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अमेरिकी अखबार ने भी किया दावा, प्रधानमंत्री मोदी देश के लिए बड़ा खतरा

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(Image Credits: Dawn)

मोदी सरकार ने लोकसभा चुनाव में बड़े आंकड़ों से जीत हासिल की है। हालांकि मोदी सरकार को यह जीत कैसे मिली यह सभी लोग जानते है। कही EVM में गड़भड़ी तो कही वोटर्स के जरिये जबरन कमल को वोट दिलवाया गया। बीजेपी को जीत तो मिल गयी परन्तु विशेषज्ञों ने यह माना है की मोदी की जीत देश के लिए ठीक नहीं है।

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मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए भी कई लोगो का मानना था की मोदी देश के लिए सही नहीं है। पांच सालो में जो देश में काम हुआ वह मोदी सरकार की बड़ी नाकामयाबी को दर्शाता है। परन्तु इसके बावजूद भी मोदी सरकार ने अपने काम को बढ़ा चढ़ा कर बताया है।

मोदी की इस जीत को भले ही लोग बड़े जश्न से मना रहे हो परन्तु इस जीत को नकारात्मक प्रतिक्रिया भी मिल रही है। जनसत्ता खबर के अनुसार कई ऐसे बड़े अखबार है जिन्होंने मोदी को देश के लिए खतरा बताया है। हम सभी जानते है की मोदी के रहते देश में किस प्रकार से भेदभाव और धर्म के नाम पर लोगो को बाँट दिया गया। हिन्दू राष्ट्रवादी पार्टी कहलाने वाली मोदी सरकार एक बार फिर से सत्ता में आ गयी है और अब दिन दूर नहीं जब सभी लोगो में सिर्फ हिन्दू धर्म की बाते फैलाई जाएँगी।

नामी अख़बार ‘द गार्डियन’ और ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने नरेंद्र मोदी की बतौर प्रधानमंत्री वापसी को भारत और विश्व के लिए ख़राब बताया है। ‘द गार्डियन’ ने लिखा है कि 1971 के बाद भारतीय जनता पार्टी लगातार दूसरी पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनने जा रही है। पांच सालों तक अर्थव्यवस्था की बदहाली के बावजूद मोदी ने पिछले चुनाव के मुक़ाबले ज्यादा सीट हासिल की है। यह भारत और दुनिया के लिए बुरी ख़बर है।

अख़बार ने अपने संपादकीय में लिखा है की, “बीजेपी ‘हिंदू राष्ट्रवाद’ की एक राजनीतिक शाखा है, जो भारत को गर्त में ले जा रही है। यह जानकर थोड़ा ताज्जुब होगा कि हिंदू समाज में प्रभाव रखने वाले सवर्णों, उद्योगपति-परस्त अर्थव्यवस्था, सांस्कृतिक रूढ़िवाद, महिलाओं के प्रति पारंपरिक घिसी-पिटी राय और राज्य की शक्तियों के साथ बीजेप हमेशा खड़ी रही है।


मोदी को मिली प्रचंड जीत से भारत की आत्मा ‘अंधकारमय’ राजनीति के आगोश में खो जाएगी।19.5 करोड़ मुसलमानों के प्रति दोयम दर्जे के नागरिक का विचार बढ़ जाएगा।” ‘द गार्डियन’ ने लोकसभा में मुसलमानों के घटते प्रतिनिधित्व पर भी सवाल उठाए हैं और उसके लिए हिंदुत्व की राजनीति को उत्तरदायी बताया है। अख़बार ने लिखा है की, “संख्या बल होने के बावजूद भी मुसलमान ‘राजनीतिक अनाथ’ बन चुके हैं। राजनीतिक वर्ग बहुसंख्यक हिंदुओं का वोट गंवाने के डर से मुसलमानों से दूरी बना रहा है।”

यहाँ तक की अमेरिका के न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी बीजेपी की जीत को नकारात्मक रूप से देखा है और अपने अखबार में उसके बारे में कई सार बाते लिखी है। अमेरिका के ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने NDA की जीत पर नकारात्मक लेख छापा है और इसमें पंकज मिश्रा द्वारा लिखे लेख में नरेंद्र मोदी के लिए भारत का ‘हिंदू राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया है।

इस लेख में भी पीएम मोदी के जीत की तुलना ‘हार्ड-हिंदुत्व’ के नजरिए से की गई है। न्यूयॉर्क टाइम्स के लेख की शुरुआत पीएम मोदी के बालाकोट बयान को लेकर काफी मजाक उड़ाया गया, जिसमें उन्होंने बालाकोट एयरस्ट्राइक के दौरान विशेषज्ञों के राय को दरकिनार कर बादलों की आड़ में अटैक करने का निर्देश दिया था।

अख़बार ने मोदी को ‘विज्ञान के प्रति अंजान’ व्यक्ति करार दिया है और उनके तर्क को भी काफी बचकाना बताया गया है जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘बादलों के बीच विमानों को पाकिस्तानी राडार ट्रेस नहीं कर पाएंगे’,। इसके अलावा नोटबंदी पर भी हमला किया गया है और अर्थव्यवस्था को मिट्टी में मिलाने वाला व्यक्ति करार दिया है।

अखबार में लिखे लिखे लेख में मोदी के कार्यकाल को हिंसक दौर के तौर पर दिखाया गया है। अख़बार लिखता है, “मोदी के कार्यकाल के दौरान भारत में वर्चुअल और रियल दोनों टर्म पर हिंसक घटनाएं हुई हैं। इस दौरान टीवी एंकर और ट्रोल आर्मी ने आलोचकों को एंटी-नेशनल करार दिया। ट्रोल्स ने औरतों को रेप करने की धमकी दी।

मुस्लिम की मॉब लिंचिग की गई। जूडिशरी से लेकर सेना, न्यूज़ मीडिया, विश्वविद्यालय सभी जगहों पर हिंदुत्व प्रधान विचारधारा ने अपनी जड़ें जमा लीं।” न्यूयॉर्क टाइम्स में लिखे लेख में पंकज मिश्रा ने मोदी की वर्तमान जीत को भारत के लिए एक लंबे डरावने सपने की तरह बताया है।

अब तो बहार देश के अखबार ने भी यह दावा कर दिया है की मोदी की यह जीत देश को अन्धकार में ले जाएगी। मोदी की इस जीत को भले सरकार अपनाये परन्तु यह सच है की मोदी के प्रधानमंत्री रहते हुए देश को उन्नति पर ले जाना एक बड़ी चुनौती होगी।

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