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‘आरक्षण विरोधी हरकतों के कारण इंडियन एक्सप्रेस से हटाए गए थे अरुण शौरी’

संपादक और संस्थान के बारे में शुक्रवार के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार अंबरीश कुमार ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। इसमें एक जानकारी दी इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक रहे अरुण शौरी के बारे में दी गई है। इसमें उन्होंने बताया है कि अरुण शौरी किस कदर मंडल कमीशन के विरोधी थे। वहीं दूसरे मामले में वे ईपीडब्लू के संपादक परंजय ठाकुरता के बारे में लिखा है। पढ़िए उनके द्वारा साझा की गई जानकारी…

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संपादक और संस्थान-
मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का फैसला हुआ तो सबसे पहले दिल्ली में छात्रों का विरोध हुआ। इस मंडल विरोधी आंदोलन को हवा दी इंडियन एक्सप्रेस के प्रधान संपादक अरुण शौरी ने। लिखने के साथ वे आंदोलन करने वाले छात्र नेताओं के साथ बैठक भी अपने केबिन में करने लगे। इस आंदोलन को उन्होंने ठीक से हवा दी। एक्सप्रेस का बड़ा आधार तमिलनाडु में भी है जो दलित राजनीति का मजबूत गढ़ रहा है।

रामनाथ गोयनका नहीं चाहते थे कि अख़बार एकतरफा सवर्ण जातियों के साथ खड़ा हो जाए और गैर सवर्ण जातियों के खिलाफ योग्यता के सवाल को लेकर हमला किया जाए। बात हुई पर अरुण शौरी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। अंततः चेन्नई से आए एक टेलीप्रिंटर संदेश से अरुण शौरी के हटाए जाने की सूचना एक्सप्रेस के लोगों को मिली। गोयनका का साफ़ मानना था कि कोई संपादक संस्थान से ऊपर नहीं हो सकता।

दूसरे मामले में अंबरीश कुमार लिखते हैं…..

ambrish kumar

ambrish kumar


पर परंजय ठाकुरता का रास्ता ठीक था ?
मौजूदा माहौल ऐसा है कि इसमें नरेंद्र मोदी के जयगान या फिर उनसे नफरत जताने के अलावा बात-विमर्श की कोई विवेकपूर्ण जगह नहीं बचती। अथवा ऐसा स्थान बेहद संकरा हो गया है। गुहा ठाकुरता ने अपनी लिखी रिपोर्ट ईपीडब्लू में प्रकाशित की, जिसमें आरोप लगाया गया कि अदानी ग्रुप ने टैक्स चोरी और मोदी सरकार ने उसे फायदा पहुंचाया। इस पर अदानी समूह ने ईपीडब्लू को कानूनी नोटिस भेजा। तब गुहा ठाकुरता ने ईपीडब्लू को चलाने वाले ट्रस्ट को बिना भरोसे में लिए इस केस को लड़ने के लिए वकील तय कर लिया।

https://www.youtube.com/watch?v=-0MyYVPuyZg

इस पर ट्रस्ट ने जवाब-तलब किया, तो उससे उठे विवाद के बीच उन्होंने इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने उनकी रिपोर्ट को ईपीडब्लू की वेबसाइट से हटाने का फैसला किया। इस आधार पर निष्कर्ष निकाल लिया गया कि ट्रस्ट अदानी समूह के दबाव में झुक गया। सोशल मीडिया और मीडिया के एक हिस्से में गुहा ठाकुरता को शहादत बख्श दी गई।

paranjay guha thakurta

इस बीच उनकी रिपोर्टों पर गुण-दोष आधारित चर्चा अथवा ईपीडब्लू के ट्रस्टियों के पुराने रिकॉर्ड एवं इस पत्रिका के मूलभूत चरित्र पर चर्चा करने की आवश्यकता आम तौर पर नहीं महसूस की गई। इस तरह “राम-रावण” के संघर्ष में अपने-अपने पक्ष तय कर लिए गए। लेकिन विवेकहीन चर्चा से बौद्धिक जगत भारत की की एक उत्कृष्ट संस्था को कैसी क्षति पहुंच सकती है, इसकी चिंता भला किसे है?

आगे पढ़ने के लिए उन्होंने एक लिंक साझा किया है जिसे आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

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