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सच बताना मर्दों, ये सामूहिक बलात्कार किस स्कूल से सीखा?

सच बताना मर्दों, ये सामूहिक बलात्कार जैसी प्रक्रिया के प्रत्येक पड़ाव से गुजरना किस स्कूल से सीखा?

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कहां से सीखे तुम लोग झूठ बोलना? तुम हिंदुस्तानी मर्दों की गैरत के किस्से तो इतने मशहूर हैं कि तुम लोग एक औरत को बांट नहीं सकते एक साथ एक वक्त में। फिर कहां से उठा लाए ये कुत्ते और सुअरों से भी गयी गुजरी शारीरिक भूख जिसमें तुम सब एक साथ एक औरत को खाते हो?

तुम लोग तो औरत को जूठन कहने में नहीं हिचकिचाए कभी, फ़िर कैसे अपना तनाव उस जगह शांत करते हो जहां कुछ पल पहले किसी और ने अपनी भूख मिटाई। थू है तुम जैसे मर्दों पर जो मर्द बनकर पाले जाते हैं जबकि दरहकीकत वो उन सुअरों से भी ज्यादा गए बीते होते हैं जो झुंड में गू खाते हुए भी किसी को तकलीफ नहीं देते।

बलात्कार के बाद कितनी आसानी से तुम लोग योनि मे चाकू, रॉड, कंकड़ भर देते हो, ये सब कहां से सीखे? निश्चित ही तुम लोगों के घरों पर ऐसा नहीं होता होगा, फ़िर कहां से सीखे ये गुर? हर जगह, फेसबुक पर भी निश्चित तौर पर बलात्कार को आतुर लोग होंगे, ज़रा बताएं मुझे कि ये कैसे सीखा कि औरत को तकलीफ देने के लिये सिर्फ बलात्कार काफी नहीं रहा, उस चीखती चिल्लाती औरत को मनमाफिक ढंग से काटना, क्षत विक्षत करना भी ज़रूरी हो गया है।

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ये पोस्ट अगर, कोई ऐसा कथित मर्द पढ़ रहा हो जो कभी सामूहिक बलात्कार का भागीदार रहा हो, वो अपने उत्सर्जन अंग और जिस्म की चीर फाड़ करवा के देखे, और दुर्भाग्य से अगर वो बेटी का पिता भी है तो ज़रा अपनी खुद की बेटी को सामूहिक बलात्कार की शिकार बनते वक्त, होने वाले सभी अमानवीय दुष्कर्मों के बीच से गुजरता देखने की हिम्मत करे।

आजकल तुम लोगों की दरिंदगी साठ साल की बच्ची को भी नहीं बख्शती, तो ज़रा कल्पना करो कि तुम्हारी मां बलात्कार की शिकार हो और लोग उसे चरित्रहीन कहें तो कैसा हो?

(ये अनुपम वर्मा के ये निजी विचार हैं।) 

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