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क्या BJP ने गठबंधन तोड़ने के लिए मायावती पर बनाया दबाव, जानिए पूरी खबर

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(image credits: DNA India)

आज कल लोग बीजेपी की जीत और EVM जैसे बड़े मुद्दे को भुला कर बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की गठबंधन सरकार टूटने पर सवाल खड़े कर रहे है। कई लोग मायावती के फैसले पर नाराजगी जता रहे है तो कई लोग उनके पक्ष में है। लोकसभा चुनाव लड़ने के बाद अब सपा-बसपा दोनों ही अलग अलग उपचुनाव लड़ने की तैयारी। परन्तु इस गठबंधन से अलग होने पर मायावती ने कहा है की अखिलेश यादव और उनके परिवार से पारिवारिक रिश्ते बने रहेंगे।

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परन्तु सबसे ज्यादा सवाल इस बात पर उठाया जा रहा है की आखिर मायावती ने गठबंधन क्यों तोडा। क्या हार के चलते मायावती ने यह बड़ा फैसला लिया ? या फिर मायावती के इस फैसले के पीछे किसी और पार्टी का हाथ है। न्यूज़ क्लिक के वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश ने यह दावा किया है की मायावती पर अपने इस गठबंधन को तोड़ने के लिए दबाव बनाया गया है। और यह दबाव बीजेपी पार्टी की और से बनाया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है की बीजेपी पार्टी ने मायावती पर दबाव बनाया है।

सभी लोग यह अच्छी तरह से जानते है बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जिसका हक़ हर किसी संस्था पर है चाहे वो चुनाव आयोग हो या एनफोर्समेंट डिपार्टमैंट या फिर CBI सभी बड़ी संस्था पर बीजेपी का कंट्रोल है। क्या यह की बीजेपी सपा और बसपा दोनों ही पार्टियों को कंट्रोल कर रही हैं और दबाव बना रही है।

आखिर किस प्रकार का दबाव मायावती पर बनाया जा रहा है। बीजेपी एक ऐसी पार्टी है जो सभी संस्थाओं का गलत इस्तेमाल सिर्फ अपनी विपक्षी पार्टियों और दुशमनो के खिलाफ करती है। देखा जाए तो बीजेपी उन पार्टियों में है जो समय आने पर अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटती। बीजेपी सरकार जब चाहे किसी भी पार्टी को अच्छा और बुरा बना सकती है।

माना यह भी जा रहा है की 2017 में अखिलेश यादव और मुलायम सिंह यादव में पारिवारिक समस्या पैदा होने की वजह भी बीजेपी सरकार हो सकती है। एक छोटी सी बात को लेकर अखिलेश और मुलायम सिंह के रिश्ते को बिगाड़ने की कोशिश की गयी, यहाँ तक की मिडिया ने भी इस बात को इतना तोड़ मरोड़ कर दिखाया की लोगो को विशवास हो जाए की बाप और बेटे के रिश्ते में खटास पैदा हो गयी है। बीजेपी सरकार मिडिया से लेकर टेलीविजन पर पूरी तरह से छाई हुई है। मुलायम सिंह के भाई शिवपाल यादव के द्वारा अलग पार्टी बनाना और लोकसभा चुनाव की तैयारी करना एक सोचे समझे योजना के तहत था।


लोकसभा चुनाव से पहले सपा-बसपा गठबंधन को सबसे मजबूत गठबंधन माना जा रहा था। मायावती को प्रधानमंत्री के तौर पर देखा जा रहा था। परन्तु बीजेपी ने उत्तर प्रदेश जैसे बड़े क्षेत्र को हथियाने के लिए काफी सारी योजनाए बनायीं। कहा जा सकता है की धोके से या बेईमानी से बीजेपी सरकार यूपी में भी ज्यादा सीटों से जीत हासिल करने में कामयाब रही।

चुनाव से ठीक पहले मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार पर आय से ज्यादा संपत्ति को लेकर चल रहे केस को ख़ारिज कर दिया गया और वही मायावती पर लगे झूठे आरोपों से उन्हें बरी नहीं किया गया। क्या बीजेपी ने कोर्ट पर भी अपना हक़ जमा लिया जिसके चलते ऐसे फैसले सामने आये। सभी जनता यह जानती है की सपा-बसपा एक मजबूत गठबंधन है और यह गठबंधन आगे तक चला तो बीजेपी सरकार को मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। अगर सपा-बसपा दोनों ही पार्टी अलग हो जाए तो भाजपा के लिए आगे का रास्ता साफ़ हो जायेगा। शायद यही एक वजह है जिसकी वजह से बीजेपी सरकार ने दोनों पार्टियों के खिलाफ ऐसी योजना बनायीं की दोनों पार्टिया अलग हो जाए।

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