीं मुसलमानों को मंदिर में जाने की इजाज़त नहीं थी। वहां हिन्दू अपनी आस्था के अनुसार पूजा करते थे। 

जिसके बाद राम जन्मस्थान पुनरोद्धार समिति के वकील पीएन मिश्रा ने कहा की मंदिर को शिफ्ट किया जा सकता है, लेकिन राम जन्मभूमि को शिफ्ट नहीं किया जा सकता, जैसे मक्का और मदीना को कहीं नहीं शिफ्ट किया जा सकता है, क्योंकि ये भी आस्था से जुड़े हुए स्थान हैं। मिश्रा ने कहा कि विवादित इमारत को किसने और कब बनवाया, इसकी सटीक जानकारी नहीं है।  

उन्होंने आगे कहा की हिंदुओं के लिए यह मायने नहीं रखता कि मंदिर बाबर ने गिराया या औरंगज़ेब ने. यह मुस्लिम पक्ष के लिए अहम है कि बाबर ने मस्जिद कैसे बनवाई थी।  उन्होंने कहा कि जन्मभूमि में 85 स्तंभ मिले थे, जिनमें से 84 स्तंभ विक्रमादित्य ने स्थापित किया था और एक गरुड़ स्तम्भ था। यह एक एहम सबूत है हमारी आस्था और विश्वास है कि जन्मभूमि पर ही मस्जिद बनी है। हम लम्बे अरसे से पूजा करते आ रहे हैं। सभी गजेटियर में उस जमीन को जन्मस्थान बताया गया है। 

वकील पीएन मिश्रा ने दलील दी कि इस मस्जिद में कभी कोई इमाम या मौलाना नहीं रहा है जो अजान देकर लोगों को नमाज के लिए बुलाता हो। इस ढांचे में मस्जिद के कोई चरित्र नहीं था। इस्लाम में कहा गया है कि मस्जिद पूर्ण स्वामित्व वाली जमीन पर हो और उसे किसी इमारत को तोड़कर नहीं बनाया गया हो। उसमें अजान देने हो और उसका वक्फ सृजित किया गया हो। परन्तु इस मामले में ऐसा कुछ नहीं था। हांलांकि इस मामले की सुनवाई आगे जारी रहेगी।


आपको बता दे की अब इस मामले में आगे कौन बहस करेगा। राम जन्मभूमि विवाद मसले पर उच्चतम न्यायालय में एक पक्ष निर्मोही अखाड़े ने अपनी बहस पूरी कर ली है। मंगलवार को रामजन्मस्थान पुनरोध्दार समिति ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखान शुरू किया है। इसके बाद हिंदू महासभा बहस करेगी। हिंदू महासभा के बाद विश्व हिंदू परिषद और इसके बाद मुस्लिम पक्ष अपनी दलील रखेंगे।

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