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संघियों को मुसलमानों में से बुरहान बानी और दाऊद चाहिए, उन्हें डॉ. कफ़ील जैसे लोग नहीं सुहाते

अगर यह खबर सही है कि प्राइवेट प्रैक्टिस करने की वजह से डॉ कफ़ील को हटा दिया गया है, तो चलो… मैं उन्हें हटाने का समर्थन करता हूं..!!

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लेकिन औकात और हिम्मत है तो डॉ कफ़ील के साथ ही शुरू करो, समूचे देश के उन तमाम डॉक्टरों को जेल में बंद करो, जिन्होंने सरकारी नौकरी की तनख्वाह उठा कर सिर्फ और सिर्फ प्राइवेट प्रैक्टिस की, प्राइवेट अस्पतालों की नौकरी की..!

अगर डॉक्टर कफ़ील को हटाए जाने की वजह वही है जो बताई गई है तो मैं समूचे देश की कमजोर आबादी की ओर से सरकार और सु्प्रीम कोर्ट से मांग करता हूं कि समूचे देश में प्राइवेट प्रैक्टिस पर पाबंदी लगाई जाए। फिर देखते हैं कि इस सरकार के पास कितनी हिम्मत और औकात है डॉक्टरों का विरोध झेलने की..!

https://www.youtube.com/watch?v=uT6VZAiY-8Q

इंसानियत, व्यवहार और ईमानदारी की वजह से वहां आसपास के इलाकों में पहले से ही डॉ कफ़ील की मसीहाई छवि बनी हुई थी। गोरखपुर ‘कत्लेआम’ की रात अपनी सीमा या हैसियत में जितना भी बन पड़ा, डॉ कफ़ील ने अपने दायरे से बाहर जाकर भी बहुत कुछ किया। इस घटना के बाद उनकी जो छवि दुनिया के सामने आई, उससे भगवा सरकार को तकलीफ होना तय था..!

https://www.youtube.com/watch?v=nsjgdkiGFLQ

संघियों-भाजपाइयों को मुसलमानों में से शायद बुरहान बानी या दाऊद इब्राहिम चाहिए… उन्हें डॉ कफ़ील जैसे लोग नहीं सुहा सकते हैं..! वे हर हाल में किसी भी मामले को हिंदू और मुसलमान बना कर ही बच सकते हैं..!


खेल करते हो संघियों-भाजपाइयों…! बर्बरता के अपने चेहरे को ढकने के लिए झूठ का पर्दा ओढ़ कर दूसरों को बदनाम करते हुए तुम्हें न शर्म आनी थी, न कभी आएगी…!

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। गोरखपुर हादसे पर यह उन्होंने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा है।)

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