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रोजगार को लेकर देश में आने वाला है बड़ा संकट, मोदी सरकार होगी जिम्मेदार

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(image credits: The Coast News)

नौकरी से जुड़े सभी आंकड़े केंद्र सरकार की सच्चाई बता रही है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान लोगो को नौकरी देने की बात कही थी वहीँ अब दूसरे कार्यकाल के दौरान भी मोदी सरकार ने रोजगार देने की बात कह कर लोगो के अंदर उम्मीद जगा दी। परन्तु कई ऐसे आंकड़े सामने आये है जिनमे रोजगार के आंकड़े बहुत ही कम होते नजर आये है। ऐसे में मोदी सरकार ने खुद की नाकामी को छुपाये रखा और रोजगार से जुड़े आंकड़ों को सार्वजानिक करने से बचती रही।

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यही नहीं चुनाव के दौरान भी मोदी सरकार ने रोजगार में बढ़ोतरी की बात कही थी जो अब बिलकुल झूठ साबित होती दिख रही है। सभी विपक्षी पार्टी मोदी और केंद्र सरकार को इस मुद्दे को लेकर घेरने में लगी है।

केन्द्र की मोदी सरकार आर्थिक मोर्चे पर बुरी तरह से घिरी हुई है। जनसत्ता में छपी खबर के अनुसार एक नयी रिपोर्ट पर नजर डालें तो ऐसा लगता है कि सरकार की मुश्किलें आने वाले दिनों में और ज्यादा बढ़ सकती हैं। दरअसल आने वाले दिनों में देश में नौकरियों की मुसीबत बढ़ने वाली है! रिपोर्ट के अनुसार, देश में नई नौकरियों कम पैदा होंगी और इसकी वजह मशीनीकरण (ऑटोमेशन) को बताया जा रहा है। इकॉनोमिक टाइम्स ने TeamLease Service के हवाले से एक खबर पेश की है, जिसमें बताया गया है कि ई-कॉमर्स, बैंकिंग, फाइनेशियल सर्विस, इंश्योरेंस और बीपीओ-आईटी सेक्टर की नौकरियों में साल 2019-23 के बीच 37% की गिरावट आ सकती है। यह गिरावट 2018-22 की अनुमानित आंकड़ों से भी नीचे है।

उक्त सेक्टर्स के अलावा मार्केटिंग, एडवरटाइजिंग, कृषि, एग्रोकेमिकल, टेलीकम्यूनिकेशंस, बीपीओ, आईटी, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल जैसे अहम क्षेत्रों में भी नौकरियों की दर में गिरावट आ सकती है। टीम लीज की वीपी ऋतुपर्णा चक्रवर्ती के अनुसार, ‘अगले चार सालों में अधिकतर सेक्टर्स में लंबे समय में देखें तो नौकरियों का संकट बढ़ सकता है। और यह संकट तब तक चलेगा, जब तक हमारे नीति नियंता एआई/ ऑटोमेशन को ध्यान में रखते हुए पॉलिसी नहीं बनाते हैं।’

रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में जो कर्मचारी आधुनिक तकनीक और नई स्किल से लैस होंगे उन्हें कम स्किलफुल कर्मचारियों की तुलना में ज्यादा फायदा होगा। नौकरियों के इस संकट का असर सबसे ज्यादा एग्रीकल्चर और एग्रोकेमिकल सेक्टर पर पड़ सकता है और इस सेक्टर में आने वाले सालों में 70% तक नौकरियों में गिरावट आ सकती है। वहीं कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट सेक्टर में 44% नौकरियों की वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑटोमोबाइल और अलाइड इंडस्ट्रीज में सबसे ज्यादा नौकरियों के मौके मिल सकते हैं, लेकिन इस सेक्टर में ग्रोथ की बात करें तो यह सिर्फ 10% ही रहेगी।


जब सारा काम ऑटोमाशिन के जरिये होंगे तो फिर इंसानो की जरूरत कम होगी। मोदी हमेशा ही आधुनिक भारत की बात करते रहे है ऐसे जब सब आधुनिक हो जायेगा तो रोजगार कैसे बढ़ेंगे। आने वाले समय में लोगो की मुसीबते बढ़ सकती है। देखना यह है की अपने कार्यकाल में केंद्र सरकार किस प्रकार नौकरियां इजात करती है।

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