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और नेताजी के खाने के बाद दलित धन्य हो गया

नेताजी दलित के घर भोजन करने गए। उन्होंने अपनी एक करोड़ की कार को दलित के घर के सामने रोक दिया। और फिर उनकी गाड़ी के पीछे जो पचास – पचास लाख की गाड़ियां थी वे भी रुक गयीं। दलित घर के बाहर खड़ा था। उसके पैर कांप रहे थे। उसका दिल धड़क रहा था। उसकी गर्दन झुकी हुई थी।

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जनता नेताजी की जय जय कार कर रही थी। नेताजी ने हाथ जोड़कर दलित को नमस्कार किया है और आगे बढ़कर दलित के गले में फूलों की एक माला डाल दी। इस भारी माला से दलित का सिर और झुक गया।

दलित नेताजी को लेकर घर के अंदर आया खाना लगा हुआ था। नेता जी और दलित खाना खाने बैठ गए। दलित ने इतना अच्छा खाना कभी न खाया था। खाना शुरु होते ही पत्रकार और मीडिया के लोग अंदर आ गए। वे भी खाने पर टूट पड़े। दलित को लगा कहीं खाना कम न पड़ जाए। पर खाना कम नहीं पड़ा।

https://www.youtube.com/watch?v=YoCSRhM_VSU

कैमरे चालू कर दिए और खाने के बाद पत्रकार नेताजी से कुछ मजेदार सवाल पूछने लगे। दलित से भी कुछ पूछा गया लेकिन वह जवाब न दे सका क्योंकि उसका पेट गले तक भरा था और आवाज नहीं निकल रही थी। पत्रकार उसे छोड़कर नेताजी के पास आ गए। नेताजी धड़ाधड़ बातें कर रहे थे।

नेता जी के जाने के बाद दलित पिघलने लगा। वह बर्फ की तरह गलने लगा। धीरे धीरे बहने लगा। फिर वह गायब हो गया।
अब दलित केवल उस फ़ोटो ही में था जो नेता जी के साथ खींची गयी थी।


(यह कहानी लेखक और चित्रकार असगर वजाहत ने अपनी फेसबुक वॉल पर शेयर की है।)

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