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क्या बीजेपी राज में चुनाव महज एक रस्म बन कर रह जायेगा ? जानिए आखिर क्यों

(image credits: Moneycontrol)

भारत में यह ट्रेंड बन गया है कि कोई मजबूत नेता अपनी सत्ता नहीं छोड़ता, लेकिन कोई भी बिना सत्ता का मोह छोड़े विचारधारा की लड़ाई में अपने प्रतिद्वंद्वी को नहीं हरा सकता। हमारे देश के संस्थागत ढांचे पर कब्जे का राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि आरएसएस का घोषित लक्ष्य पूरा हो चुका है। हमारा लोकतंत्र बुनियादी तौर पर कमजोर हो गया है। अब इसका वास्तविक खतरा है कि आगे चुनाव महज रस्म अदायगी भर रह जाएं। जहाँ सिर्फ रस्म पूरी करने  चुनाव लडे जायेंगे परन्तु नेता वही होगा जो पहले था।

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राहुल गाँधी ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पिछले दिनों ट्विटर पर सार्वजनिक की गई अपनी चिट्ठी में राहुल गांधी ने ये पंक्तियां लिखीं तो उन्हें शायद ही इल्म रहा हो कि उनका यह कथन जल्दी ही, थोड़े बदले हुए रूप में ही सही, उनकी पार्टी व जनता दल गठबंधन द्वारा शासित कर्नाटक में सही सिद्ध होने लगेगा। 

दूसरी और लगता है की राहुल गाँधी के इस्तीफे के बाद बीजेपी और भी ज्यादा अपने आप को मजबूत मानने लगी है। वह पूरी ताकत से आने वाले चुनाव की तैयारी में है। वहां जनादेश की मनमानी व्याख्याओं के बीच इन दोनों पार्टियों के असंतुष्ट विधायक लोभ-लालच की राजनीति की पुरानी कथाओं में जिस तरह नई कड़ियां जोड़ रहे हैं, उसके कारण जिस लड़ाई को राहुल विचारधारा की लड़ाई बताया करते हैं, वह इतनी बेकार हो चली है कि अपनी इज्जत तक नहीं बचा पा रही। 

भाजपा हमेशा से यह दावा करती रही है की भाजपा के साथ राज्य की सरकार का हिस्सा बन जाने के बाद वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों का तेजी से विकास कर सकेंगे।  इससे पैदा हालात ने कई बड़े और पेचीदा सवालों को जन्म दिया है। ऐसे झूठे वादों के चलते सरकार ने कई वोट हासिल किये है। 

दूसरी और कांग्रेस विधायकों की खरीद फरोख्त के चलते बीजेपी सवालों के घेरे में है। अपनी पार्टी को मजबूत बनाने और आगे तक सत्ता पर काबिज रहने के लिए बीजेपी कुछ भी कर सकती है और यह बात किसी से छिपी नहीं है।


बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपने कामो में ज्यादा खरे नहीं उतरे परन्तु इस बार बीजेपी ने सिर्फ अपने वादों के चलते ही लोग के दिलो में एक अँधा विश्वाश पैदा कर दिया जिसके चलते बीजेपी को एक बार फिर सत्ता में आने का मौका मिला है। ऐसे में सबसे ज्यादा भगवान् को मानने वाले लोग और श्रद्धा रखने वाले लोग बीजेपी सरकार के पक्ष में है। 

बीजेपी सरकार ने भी इसका बड़े सस्तर पर फायदा उठाया है। देखना यह है की क्या भविष्य में भी भक्तो का फायदा मिलेगा या फिर और भी बीजेपी कोई रास्ता निकलेगी। हाल के दिनों में जहाँ मोदी देश की व्यवस्था में सुधार की बात करते है तो दूसरे आंकड़े उनके उलट ही जाते है। चुनावी माहौल में अक्सर बीजेपी ने किसानो और मजदूरों का बड़ा मुद्दा उठाया हैं। इसमें वह कामयाब भी रही है। 

बीजेपी समय के साथ मजबूत होती जा रही है। यह बात भी सच हो सकती है की चुनाव महज एक रिवाज ही बन कर रह जाएगी।

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