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डेढ़ साल में सबसे कम बढ़ी जीडीपी, पांच साल में सबसे खराब रहेगा 2018-19 का आंकड़ा

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(Image Credits: Independent BD)

भारतीय अर्थव्यवस्था में वृध्दि की बात करने वाले मोदी सरकार की सच्चाई धीरे धीरे सामने आ रही है। सरकार अक्सर देश के GDP में बढ़ोतरी की बात करती रहती है। लेकिन क्या सिर्फ बाते करने से देश की अर्थव्यवस्था में सुधार हो जाएगा। आकड़ो से पता चलता है की देश में तीसरी तिमाही (अक्टूबर-दिसंबर) में कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के कमजोर प्रदर्शन के कारण और इसके साथ उपभोक्ता मांग नरम पड़ने से आर्थिक वृद्धि दर सिर्फ 6.6 प्रतिशत ही रही है, जो की पिछली पांच तिमाही में सबसे कम है।

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इसके साथ ही 31 मार्च को समाप्त होने जा रहे चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर के पहले से अनुमानित 7.2 प्रतिशत से घटकर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। आर्थिक वृद्धि का संशोधित अनुमान, यानी 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान यदि सही साबित होता है तो, यह पिछले पांच साल की सबसे कम वृद्धि होगी।

इससे पता चलता है की जब से मोदी सरकार सत्ता में आई है। तभी से GDP में विकास की गति कम होती आ रही है। कृषि और विनिर्माण क्षेत्र के खराब प्रदर्शन का कारण मौजूदा सरकार की गलत नीतियां जिम्मदार हैं। सरकार की गलत नीतियों के कारण ही देश की अर्थव्यवस्था में पिछले 5 सालों में सबसे कम वृद्धि दर्ज होगी।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) के आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता व्यय दिसंबर तिमाही में 8.4 प्रतिशत रहा जो पिछली तिमाही में 9.9 प्रतिशत था।अगर कृषि क्षेत्र की बात करे तो वृद्धि दर मौजूदा तिमाही में कम होकर 2.7 प्रतिशत रही। जो दूसरी तिमाही में 4.2 और पहली तिमाही में 4.6 प्रतिशत रही।

वही दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले रिफाइनरी तथा बिजली उत्पादन क्षेत्र में भी कमी आई है। इसमें कमी आने के कारण आठ बुनियादी उद्योगों की वृद्धि दर जनवरी 2019 में कम होकर 19 महीने के सबसे न्यूनतम स्तर 1.8 प्रतिशत रही जो दिसंबर 2018 में 2.7 प्रतिशत थी।


इस पर अर्थशास्त्री देवेन्द्र कुमार पंत ने कहा की वित्त वर्ष 2018-19 में जीडीपी वृद्धि दर 7 प्रतिशत रहने का अनुमान बताता है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार हल्की हो रही है। (CSO) के अनुसार वित्त वर्ष 2018-19 में कृषि क्षेत्र की सिर्फ वृद्धि दर 2.7 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र में 8.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

इसके साथ साथ व्यापर और होटल तथा परिवहन क्षेत्र की वृद्धि दर कम होकर 6.8 प्रतिशत रहने की संभावना है। बुनियादी उद्योग की वृद्धि दर के बारे में पंत ने कहा, “अक्टूबर महीने से बुनियादी उद्योग की वृद्धि दर में गिरावट औद्योगिक गतिविधियों में कमजोर रुख तथा दूसरी छमाही में सुस्त आर्थिक वृद्धि का संकेत देता है।

पिछले 5 सालों में GDP में गिरती हुई वृद्धि से पता चलता है की मोदी सरकार द्वारा देश की अर्थव्यवस्था के लिए बनाई गई नीतियां असलफल रही है। पिछले साल कच्चे तेल और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण उद्योगों की वृद्धि में भारी गिरावट देखी गई। इससे यह पता चलता है की सरकार अर्थव्यवस्था को ठीक ढंग से चलाने में असमर्थ साबित होती दिख रही है।

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