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1984 सिख दंगो में दो लोग दोषी करार, भाजपा-अकाली विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक दोषी को मारा थप्पड़

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गुरूवार 15 नवम्बर को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने साल 1984 में हुए सिख दंगो में दो लोगो को दोषी करार दिया है। इसी बीच भातरीय जनता पार्टी विधायक मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में उन दो दोषियों में से एक को थप्पड़ जड़ दिया। उन्होंने थप्पड़ मारने की वजह बताई की उन्हें उकसाया गया था। दोषी ने तब उनसे कहा था “भूल गए याद दिलाऊं क्या ?” यह वारदात तब हुई जब उन दो दोषियों को कोर्ट से तिहाड़ जेल ले जाया जा रहा था।

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सूचना के अनुसार सिख विरोधी दंगो की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अदालत की और से दोषी ठहराए गए दो लोगो के मामले को दुर्लभ में से दुर्लभतम बताते हुए उन्हें मौत की सजा देने की मांग की है। अतिरिक्त सत्र न्यायधीश अजय पांडे की अदालत ने बुधवार को हरदेव सिंह और अवतार सिंह की हत्या के लिए नरेश सहरावत और यशपाल सिंह को दोषी करार दिया है। दोनों दोषियों को 20 नवम्बर को सजा सुनाई जाएगी। दूसरी और दोषियों को तिहाड़ जेल ले जाने के दौरान बीजेपी अकाली दाल के विषयक मनजिंदर सिंह सरसा ने एक दोषी यशपाल सिंह को थप्पड़ मार दिया।

गुरूवार को सजा पर जिरह सुनने के बाद अदालत ने अपने फैसले को सुरक्षित कर लिया है। अब दोनों दोषियों को कितनी सजा देनी है इसका फैसला 20 नवम्बर को होगा। बचाव पक्ष की तरफ से रहम की अपील है और न्यूनतम सजा के तौर पर उम्रकैद की मांग की है।


16 नवम्बर को सजा की सुनवाई के लिए दोषियों को पटियाला हॉउस अदालत में पेश किया गया था। इस दौरान सिख समुदाय के कुछ लोगो ने दोषियों पर हमले की कोशिश की। सुनवाई के बाद दोषियों को अदालत से बंदीगृह यानी तिहाड़ जेल ले जाया जा रहा था। तभी वहां खड़े सिख समुदाय के लोगो ने पुलिस हिरासत में ही आरोपियों पर हमला कर दिया। इस बीच दोषियों को बचाने के दौरान पुलिस और सिख समुदाय के बीच झड़प हो गयी। भाजपा -अकाली दल के विधायक मनजिंदर सिंह सरसा ने एक दोषी यशपाल सिंह को थप्पड़ जड़ दिया।

दोषी को थप्पड़ मारने और कानून हाथ में लेने के बाद वहां मौजूद संवाददाताओं से कहा “इन्होने सैकड़ो निर्दोष लोगो को मारा, इनमे से तो कई अभी भी खुलेआम घूम रहे है।” यह मामला हरदेव सिंह के भाई संतोष सिंह ने दर्ज कराया था। इस मामले पर दो बार सुनवाई हुई। दिल्ली पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर 1994 में यह मामला बंद कर दिया था, परन्तु दंगो की जाँच के लिए गठित एसआईटी ने मामले को दोबारा खोला।

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