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योगी के कुंभ में हुआ सबसे बड़ा बिजली घोटाला, मंत्री से अधिकारी तक सभी शामिल

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(image credits: Moneycontrol)

भाजपा वाले योगी सरकार में कुम्भ मेले को बड़े ही ज़ोरो शोरो के साथ मनाया गया। कुम्भ को ऐतिहासिक मेला बनाने वाले योगी आदित्यनाथ ने कुम्भ के लिए लगभग 4200 करोड़ से भी अधिक का बजट दिया। कुम्भ मेले को बीते कई महीने हो चुके और अब उससे सम्बंधित मामले और घोटाले भी सामने आ रहे है।

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हाल ही में कुम्भ के आयोजन के दौरान बड़ी मात्रा में बिजली कंपनी को मुनाफा पहुचाने की खबर सामने आई है। कुंभ मेले के दौरान झूसी में बने शास्त्री पुल से अंदावा तक विद्युतीकरण कार्य कराया गया था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि विद्युतीकरण हुआ ही नहीं और ठेका लेने वाली कंपनी को भुगतान कर दिया गया है। बिजली कंपनियों ने फ़र्ज़ी कागजात तैयार कर बड़ी मात्रा में सरकार से पैसे लिए सूत्रों की माने तो इस बड़ी साजिश में कई मंत्री व अधिकारी भी शामिल है।

एक जनहित याचिका के दौरान इस मामले की सच्चाई समाने खुलकर आई है। इस मामले में संबंधित कंपनी के ऊपर मुकदमा दर्ज किया गया है। जबकि इसकी जांच के लिए अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कंपनी, प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी व योगी सरकार से जवाब मांगा है। इस याचिका पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी और उसके पहले ही सभी पक्षों को अपना जवाब दाखिल करना है।आखिर यह पूरा मामला है क्या यह हम आपको बता देते है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में बताया गया है कि कुंभ मेले के दौरान बिजली पहुचने के लिए टेंडर जारी किया गया था। इस दौरान प्रयागराज डेवलपमेंट अथॉरिटी के अधिशासी अभियंता अवनींद्र कुमार सिंह की मिलीभगत से मेसर्स अनू वेन्चर्स को विद्युतीकरण यानी बिजली पहुचने का ठेका दिया गया।

यह कंपनी गाजियाबाद के प्रताप बिहार की है और कुंभ में कार्य करने के लिए यह ऑथराइज्ड की गई थी। आश्चर्यजनक बात यह है कि कंपनी के पास काम करने का कोई एक्सपीरियंस नहीं था। उसके बावजूद उसके लिये अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनवाया गया। कंपनी के नाम नगर पालिका परिषद अयोध्या में कार्य का फर्जी प्रमाणपत्र दिखाकर जालसाजी की गई और विद्युतीकरण का काम ना करने के बावजूद भी मिलीभगत से भुगतान कर दिया गया।


बड़े अधिकारियो मंत्रियो और नगर निगम सभी की मिलीभगत से सरकार को करोड़ों रुपए की चपत लगाई गई और मामले को दबाने के लिए भरपूर्ण प्रयास किया गया । लेकिन, अब मामला खुलने के बाद इसमें कार्यवाही का दौर शुरू हुआ है।10 जुलाई को अगली सुनवाई कुंभ मेले में विद्युतीकरण के नाम पर हुए घोटाले के खुलासे के लिए अधिवक्ता अरुण मिश्रा ने याचिका दाखिल की है और उन्होंने इस पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र कमेटी गठित करने व विजिलेंस टीम से जांच कराने का आग्रह किया है।

याचिका पर जस्टिस रामसूरत मौर्य तथा जस्टिस पीयूष अग्रवाल की खंडपीठ ने सुनवाई की है और सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए 10 जुलाई तक अपना जवाब दाखिल करने को कहा है। याचिका पर अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी।

कुंभ के दौरान विकास कार्यों में घोटालों को लेकर पिछले 4 महीने से लगातार छोटे बड़े मामले सामने आ रहे हैं। 4000 करोड़ से अधिक का बजट पास करने वाली भाजपा की सरकार के कुम्भ मेले के नाम पर करने वाले घोटाले धीरे धीरे सामने आ रहे है।

जहा एक तरफ कुम्भ में सिर्फ अमीर लोगो को सुविधा देने के लिए इतनी बड़ी रकम खर्च की गई वही गरीबो की आस्था को कुचल दिया गया। जैसे जैसे घोटालो की लिस्ट सामने आ रही है अब सरकार दबाव में आकर उनपर करवाई करने को मजबूर है। मेला प्राधिकरण द्वारा कार्रवाई के दिये कई बड़े कदम उठाए गए हैं। जिनमें करोड़ों के भुगतान पर रोक लगाने के साथ कई जांच भी चल रही है।

विद्युतीकरण के मामले में धांधली का मामला में कानूनी कार्यवाही का क्रम भी शुरू किया गया। पहले भी 22 फरवरी 2019 को अनू वेन्चर्स के खिलाफ गबन व षड्यंत्र के आरोप में सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। लेकिन, इस मामले में मुकदमा दर्ज कराने की खानापूर्ति के बाद कोई कार्यवाही नहीं की गई।

जबकि इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता ने 16 मार्च को घोटाले की जांच के लिए एक मांग पत्र भी भेजा था। लेकिन, पूरे मामले को रफा-दफा करने के लिए खेल चल रहा था। अब मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंच चुका है और हाईकोर्ट ने इस पूरे प्रकरण में सभी पक्षों से जवाब दाखिल करने को कहा है। सभी तरफ से इस प्रयागराज कुम्भ मेले में हुए घोटालो को दबाने के लिया योगी सरकार के तरफ से प्रयास किया जा रहा है।

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