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रविदासजी मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के जज का चौका देने वाला बयान, बताया क्यों किया ऐसा फैसला

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दिल्‍ली के तुगलकाबाद इलाके में रविदास मंदिर को कथित तौर पर हटाने के बाद पंजाब में दलित समुदाय के लोग सड़क पर उतर आए हैं।  जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। मंदिर हटाए जाने के कारण दलित समुदाय की भावनाओ को काफी ठेस पहुँची है। वही इस बीच अपने फैसले पर कायम सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि मंदिर को हटाने के उसके आदेश प्रदर्शनों पर हो रही सियासत से प्रभावित नहीं हैं।  जस्टिस अरुण मिश्रा ने सवाल किया कि ये सब क्‍या हो रहा है? लोग किस बात के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। क्‍या ये प्रदर्शन हमारे आदेश के खिलाफ हो रहे हैं? हम इस सब से प्रभावित नहीं हो रहे हैं? सुप्रीम कोर्ट ने यह कहा है की उन्हें इस प्रदर्शन से कोई फर्क नहीं पड़ने वाला। 

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रविदास मंदिर को हटाने को लेकर शुरू हुए विवाद के कारण मंगलवार को दलित समुदाय ने पंजाब में बंद रखा।  इस दौरान ज्‍यादातर दुकानें और व्‍यावसायिक प्रतिष्‍ठान बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-दिल्‍ली राजमार्ग समेत कुछ जगह सड़क पर जाम लगाया।  दलित समुदाय के लोगों ने कुछ जगह विरोध मार्च निकाला तो कई जगह धरना-प्रदर्शन किया। बताया जाता है की जब संत रविदासजी बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे, तब उन्होंने करीब 500 साल पहले इस स्थान पर आराम किया था। एक जाति विशेष के लिए यहां पर एक बावड़ी भी बनवाई थी जो आज भी मौजूद है। उस वक्त खुद सिकंदर लोदी ने संत रविदास जी को यह जमीन दान की थी। दलित समुदाय के लिए यह मंदिर एक आस्था का स्थल ही नहीं भावनाओ का प्रतिक भी है। मंदिर के टूटने के बाद से दलित समाज काफी नाराज़ है। 

दिल्‍ली के सामाजिक कल्‍याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि दिल्‍ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने पिछले शनिवार को पुलिस की मौजूदगी में मंदिर को गिरा दिया और प्रतिमा को ले गए। हालांकि, प्राधिकरण ने मंदिर शब्‍द का इस्‍तेमाल न करते हुए कहा है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर स्‍ट्रक्‍चर को हटाया है। सुप्रीम कोर्ट भी अपने इस फैसले पर अड़ा हुआ है जस्टिस मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि स्‍ट्रक्‍चर हटाने के देश की शीर्ष अदालत के फैसले का तिरस्‍कार करना और आदेश के खिलाफ सड़क पर प्रदर्शन करना अच्‍छा चलन नहीं है। हमें मामले पर हो रही राजनीति की चिंता नहीं है। 

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि हमने तथ्‍यों और कानून के आधार पर आदेश दिया है। सभी को यह अहसास होना चाहिए कि सुप्रीम कोर्ट में राजनीति के लिए कोई जगह नहीं है। बेंच में शामिल जस्टिस एमआर शाह ने भी जस्टिस मिश्रा का समर्थन किया। उन्‍होंने कहा कि ये हर जगह हो क्‍या रहा है? लगता है लोग भूल रहे हैं कि ये फैसला देश की शीर्ष अदालत ने दिया है, जो सम्‍मान की हकदार है।  कोई भी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को नजरअंदाज नहीं कर सकता है। 

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि शीर्ष अदालत आदेश के खिलाफ प्रदर्शनों को गंभीरता से ले रही है। इस तरह की हर गतिविधि को अदालत के आदेश की अवमानना माना जाएगा।  हम हर व्‍यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।


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