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विमर्श

मंडल दिवस पर अखिलेश यादव के नाम खुला पत्र

आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी,

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सादर जय भीम! जय मण्डल!!

परमादरणीय श्री अखिलेश यादव जी! आरक्षण पर लम्बी प्रतीक्षा के बाद आपके इस बयान को पढ़कर कि “आबादी के आधार पर सभी जातियों को मिले आरक्षण”,खुशी हुई कि चलो देर से ही सही समाजवादी पार्टी ने आरक्षण पर मुंह तो खोला।हमारे पुरखो ने आरक्षण के बाबत यही नारा लगाया है कि “जिसकी जितनी संख्या भारी,उसकी उतनी हिस्सेदारी” , जिसे आपने बोलकर अभिनन्दनीय कार्य किया है।

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मेरे जैसे असंख्य समाजवादियों को तब बड़ी निराशा हुई थी जब आपके नेतृत्व में गठित पिछ्डों की सरकार ने त्रिस्तरीय आरक्षण वापस लिया था,पदोन्नति में आरक्षण का डंके की चोट पर विरोध किया था,ठेको में दलितों के आरक्षण को खत्म किया था तथा मण्डल कमीशन को तिलांजलि दे आरक्षण विरोध की तरफ कदम बढ़ा दिया था।मुझे तब और भी घनघोर निराशा हुई थी जब आपने 2017 विधानसभा का चुनाव घोषणा पत्र जारी किया था।इस घोषणा पत्र में बहुसंख्य जन कल्याणकारी बातें लिखी थी पर आरक्षण एवं पिछड़ा वर्ग नदारद था।चुनाव का समय होने के कारण मैंने कलम तोड़कर सोशल मीडिया से लेकर सोशलिस्ट फैक्टर सहित अनेक पत्र-पत्रिकाओं में आपके पक्ष में लिखा था क्योकि कुल के बावजूद उम्मीद भी आप या आप की तरह की जमातों से ही है इसलिए लाख कमियों के बावजूद उम्मीद की किरण जहाँ दिखती है,व्यक्ति वहीं रहता है।हमने भी तमाम विसंगतियों के बावजूद आपकी तरफ सदैव आशा भरी उम्मीद रखी है कि कभी तो आप अपने असली लाइन-लेंथ पर बालिंग/बैटिंग करेंगे?


अखिलेश जी!भारतीय राजनीति के संदर्भ में जाति और धर्म शाश्वत सत्य हैं।यह अमेरिका या ब्रिटेन नही है कि विकास,काम,योग्यता,अच्छाई, नेकी और सहृदयता पर वोट मिल जाएगा।यहां लोग डिबेट सुनकर वोट वोट नही करते।यह भारत है जहां अच्छाई और काम का कोई मतलब नही,यहां जाति और धर्म की राजनीति प्रभावशाली है।हम जिस वेद,पुराण,महाभारत,रामायण,गीता,मनुस्मृति आदि को आदर्श मानते हैं वहां जाति, धर्म,लिंग आदि के आधार पर जबर्दश्त भेदभाव हुवा है और उसी के मुताविक इंतजाम का आदेश/निर्देश है।पुरातन काल मे यही शास्त्र राजनीति को दिशा निर्देश देते थे।हमारे धर्मशास्त्र नीति की जो बात करते हैं वहां क्या है,यदि हम तार्किक दृष्टि से विवेचना करेंगे तो पाएंगे कि इन नीति निर्देशो में केवल और केवल अनीति ही भरी पड़ी है जिसके द्वारा सत्ता हाँकी गयी है।राजसत्ता के लिए कैसे-कैसे पाप नही किये गए हैं?छल से एकलब्य का अंगूठा काटना,निर्दोष शम्बूक का वध करना, सत्यवादी युधिष्टिर से “नरो वा कुंजरो” कहलवाक़े मरने को विवश करना,सूर्य को ढककर शाम का मंजर बनाके जयद्रथ को मरवाना,शिखंडी का प्रयोग करके भीष्म को साधना,गर्भवती सीता को जंगल छोड़ना,अकेली और निर्दोष सूर्पनखा का नाक-कान काटना आदि अन्यान्य दृष्टांत केवल और केवल यही दर्शाते हैं कि जाति, लिंग,वर्ण आदि के आधार पर अन्याय करके ही यहां राजसत्ता पर काबिज हुवा जाता रहा है।अखिलेश जी! जहां राजसत्ता लेने या चलाने का आधार अन्याय आ अनीति रही हो वहां आप नीति,काम,शुचिता की बात करेंगे तो वह बेमानी होगा।

अखिलेश यादव जी!भारतीय सन्दर्भ में आप आस्ट्रेलिया,जर्मनी,अमेरिका या जहां आप अक्सर जन्मदिन मनाने जाते हैं ब्रिटेन का मापदंड अपनाएंगे तो सफलता क्या असफलता के आखिरी पायदान पर रहना पड़ेगा।बहुत सोच-समझ के समाजवादी पुरखो ने जो सभी के सभी बड़ी जातियों के थे मसलन लोहिया, जयप्रकाश, नरेन्द्रदेव, एस एम जोशी, मधु लिमये, मधु दण्डवते, राजनारायण, अच्युत पटवर्धन आदि ने “सोशलिस्टों ने बांधी गांठ,पिछड़े पावें सौ में साठ” का नारा लगाया था।वे सभी के सभी बड़ी जाति के समाजवादी लोग यूं ही नही यह नारा दिए थे,इस नारे को देने के पीछे बहुत बड़ा सामाजिक,राजनैतिक कारण था।वे जानते थे कि नेहरू को गांधी का वरदान प्राप्त है ऐसे में इस देश के वंचितों की बात करके ही हम खड़े हो सकते हैं तो समाजवाद का यही तकाजा भी है कि उस विपुल आबादी को सामाजिक आजादी मिले जिसे हजार वर्ष से सामाजिक,राजनैतिक,सांस्कृतिक एवं आर्थिक रूप से जाति और धर्म के आवरण में बांध करके दास या गुलाम बना के रखा गया है।

अखिलेश जी! इन सवर्ण समाजवादी पुरखों के पिछड़ा परस्ती के पीछे दो बातें थीं,पहला इन वंचित तबकों को हजारो वर्ष बाद न्याय मिले तो दूसरा इन सत्ता से वंचित समाजवादियों को मजबूत आधार।भारतीय राजनीति में पिछड़ा वर्ग और समाजवादी पार्टी एक दूसरे के पूरक बने और लम्बे समय से समाजवादी धारा और पिछड़ा वर्ग साथ-साथ रहे जिसकी परिणति 7 अगस्त 1990 को मण्डल कमीशन की घोषणा के रूप में सामने है।

अखिलेश जी! मुलायम सिंह यादव जी,शरद यादव जी,चन्द्रजीत यादव जी,लालू प्रसाद यादव जी,रामविलास पासवान जी आदि नेताओ को जब पत्र लिखा जाता रहा है तो वे लोग उसे पढ़ते और फिर जबाब देते रहे हैं पर मैंने तमाम अवसरों पर बिन मांगे आपको राय देने की हिमाकत करते हुए फोकट का रायदाता बनने का कार्य किया है लेकिन मुझे लगता है कि आपने मेरे पत्रों या सुझावों को इस लायक नही समझा कि उसे फॉलो किया जाय या उनका क्रियान्वयन किया जाय।आप शायद उन्हें पढ़ने की जहमत ही नही उठाये होंगे वरना निश्चय ही वे क्रियान्वित हुए होते तथा जबाब आया होता।खैर मेरे जैसे लोग विचारधारा के स्तर पर थेथर कहे जाएंगे क्योकि इतने के बावजूद हम फिर लिख रहे हैं परंतु तरीका बदल गया है।इस बार हम सोशल मीडिया पर आपके नाम खुला पत्र डाल रहे है क्योकि हमे उम्मीद है कि सोशल मीडिया पर लिखे गए मेरे खुले पत्र पर और भी कुछ नए विचार या संशोधन आ पाएंगे जो समाजवादी या पिछड़ा वादी राजनीति के लिए मील का पत्थर साबित होगे।

अखिलेश जी!मुझे इस बात का इल्म है कि आप ऑस्ट्रेलिया में पढ़े,डिम्पल जी से जातितोड़ शादी किये,मुख्यमंत्री श्री मुलायम सिंह यादव जी के बेटे के रूप में सामाजिक मान्यता पाए तथा होश संभालते ही जय-जयकार के नारों के साथ मुख्यमंत्री बन गए इसलिए जाति और धर्म के जमीनी हकीकत से रूबरू नही हुए अस्तु आपको अपने काम पर वोट मांगने में विश्वास रहा।मैं आपको बहुत दोष नही दूंगा कि आपने जाति,धर्म,बाहुबल आदि का प्रयोग क्यो नही किया?आप तिकड़म,इन विविध किस्म के जाल-बट्टों से इतर स्वच्छ और पारदर्शी राजनीति करने के हिमायती बनकर यूपी में पांव जमाना चाहते थे लेकिन यह जो हजार वर्ष की सामाजिक विद्रूप राजनीति है वह आपके मंसूबो को धराशायी कर दी,जिसे शायद अब आप महसूस कर रहे हैं।

अखिलेश जी! देखिये न आप कह रहे हैं कि “जिसके हर जाति में दो-चार मित्र नही वह समाजवादी नही”,आप कह रहे हैं कि “काशी नही बना क्योटो,बुलेट ट्रेन का पता नही” और अमित शाह जी कह रहे हैं कि “यादव-जाटव जोड़ो।”अमित शाह यह समझ गए हैं कि जातियों की राजनीति किये बगैर भारत मे सत्ता हासिल नही की जा सकती है इसी नाते भाजपा ने पहले गैर यादव पिछडो औऱ गैर जाटव दलितों को साधा जबकि अब वे पिछडो की बिपुल आबादी यादव एवं दलितों की बिपुल आबादी जाटव को साधने की फिराक में हैं।दलित मतों को साधने हेतु भाजपा रामदास अठावले,उदित राज एवं रामविलास पासवान आदि को पहले ही अपने खेमे ले ले चुकी है जबकि अब वह जाटव को अपनाने की युगत में है इसी तरह उसका पाशा यादव पर फेंका जाने वाला है जिसके तहत सोनू यादव के घर सहभोज किया जा चुका है।

अखिलेश जी!जाति की ताकत देखिये कि देश के प्रधानमंत्री मोदी जी गुजरात का मुख्यमंत्री रहते हुए “घांची” जाति जो मारवाड़ी की उप जाति थी,को पिछड़ी जाति में अध्यादेश ला शामिल कर खुद की कलम से खुद ही पिछड़ी जाति में शामिल हो गए।प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनने के बाद खुद को नीच जाति बता करके वे वंचितों की विपुल आबादी में यह संदेश दे बैठे कि मोदी इस देश का एक नीच पिछड़ा है जो प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठकर इन छोटी जातियों का स्वाभिमान बढ़ाएगा जबकि उस वक्त आप और आपके पिताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी सवर्ण परस्त बनने के लिए सन्सद में पदोन्नति आरक्षण बिल फाड़ रहे थे तो सभाओं में इसके बिरुद्ध ललकार रहे थे।अखिलेश जी!सोचिए कि आपका पाशा कैसे उल्टा पड़ा कि सवर्ण आपके पाले में आया नही और पिछड़े को आपका नारा व कार्य भाया नही जबकि दलित को आपका आचरण सुहाया नही और आप लोकसभा में 5 तो विधानसभा में 47 पर अटक गए जबकि मोदी पिछड़े की बात कर आपको गटक गए।

अखिलेश जी! मैंने जय भीम कहा है वह इस नाते कि आप मुख्यमंत्री बने,नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी व मायावती जी मुख्यमंत्री बनी या इस देश मे वंचित समाज का कोई व्यक्ति कुछ भी बना तो उसमें भीम राव अम्बेडकर जी का बहुत बड़ा योगदान है।सोचिए कि अम्बेडकर साहब ने कितने तिरस्कार के बाद हम सबको सत्ता,सम्पत्ति,सम्मान,शिक्षा,आरक्षण आदि का अधिकार भारतीय संविधान में दिलवाया है।अम्बेडकर साहब द्वारा संविधान के अनुच्छेद 340,341,342,16(4),15(4) आदि में हमे जो संवैधानिक अधिकार दिए गए हैं उन्ही की बदौलत मनु का आचार-व्यवहार सुसुप्त हुवा है और हम सम्मान की जिंदगी जी पा रहे हैं।

अखिलेश जी!हमने जय मण्डल भी कहा है जो पिछडो के लिए आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण है।दूसरे पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष श्री विंदेश्वरी प्रसाद मण्डल जी ने 1 जनवरी 1979 को मण्डल आयोग गठित होने के बाद दो वर्ष अनवरत कार्य करने के उपरांत 31 दिसम्बर 1980 को अपनी रिपोर्ट प्रेषित करने के बाद सिफारिश किया कि पिछडो को 27 प्रतिशत सरकारी नौकरियों में आरक्षण दिया जाय, पदोन्नति में आरक्षण को ग्राह्य बनाया जाय,न भरे गए पदों को 3 वर्ष तक आरक्षित रखा जाय,sc/st वर्ग की तरह पिछडो को आयु सीमा में छूट दी जाय,पदों के प्रत्येक वर्ग के लिए sc/st की तरह रोस्टर प्रणाली अपनायी जाय,राष्ट्रीयकृत बैंकों, केंद्र व राज्य सरकार के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमो में आरक्षण दिया जाय,वित्तीय सहायता प्राप्त निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों में आरक्षण लागू किया जाय,सभी कॉलेजों/विश्वविद्यालयो में आरक्षण प्रभावी बनाया जाय,पिछड़े वर्ग के छात्रों को ट्यूशन फ़ी फ्री किया जाय, किताब, वस्त्र, दोपहर का भोजन, छात्रावास, वजीफा एवं अन्य शैक्षणिक रियायते दी जाय, सभी वैज्ञानिक,तकनीकी एवं व्यवसायिक संस्थानों में पिछडो को आरक्षण दिया जाय,तकनीकी व व्यवसायिक संस्थानों में विशेष कोचिंग का इंतजाम किया जाय, लघु उद्योग लगाने हेतु पिछडो को समुचित वित्तीय व तकनीकी सहायता दी जाय, बंजर/ऊसर/बेकार भूमि का एक हिस्सा पिछडो को दिया जाय,पिछड़ा वर्ग विकास निगम बनाया जाय, राज्य व केंद्र स्तर पर पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्रालय गठित किया जाय एवं केंद्र सरकार द्वारा पिछडो को समुचित धन देकर मदद किया जाय।

अखिलेश जी! अम्बेडकर साहब द्वारा रचित संविधान में अनुच्छेद 340,341,342,15(4),16(4) आदि की बदौलत sc/st/obc आज आरक्षण पाकर उन्नति की सीढ़ियां चढ़ रहा है तो मण्डल साहब की सिफारिशों की बदौलत पिछड़ा देर से ही सही चपरासी से लेकर कलक्टर तक बन रहा है,ऐसे में ये हमारे समाज और हमारी पार्टियों के लिए आदर्श हैं।अखिलेश जी!देश का सँविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ लेकिन पिछडो को उनका संवैधानिक अधिकार मण्डल कमीशन 7 अगस्त 1990 को घोषित हुवा,13 अगस्त 1990 को अधिसूचित हुवा तो कोर्ट द्वारा क्रीमी लेयर के साथ 16 नवम्बर 1992 को लागू हुआ।अखिलेश जी! देश की 52 प्रतिशत आबादी जो पिछड़ा वर्ग मानी गयी है उसमें 43 प्रतिशत हिन्दू आबादी तो 9 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है। हिंदुओ में ब्राह्मण,क्षत्रिय,मारवाड़ी,कायस्थ,भूमिहार व sc/st को छोड़कर सभी पिछड़े कहे गए तो मुस्लिम में शेख, सैयद, पठान को छोड़कर सभी पिछड़े माने गए हैं। इन पिछड़े हिन्दू व मुसलमानों को जिनकी आबादी मण्डल साहब ने 52 प्रतिशत मानी 27 प्रतिशत आरक्षण की सिफारिश किया।

अखिलेश जी! देश के संविधान के अनुसार प्राप्त अधिकार के तहत पिछडो को आरक्षण के लिए बहुत पापड़ बेलने पड़े हैं। सवर्ण लोगो ने देश के रेल, बस को फूंक कर इस सांवैधानिक प्राविधान को रोकने का भरपूर प्रयास किया है जिसमे जाने-अनजाने आप भी 2012 से 2017 के अपने सरकार में रहते हुए शामिल रहे हैं। मायावती जी ने भी पिछडो के त्रिस्तरीय आरक्षण का विरोध कर अपने सर्वजनवादी मुखौटे को सामने लाकर आरक्षण की अवधारणा को धूल धूसरित किया है। अखिलेश जी! आपने पदोन्नति में आरक्षण का प्रत्यक्ष विरोध करके जहाँ आरक्षण को कमजोर बनाया है और खुद भी कमजोर हुए हैं तो वहीं मायावती जी ने सत्ता में रहते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार वंचित तबकों के समुचित भागीदारी की गणना कराने की बजाय सतीश चंद्र मिश्र जी को खुश करने व अपने सर्वजनवादी स्वभाव को एक्सपोज करने के लिए पुनः सुप्रीम कोर्ट में अपील दाखिल कर पदोन्नति में आरक्षण की व्यवस्था को निष्प्रभावी बनाने का अपराध किया है।

अखिलेश जी! आप और मायावती जी सवर्ण तुष्टिकरण में इतने तल्लीन हो गए कि आपलोगो का मूल आधार ही खिसक गया। जिस आधार को बनाने में लोहिया से लेकर रामसेवक यादव, कर्पूरी ठाकुर, रामनरेश यादव, वीपी सिंह ने अनगिनत गालियां सुनी,कांशीराम साहब ने फजीहत झेली और आप को एवं मायावती जी को एक ठोस आधार दिया उसे आप दोनों लोगों ने सर्वजनवादी नीति अपनाके खुद ही दरका डाला है। अब आप लोगो को खुद की नीति में सुधार व प्रायश्चित करना है वरना न आप लोगो का अस्तित्व बचेगा और न बहुजन वाद/समाजवाद जीवित रह पाएगा।

अखिलेश जी! आपने यूपी के मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी का बयान जरूर पढा होगा जिसमें उन्होंने कहा है कि “अब समाजवाद नही,राष्ट्रवाद की जरूरत है।”भाजपा का मनुवादी स्वरूप अब धीरे-धीरे सामने आता जा रहा है। वे अब राष्ट्रवाद मतलब मनुवाद पर खुलकर बोलने लगे हैं। स्पष्ट है कि वे बोलें भी क्यों नही,क्योकि अब उनका प्रधानमंत्री,राष्ट्रपति,उपराष्ट्रपति,राज्यसभा,लोकसभा,देश की सूबाई सरकारों में बहुमत जो हो गया है।अब तो उन्हें अपने एजेंडे को लागू करने में कोई कठिनाई नही दिख रही है क्योंकि विपक्ष अत्यंत कमजोर व दिशाहीन स्थिति में लकवा ग्रस्त खड़ा है।

अखिलेश जी! आपने भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी जी का भी बयान पढ़ लिया होगा जिसमे उन्होंने कहा है कि “भाजपा आरक्षण को वहां पंहुचा देगी जहां आरक्षण का होना और न होना बराबर होगा।”अखिलेश जी!यह वक्त अत्यंत सोचनीय है। देश अजीब तरह की खाई में जा रहा है जिसे हमलोग खुद खोदे हुए हैं।इस स्थिति से देश व वंचित समाज को बचाना होगा जिसके लिए आपको अब खुलकर सामने आना होगा।

अखिलेश जी! आपका आबादी के अनुपात में आरक्षण देने की मांग वाला यह बयान बुझ रहे सामाजिक न्याय के दीपक में तेल डालकर जलाने के प्रयास वाला बयान है जिसे सुनकर हमारे जैसे तमाम लोगों को खुशी हुई है लेकिन इसे मैं नाकाफी मानता हूं।

अखिलेश जी!आरक्षण पर अब आरपार के जंग की जरूरत है। यदि आप चूक गए तो दुनिया की कोई ताकत नही है जो यूपी के यादवो को भाजपाई होने से रोक दे क्योकि आप देख ही रहे हैं कि कितने बड़े-बड़े सेक्युलर लोग और यादव भाजपा के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार को वोट कर गए है? कैसे भाजपा सरकार की यादव नेतृत्व द्वारा आपको नीचा दिखाने के लिए तारीफ की जा रही है? भाजपा कैसे यादवो को जोड़ने की कवायद शुरू कर दी है।बिहार में लालू जी और युवा तेजश्वी यादव जी के कारण यादवो का भाजपाईकरण नही हो पा रहा है लेकिन यूपी उनके टारगेट पर है क्योकि यहां अब तक उन्हें सामाजिक न्याय का एजेंडा सपा-बसपा द्वारा अपनाया जाता हुवा दिख नही रहा है।

अखिलेश जी! मुझे अंदेशा है कि भाजपा यूपी के यादवो को साधने के लिए श्री भूपेंद्र यादव जी को राष्ट्रीय अध्यक्ष बना सकती है तो संविधान संशोधन कर अहीर रेजिमेंट का निर्माण भी कर सकती है। भाजपा ऐसा कर एक तीर से दो निशाने कर डालेगी।एक यूपी के यादव नेतृत्व को हड़प लेगी तो दूसरे अहीर रेजिमेंट बना मण्डल को निगल जाएगी।अखिलेश यादव जी! सतर्कता जरूरी है।आप मण्डल कमीशन पूर्ण रूप से लागू करने की मुहिम शुरू करें। आपने आबादी के अनुपात में आरक्षण की जो बात की है उसके लिए जातिवार जनगड़ना की जरूरत पड़ेगी इसलिए समाजवादी पार्टी को दूसरे सारे एजेंडों को छोड़ करके सीधे-सीधे सामाजिक न्याय के एजेंडे को अख्तियार करना चाहिए। समाजवादी पार्टी को जातिवार जन गड़ना कराने, आबादी के अनुपात में आरक्षण देने, प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण को प्रभावी बनाने, न्यायपालिका में आरक्षण को लागू करने,मण्डल कमीशन की समस्त संस्तुतियों को लागू करने का अभियान छेड़ना चाहिए।

अखिलेश जी!वक्त बहुत नाजुक दौर से गुजर रहा है।फासिस्ट ताकतें फन फैलाने लगी हैं,फैलाएं भी क्यो नही,उनकी एक छत्र सत्ता जो कायम हो गयी है। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, देश के बहुसंख्य राज्यो में सरकारे भाजपा की हो चली हैं। अब वक्त भाजपा के पाले में है। वे संविधान बदलें, आरक्षण खत्म करें, मनु विधान लागूं करें, उनकी मर्जी क्योकि विपक्ष सुस्त और दिशाहीन हो चुका है। अखिलेश जी! भाजपा और उसके हिंदुत्व का एक मात्र काट मण्डल,आरक्षण,भागीदारी है।
अखिलेश यादव जी!हो सकता है कि आपको मेरी बात बुरी लगे लेकिन मैं आपका शुभेच्छु हूँ। कुछ लोग हैं जो आपके चेहरे पर लगे दाग को यह कहकर सराह सकते हैं कि “दाग है तो क्या अच्छा है” लेकिन मैं आपके समक्ष पूर्व में भी आईना रखता रहा हूँ और अब भी रखूंगा क्योकि मुझे आपसे और अपने वर्गीय हित से स्नेह और लगाव है।

अखिलेश जी! मैं आपका कोई प्रतिद्वंदी नही हूँ, मैं आपका एक छोटा सा कार्यकर्ता हूँ लेकिन मुझे अपने समाज और वंचित तबके की फिक्र है,समाजवादी पुरखो की ललकार का इल्म है और मुद्दों का ज्ञान है इसलिए मैं आपको आगाह करूँगा क्योकि यह समय बहुत नाजुक है,चूक गए तो खत्म होने की शुरुवात हो जाएगी।
अखिलेश जी! पुल, सड़क,मेट्रो,रिवर फ्रंट,एक्सप्रेस वे जरूरी हैं लेकिन इनसे जरूरी वंचित तबकों की तरक्की है।इस देश के पिछ्डों,अल्पसंख्यको व दलितों के शिक्षा,सम्मान,सुरक्षा,रोजगार की आवश्यकता सबसे महत्वपूर्ण है।इन सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से वंचित तबकों की कीमत पर मेट्रो, रिवर फ्रंट, एक्सप्रेस वे का कोई मोल नही है।यदि ये तरक्की किये तो आप, आपकी पार्टी, प्रदेश एवं देश तरक्की करेगा इसलिए अखिलेश जी! आरक्षण, संविधान, भागीदारी, पिछड़ापरस्ती, दलित हित, अल्पसंख्यक सुरक्षा समाजवादियों का एजेंडा था और रहना चाहिए, यदि आप इससे विरत हुए तो भाजपा का हिंदुत्व,छद्म राष्ट्रवाद और मनुवाद मजबूत हो जाएगा।

अखिलेश जी! मैं इस उम्मीद के साथ 7 अगस्त की क्रांतिकारी बेला में आपसे अनुरोध करता हूँ कि मण्डल कमीशन पूर्णतः लागू करने का अभियान शुरू करना चाहिए।वीपी मण्डल की जयंती,पुण्य तिथि मनायी जानी चाहिए,समस्त पिछड़े /दलित महापुरुषों के चिंतन को आत्मसात करना चाहिए, निर्भय होकर पिछडो की बात उठानी चाहिये क्योकि यही आपकी मूल पूंजी हैं, जब आपकी मूल पूंजी मजबूत रहेगी तो ब्याज तो वैसे ही मिलता रहेगा इसलिए ब्याज के चक्कर मे अपनी मूल पूंजी गंवाने की गलती दुहराने की बजाय आप मजबूती से सामाजिक न्याय की अवधारणा को बलवती बनाएंगे यही उम्मीद है। क्रांतिकारी अभिवादन के साथ।
सादर।

भवदीय-
चन्द्रभूषण सिंह यादव

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव ‘यादव शक्ति’ त्रैमासिक पत्रिका के प्रधान संपादक हैं।)

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