fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

आखिर क्यों योगी ने सच्चे IPS अधिकारी को किया निलंबित, जानिए पूरा सच 

Why-the-Yogi-suspended-the-true-IPS-officer,-know-the-whole-truth
(Image Credits: The Logical Indian)
आखिर क्यों उत्तर प्रदेश के IPS अधिकारी जसवीर सिंह को उत्तर प्रदेश सरकार ने निलंबित कर दिया।  क्या ऐसी वजह रही होगी जिसकी वजह से IPS जसवीर सिंह के डिपार्टमेंट ही उन्हें दरकिनार करती रही। आखिर क्या ऐसी वजह थी जिससे उत्तर प्रदेश सरकार को यह बड़ा कदम उठाना पड़ा।
दरअसल यह मामला तब शुरू हुआ जब IPS जसवीर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को साल 2002 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी रासुका के तहत गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के कारण अधिकारी जसवीर सिंह सुर्खयों में बने रहे। परन्तु इतने समय के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है। अधिकारी ने कुछ दिन पहले एक अंग्रेजी वेबसाइट को इंटरव्यू में बताया था कि योगी आदित्यनाथ को गिरफ्तार करने के कारण किस तरह उन्हें दरकिनार किया जा रहा है।
द हिंदू की ख़बर के मुताबिक उत्तर प्रदेश पुलिस प्रवक्ता आरके गौतम ने इस बात को साफ़ कर दिया है की 1992 कैडर के आईपीएस अधिकारी जसवीर सिंह को निलंबित कर दिया गया है। हालांकि गौतम ने ये नहीं बताया कि सिंह के खिलाफ किस आधार पर ये कार्यवाई की गई है।
उत्तर प्रदेश पुलिस की वेबसाइट के मुताबिक जसवीर सिंह अपर पुलिस महानिदेशक यानी रूल्स एंड मैनुअल  पद पर तैनात थे। उन्हें 14 फरवरी को निलंबित किया गया। प्रमुख सचिव गृह अरविंद कुमार का कहना है कि इंटरव्यू में विवादित तरीके से बयान देने और 4 फरवरी से ड्यूटी से अनाधिकृत रूप से उपस्थित न रहने के चलते यह कार्रवाई की गई। यह बात एडीजी ने 30 जनवरी को इंटरव्यू में कहा था।
महराजगंज का एसपी रहते जसवीर सिंह ने अभी के मुख्यमंत्री एवं गोरखपुर के तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ रासुका के तहत गिरफ्तार किया था।
आखिर ऐसी क्या वजह रही जिससे यह कदम उठाना पड़ा। इसकी वजह साफ नहीं हुई।  क्या योगी की सरकार में कानून का पालन करने वाले लोगो के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है ?
माना जा रहा है उन पर केस वापस लेने के लिए कई बड़े लोगो का दबाव था। 30 जनवरी को हफिंगटन पोस्ट में छपे एक रिपोर्ट में सिंह के हवाले से कहा गया है कि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राजनेताओं के दबाव के बावजूद तत्कालीन सांसद के खिलाफ निरोधात्मक नजरबंदी का मामला वापस लेने से इनकार कर दिया था।
उस समय भाजपा केंद्र सत्ता में थी और बहुजन समाज पार्टी उत्तर प्रदेश में सत्ता में थी। दो दिन बाद, उन्हें यूपी पुलिस के खाद्य प्रकोष्ठ यानी फ़ूड सेल में तैनात कर दिया गया था।
पिछले कुछ सालो में अपने कामो का खुलासा करते हुए सिंह ने हफिंगटन पोस्ट को बताया कि 2017 में सत्ता में आई योगी आदित्यनाथ सरकार के बाद वे आईपीएस में पराए की तरह हो गए हैं। उनको सबने नजरअंदाज करना शुरू कर दिया था। शायद इसलिए क्यूंकि यही एक वजह हो सकती है की 2002 में गिरफ्तार हो चुके योगी की सरकार का उन पर दबाव हो या उन्हें तवज्जो नहीं दी जा रही हो।
हफिंगटन पोस्ट के अनुसार सिंह ने कहा कि नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई करने के कारण उन्हें यह मूल्य चुकाना पड़ रहा है। आईपीएस अधिकारी ने योगी सरकार द्वारा मुठभेड़ हत्याओं पर भी सवाल उठाया था।
सिंह ने न्यूज़ वेबसाइट से कहा, ‘वे राजनीतिक व्यक्तियों के प्रति वफादारी चाहते हैं। यह पूरी तरह असंवैधानिक है। यदि हम विरोध नहीं करते हैं, तो चीजें बदल नहीं सकती हैं। विरोध करना सबसे अधिक पुरस्कृत करने वाली बात है.’
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अपनी सेवा के 26 वर्षों में, सिंह केवल छह वर्षों तक ही वास्तविक पुलिस कार्य संभाल पाए। रिपोर्ट के मुताबिक, ‘यह एक भयावह स्थिति है कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल और कानून विहीन राज्य में नेताओं के खिलाफ कार्रवाई करने वाले आईपीएस अधिकारियों को कोई काम नहीं दिया जाता।
यह कैसी सरकार है यह कैसा क़ानून जहाँ अपने काम को पुरे दिलो जान से करने वाले कानून को मानने वाले लोगो के साथ इस प्रकार से सुलूक किया जाता है। योगी सरकार में इस प्रकार से कई घटनाएं होती रही है जिसकी लिस्ट काफी बड़ी है और जिनका खुलासा भी नहीं हो सका। सालो पहले अरेस्ट होने का शायद एक बदला हो सकता है जो योगी ने लिया।

Advertisement
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved