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गुजरात में साल 2018 में दलितों के साथ होने वाली घटनाओ में देखी गई वृद्धि

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(Image Credits: The Indian Express)

मौजूदा सरकार में दलित समुदाय के लोगो के साथ होने वाले अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहे है। बल्कि किसी किसी राज्य में अत्याचार की घटनाओं में इजाफा भी देखा गया है। सरकार चाहे कितने ही दावे कर ले लेकिन बीजेपी सरकार का दलितों के प्रति क्या रवैया रहा है, ये सब जानते है।

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बात करते है गुजरात की जहाँ पिछले साल में दलित के साथ होने वाली घटनाओ में वृद्धि देखी गई है। एक आरटीआई के खुलासे से पता चलता है कि गुजरात में जनवरी 2018 से दिसंबर तक अत्याचार के 1545 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमे छोटे से लेकर दलितों के साथ किये जाने वाले गंभीर मामले शामिल है। अब आकड़ो को हमेशा तो झूठलाया नहीं जा सकता।

इन आकड़ो से यह पता चलता है की गुजरात की बीजेपी सरकार दलितों के साथ होने वाली घटनाओ को रोकने में असफल रही है। राज्य में अहमदाबाद जैसे शहर में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामले में कटौती होने की बात कही जाती है। परन्तु सच्चाई यह है की, 2018 में अकेले अहमदाबाद शहर में ही अत्याचार के 140  मामले दर्ज किए गए थे। वहीं हम अगर 2001 की बात करे तो उस दौरान अत्याचार के 59 केस रजिस्टर हुए थे,और 2007 में 62 और 2016 में 96 ऐसे मामलो को दर्ज किया गया था।

पिछले एक साल में गुजरात में दलितों पर अत्याचार के कई ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिन्होंने देश और दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। जिसमें दलित युवा पर सिर्फ इसलिए हमला कर दिया जाता है क्यूंकि उसने मूंछे रख ली थी। इसके अलावा कभी दलित दूल्हे को घोड़े पर बिठाने पर दूल्हे समेत बारातियों पर हमला कर दिया जाता है।

दलित युवा के मूंछे रख लेने पर उस पर हमला कर देना ये बेहद ही शर्मनाक है। सवर्ण समाज के लोगो द्वारा दलितों के प्रति इस हद तक ईर्ष्या रखने से समाज में उनकी घटिया मानसिकता का पता चलता है। दलितों के साथ होने वाले अत्याचारों के पीछे एक अहम कारण यह भी है की समाज में सभी समुदाय के लोगो को बराबर का हक न मिलना। इसके साथ साथ समाज में एक ऐसी सोच का फैलना जहाँ एक समुदाय के लोगो द्वारा अपने आप को सर्वोच्च माना लिया जाता है।


आरटीआई के अनुसार प्राप्त किये गए आकड़ो से गुजरात सरकार की सच्चाई सामने आ गई है। जिसे सरकार शायद दलित समुदाय के लोगो से कभी साझा नहीं करती। दलितों के साथ होने वाली घटनाओ में समाज के कुछ लोगो के साथ साथ राज्य सरकार भी जिम्मेवार है। लोकतंत्र में सरकार को बिना भेदभाव सभी नागरिको के हक़ के लिए काम करना चाहिए। परन्तु जब कुछ पार्टियां किसी एक समुदाय की सोच से प्रभावित होकर निर्णय लेती है तो समाज में इस तरह का भेदभाव होना स्वभाविक हो जाता है।

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