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बुलेट ट्रेन के लिए भूमि अधिग्रहण में सरकार ने नहीं किया नियमों का पालन, जानकर हैरान हो गए जापानी अधिकारी

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(Image Credits: btvi.in)

नरेंद्र मोदी सरकार की महत्वकांक्षी बुलेट ट्रेन योजना को भारत लाने का सपना साकार होता दिखाई दे रहा है। परन्तु इस प्रोजेक्ट को लेकर किये गए भूमि अधिग्रहण कि प्रक्रिया और पर्यावरण को लेकर कई मुद्दे उठाये जा रहे हैं।

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दरअसल बुलेट ट्रेन के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की जा रही है जिसके कारण किसान और पर्यावरणविद इसके लिए सरकार से अपनी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। इसके साथ एक खबर और आ रही है की किसानों और पर्यावरणविदों ने जापान इंटरनेशनल को- ऑपरेशन एजेंसी (JICA) के प्रतिनिधियों से इस विषय में मुलाकात करी है।

बता दें की JICA वह नियामक संस्था है, जो भारत को बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 1.08 लाख करोड़ रुपए का फंड उपलब्ध कराएगी। कहा जा रहा है की जब किसानों और पर्यावरणविदों से JICA के अधिकारियों को यह ज्ञात हुआ की बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए भूमि अधिग्रहण में तय नियमो को अनदेखा किया गया है तो वह दंग रह गए।

JICA से किसान संगठन ‘खेदुत समाज गुजरात’ के अध्यक्ष जयेश पटेल ने मुलाकात करी और उन्होनें संडे एक्सप्रेस के साथ बातचीत में बताया कि, “हमने जापानी अधिकारियों को सभी दस्तावेज दिखाए, जिनमें इस प्रोजेक्ट से प्रभावित किसानों द्वारा हाईकोर्ट में दाखिल किए गए हलफनामे भी शामिल थे…..हमने उन्हें बताया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट से 2200 किसान और गुजरात के 8 जिलों के 192 गांव प्रभावित हो रहे हैं। गुजरात सरकार किसानों की बात नहीं सुन रही है और उसने इतने कम मुआवजे की घोषणा की है कि उस पैसे से किसान आसपास के इलाकों में अपने गुजारे के लिए खेती की जमीन भी नहीं खरीद सकते। हमने उन्हें किसानों की गिरफ्तारी वाली तस्वीरें और न्यूजपेपर की कटिंग भी दिखाईं। वो (JICA अधिकारी) इस बात से काफी हैरान दिखाई दिए कि सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए प्रभावित किसानों से बातचीत नहीं की और भूमि की नपायी के लिए सीधे अधिकारियों को भेज दिया।”

जयेश पटेल ने आगे बताया, जीसा अधिकारी इस बात से चकित थे कि किसानों की सही स्थिति उन्हें नहीं बतायी गई और सरकार ने भूमि अधिग्रहण के लिए जो तस्वीर दिखायी वो इससे पूरी तरह से अलग है। जीसा अधिकारियों ने हमें बताया कि वह इस मुद्दे को जीसा की टॉप अधिकारियों के सामने उठाएंगे।”


JICA की 3 सदस्यों वाली टीम ने प्रोजेक्ट से प्रभावित होने वाले किसानों से बातचीत की। संस्था JICA की अगुवाई कातसुओ मातसुमातो हैं।

किसानों के अलावा पर्यावरणविद रोहित प्रजापति ने भी JICA के अधिकारियों से मुलाकात की। रोहित ने बताया कि, “जीसा की गाइडलाइंस के तहत प्रभावित किसानों को भूमि अधिग्रहण से पहले अच्छा-खासा वक्त दिया जाना था। लेकिन यहां जिलाधिकारी ने ऐलान के बाद सिर्फ 24 घंटे का समय किसानों को दिया। पर्यावरण मंत्रालय के अधिकारी, वन मंत्रालय और सामाजिक न्याय विभाग का एक भी अधिकारी बैठक के दौरान मौजूद नहीं रहा।”

बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए 1434 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है। जिस जमीन पर 508 किलोमीटर लंबा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनाया जायगा। अधिग्रहित की जाने वाली कुल जमीन में से 1081 हेक्टेयर जमीन गुजरात से अधिग्रहित की जायगी।

बता दें की गुजरात में किसानों के साथ इस प्रकार का अन्याय होना नई बात नहीं है। अभी हाल ही में गुजरात के नर्मदा नदी के सरदार सरोवर बांध पर बने सरदार पटेल की प्रतिमा के कारण भी किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। दरसअल सरदार सरोवर बांध में इंदिरा सागर बांध द्वारा छोड़ा गया अतिरिक्त पानी डायवर्ट किए जाने से किसानों के लिए पानी का संकट बन गया है। सरकार सरदार सरोवर बांध में ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहाँ बोटिंग की सुविधा शुरू की है जिसके लिए पानी का एक न्यूनतम स्तर बनाये रखना जरूरी है।

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