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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी पर सांसद निधि में घपला करने का आरोप, गुजरात हाईकोर्ट ने अपनाया सख्त रुख

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(Image Credits: India Today)

मौजूदा सरकार अक्सर काले धन और भ्र्ष्टाचार को खत्म करने की बात करती है। और कभी कभी तो सरकार इसको लेकर विपक्षी पार्टियों पर भी गंभीर आरोप लगाती है। सरकार हमेशा अपने कामों में पारदर्शिता की बात करती है, और अपने आप को पाक साफ बताती है। साथ में सरकार यह भी दावा करती है की उन्होंने भ्र्ष्टाचार को खत्म करने के लिए कई बड़े कदम उठाये है।

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एक तरफ जहाँ सरकार अपने कामो में कोई गड़बड़ी न होने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर उनकी ही पार्टी से राज्य सभा सांसद स्मृति ईरानी के सांसद निधि में घपला होने की बात सामने आई है। दरअसल केंद्रीय कपड़ा मंत्री और गुजरात से पार्टी की राज्य सभा सांसद स्मृति ईरानी की सांसद निधि के कामों में घपले के मामले में दायर जनहित याचिका पर गुजरात हाईकोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। कैग की रिपोर्ट से खुलासा होने के बाद गुजरात के एक कांग्रेस विधायक इस मामले को लेकर अदालत की चौखट पर पहुंचे हैं।

बता दें की गुजरात कांग्रेस अध्यक्ष और आणंद जिले में अन्क्लाव विधानसभा सीट से विधायक अमित चावडा ने जुलाई 2017 में स्मृति के खिलाफ जनहित याचिका दायर की थी। जिसमें आरोप लगाया था कि राज्यसभा सांसद के रूप में जारी निधि में गड़बड़ी हुई है, कार्यदायी संस्था ने घोटाला किया है। इस मामले में हुई जांच में भी गड़बड़ी की पुष्टि हुई, जिसके बाद से ही कार्यदायी एजेंसी से वसूली के आदेश जारी कर दिए गए थे।

मामले में गुरुवार को गुजरात उच्च न्यायालय ने परियोजनाओं का क्रियान्यवन करने वाली एजेंसी से धनराशि वसूली को लेकर ब्यौरा तलब किया है। स्मृति ईरानी की निधि से कामों में गड़बड़ी सामने आने के बाद कार्यदायी संस्था से वसूली के आदेश पहले से जारी हो चुके हैं। विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने स्मृति ईरानी पर अपनी सांसद निधि से बिना टेंडर के ही एक एनजीओ को 5.93 करोड रुपये का ठेका देने का आरोप लगाया है।

कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला और शक्ति सिंह गोहिल ने सांसद निधि के दुरूपयोग करने की बात कही है। कैग की रिपोर्ट मीडिया को जारी करते हुए गोहिल ने कहा कि, कैग ने भी जांच में इस बात की तस्दीक की है कि काम पूरा होने का फर्जी सर्टिफिकेट देकर एनजीओ ने पैसे हासिल कर लिए। गोहिल और सुरजेवाला दोनों ने कहा कि भ्रष्टाचार निरोधी कानून के तहत केंद्रीय मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच की जानी चाहिए। और कहा अगर इस मामले में केंद्रीय कपड़ा मंत्री के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं होती है तो, कांग्रेस पार्टी के पास अदालत जाने का भी विकल्प खुला है।


गोहिल ने बताया केंद्रीय म्नत्री ने एक गांव को गोद लिया था, इसके बाद गांव को मिलने वाले पैसे को खुद की जेब डाल लिया। इस बात की पुष्टि गुजरात में आनंद जिले के कलेक्टर की रिपोर्ट में की गई है। कलेक्टर ने मामले की जांच के बाद सांसद निधि जारी करने वाले विभाग के उपसचिव को इस बारे में चिठ्ठी लिखी। जिसमें पाया गया कि टेंडर की बजाय सीधे मंत्री के यहां फोन करकर एक एनजीओ को काम का ठेका देने का आदेश दिया जाता था।

गोहिंल ने कहा की नरेंद्र मोदी के कारण केंद्रीय मंत्री इसका फायदा उठा रही हैं। इसीलिए बिना टेंडर के ही उन्होंने इतनी बड़ी राशि सांसद निधि से एक एनजीओ को सौप दी। जबकि नियम के अनुसार एक सांसद अपने पूरे कार्यकाल में किसी एनजीओ को केवल 50 लाख रुपये तक ही दे सकता है। इसके साथ उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पीएम मोदी ने कहा था कि मैं न खाता हूं और न खाने देता हूं, लेकिन सच्चाई है कि पीएम और उनके करीबी करोड़ों से कम खाते नहीं, सच बोलने वाले को चैन की रोटी खाने नहीं देते हैं।

कांग्रेस नेता ने कहा इस शिकायत की जांच कराने वाले कलेक्टर का तबादला कर उसे परेशान किया गया। मगर इससे पहले कलेक्टर ने जांच कराई थी जिसमें पाया गया कि काम के कई दावे तो बिल्कुल फर्जी हैं। इसी जांच में कलेक्टर ने 4 करोड 8 लाख 43 हजार रुपये को रिकवर किये जाने की रिपोर्ट दी।

कांग्रेस नेता ने इस मामले में जाँच कर रहे कलेक्टर को बीजेपी द्वारा परेशान करने की भी बात कही है। वैसे हमे ये तो पता ही है की बीजेपी अपनी सत्ता का इस्तेमाल अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए करती है। और अगर कोई उनकी गलतियों का पर्दाफाश करने की कोशिश करता है तो पार्टी उसपर कार्रवाई करने से भी पीछे नहीं हटती है।

प्रधामंत्री मोदी को उनके भाषणों में भ्रस्टाचार मुक्त भारत की बात करते हुए अक्सर ही सुना जाता है। और साथ में सरकार भ्रस्टाचार करने वालो के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी बात करती हैं। लेकिन जब उनके ही पार्टी के सांसद पर कोई इसको लेकर सवाल जवाब करता है तो, सरकार उसे परेशान करना शुरू कर देती है। और इसके साथ उस व्यक्ति को ऐसा न करने का दबाव भी बनाती है। मौजदा सरकार के इस प्रकार के रवैये से भ्रस्टाचार के खिलाफ उनके दोहरे चरित्र का पता चलता है।

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