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आरटीआई में बदलाव कर सरकार ने सीआईसी के पांच आदेशों का लिया बदला: कांग्रेस सांसद जयराम रमेश का आरोप

(image credits: Scroll.in)

अभी हाल ही में सूचना अधिकार में संसोधन को लेकर लोकसभा में पास किये गए विधयेक पर पूर्व चुनाव आयुक्तों ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किये। इतना ही नहीं विपक्षी दलों के कड़े विरोध के बाद भी इसे पास कर दिया गया। विपक्षी दलों ने सूचना अधिकार में किये गए बदलाव को लेकर इसकी पारदर्शिता पर भी सवाल उठाये थे

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वही 25 जुलाई को संसद में बहस के दौरान कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने भी कानून में संसोधन को लेकर बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने इस संदर्भ में पांच महत्वपूर्ण आदेशों के बारे में बताया और कहा की, इन्हीं आदेशों की वजह से सरकार आरटीआई कानून में संशोधन करने के लिए विधेयक लेकर आई है।

कांग्रेस सांसद ने कहा कि 2003 और 2013 के बीच जब गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री (नरेंद्र मोदी) योजना आयोग आया करते थे तो आयोग उनसे राज्य की स्वास्थ्य एवं शिक्षा की स्थिति को लेकर कठिन सवाल पूछता था.

जयराम रमेश ने आगे कहा, साल 2014 में जब गुजरात के मुख्यमंत्री प्रधानमंत्री बनें तो उन्होंने बदले की भावना में योजना आयोग को खत्म कर दिया. आज भारत के प्रधानमंत्री सीआईसी के इन पांच फैसलों के लिए बदला ले रहे हैं.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इन पांच फैसलों का राज्यसभा में उल्लेख किया, उनमे में सबसे पहले आदेश है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री सार्वजनिक करने के लिए सीआईसी का आदेश” बता दें की जनवरी 2017 में, तत्कालीन केंद्रीय सूचना आयुक्त प्रो. एम. श्रीधर आचार्युलु ने दिल्ली विश्वविद्यालय को निर्देश दिया कि वे 1978 के सभी बीए छात्रों से संबंधित रिकॉर्ड के निरीक्षण की सुविधा दें. इसी साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी डिग्री हासिल की थी। परन्तु इसके बाद आचार्युलु को मानव संसाधन विभाग के मामलों को देखने की जिम्मेदारी से हटा दिया गया था।


दूसरा आदेश है नोटबंदी पर हुई रिजर्व बैंक की बैठक से संबंधित जानकारी का खुलासा करने का आदेश, बता दें की इसी साल फरवरी 2019 में सीआईसी ने आरबीआई को निर्देश दिया कि नोटबंदी की घोषणा करने से पहले रिजर्व बैंक के निदेशकों के बोर्ड की हुई बैठक की मिनट्स ऑफ मीटिंग सार्वजनिक की जाए।

तीसरा आदेश वह है, जिसमे सीआईसी ने प्रधानमंत्री कार्यालय को निर्देश दिया कि वे पूर्व आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन द्वारा फरवरी 2015 में भेजे गए बड़े फ्रॉड करने वालों की सूची सार्वजनिक करें।

वहीँ चौथा आदेश देश काले धन से जुड़ा है, जिसमे बताया गया की, अक्टूबर 2017 में सीआईसी ने माना कि विदेश में रखे काले धन पर बनी विशेष जांच दल (एसआईटी) एक पब्लिक अथॉरिटी (सार्वजनिक प्राधिकार) है और इसे निर्देश दिया कि वे विदेश से लाए गए भारतीयों के काले धन के बारे में जानकारी दें।

पांचवा और आखिरी आदेश फर्जी राशन कार्ड के बारे में जानकारी देने से जुड़ा है, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि सीआईसी द्वारा दिए गए एक आदेश से इस बात की पुष्टि हुई कि फर्जी राशन कार्ड को लेकर लोकसभा में नरेंद्र मोदी द्वारा दिया गया बयान गलत था। दरअसल प्रधानमंत्री ने दावा किया कि करीब चार करोड़ फर्जी राशन कार्ड को खत्म किया गया है। जबकि आरटीआई आवेदन के जरिए पता चला कि ये संख्या करीब 2.3 करोड़ थी।

उन्होने आगे कहा, ‘सीआईसी ने पीएमओ को निर्देश दिया था कि विदेशों से लाए गए काले धन के बारे में जानकारी दें. हालांकि सीआईसी के आदेश के बावजूद पीएमओ ने जानकारी देने से मना कर दिया.’

इन सभी बातो ऐसा प्रतीत होता है की माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बदले की भावना से सूचना अधिकार कानून में बदलाव किया है। मौजूदा सरकार अपनी विपफलताओ को सामने आने से रोकने के लिए कानून में इस प्रकार का संसोधन किया है जिससे उन्हें काफी लाभ मिल सकता है। सूचना के अधिकार से छेड़छाड़ करना उचित नहीं लगता, वो भी इस प्रकार का छेड़छाड़ जिसके कारन इसकी पारदर्शिता बहुत हद तक प्रभावित हो सकती है।

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