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शरद यादव के नाम खुला पत्र

आदरणीय श्री शरद यादव जी,
जय भीम! जय मण्डल!!

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आदरणीय श्री शरद यादव जी आप जयप्रकाश नारायण जी की सम्पूर्ण क्रांति के एक अजेय नायक हैं। जब देश मे लोकतंत्र को खत्म करने की साजिश हुई थी, सत्ताधारी अन्याय बढ़ा था, जबान सिलने की कोशिश हुई थी तथा देश मे आपातकाल लागू हुआ था तो जयप्रकाश नारायण जी ने सम्पूर्ण क्रांति का आगाज किया था जिसमे आपने अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री और जवानी का होम कर दिया था। समाजवादी धारा को आपके युवा नेतृत्व में देश के वंचितों को एक शानदार और नीतियों के प्रति प्रतिबद्ध युवा महानायक मिला था। आपने समाजवादी पुरखो के सपनो को परिपूर्ण करने के लिये हर सम्भव कोशिश भी की जिसकी सुखद देन मण्डल कमीशन के धूल-धूसरित अनुशंसाओं का लागू होना है।

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शरद यादव जी! वर्तमान समय मे देश कठिन दौर में है। बोलने की आजादी पर विराम लगाने की कोशिश जारी है। इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया को भांट बनाने की मुहिम जारी है। सरकार के विरुद्ध बोलने वालों पर सीबीआई की तलवार लटकाई जा रही है। लोकतंत्र के लिए यह अघोषित आपातकाल का दौर है जिसके बिरुद्ध आपके तपे हुए नेतृत्व की अत्यंत आवश्यकता है।

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आदरणीय शरद यादव जी! 17 अगस्त 2017 को आपके आह्वान पर दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में 17 दलो के साझा मंच से साझी विरासत बचाने की बाते की गईं।कांस्टीट्यूशनल क्लब से कांस्टीट्यूशन बचाने की मुहिम शुरू करने की सुखद चर्चा के बाद आपके नेतृत्व से देश को बहुत उम्मीदें हैं।1942 की “स्वतंत्रता आंदोलन की क्रांति”, 1974 की कांग्रेसी अराजकता के बिरुद्ध शुरू की गई “सम्पूर्ण क्रांति” के बाद 2017 में अघोषित आपातकाल के बिरुद्ध “सामाजिक न्याय क्रांति” की अत्यंत आवश्यकता है।

शरद यादव जी! आपको इस देश के वंचितो की वकालत हेतु तथा उनके हितों पर डाले जा डाके को रोकने हेतु नेतृत्व संभालना होगा क्योकि वर्तमान में आपमें ही एक समर्थ नेतृत्व दिख रहा है।

शरद यादव जी!17 अगस्त 2017 के दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब तथा 19 अगस्त 2017 के पटना के श्रीकृष्ण मेमोरियल हाल के विशाल सम्मेलनों ने आप पर विश्वास जताते हुए अब आपको नेतृत्व संभालने का सुनहरा अवसर सामने प्रस्तुत किया है। जैसे 1942 में गांधी जी व 1974 में जयप्रकाश नारायण जी ने कमान संभाली थी वैसे ही 2017 में आपको देश के सामाजिक न्याय/धर्मनिरपेक्षता समर्थक मोर्चे के नेतृत्व को संभालना होगा।

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शरद यादव जी! कांग्रेस सहित सम्पूर्ण विपक्ष को आपको एक साझा कार्यक्रम देना होगा और उसे देश के समक्ष सर्वसम्मति से रखना होगा। एनडीए ने भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व में अपने एजेंडे को खोल दिया है। एनडीए का स्पष्ट एजेंडा मनुवाद है। गाय, गंगा, वर्ण व्यवस्था एवं मनुवाद अब इस देश की मुख्य लाइन हो गयी है। देश के संविधान से सामाजिक न्याय,वोट के अधिकार व धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को छीनने की तैयारी है जिसे भारतीय जनता पार्टी के जिम्मेदार लोग बोलने लगे हैं। समाजवाद की जगह राष्ट्रवाद अर्थात मनुवाद को प्रतिस्थापित करने की बातें कही जाने लगी हैं। एक तरफ उपेक्षित दलित/पिछड़े हिंदुओ से उनके संवैधानिक हक आरक्षण को छीना जा रहा है तो वही गाय के नाम पर उन्हें उद्वेलित कर अल्पसंख्यक समुदाय से लड़ाया जा रहा है। देश अजीब तरह के फासीवाद की ओर अग्रसर है।

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शरद यादव जी! साम्प्रदायिकता,फासीवाद, मनुवाद और तथाकथित हिंदुत्व का मुकाबला सिर्फ और सिर्फ सामाजिक न्याय रूपी हथियार से ही हो सकता है। समस्त विपक्ष को एकजुट कर सामाजिक न्याय की आवश्यकता और इसके महत्व से अवगत कराते हुए आपको इसे मुख्य एजेंडा के रूप में रखना होगा।

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शरद यादव जी! जब एनडीए विरोधी विपक्ष द्वारा सम्पूर्ण मण्डल कमीशन लागू करने, जातिवार जन गड़ना करवाने, आबादी के अनुपात में आरक्षण देने, प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण प्रदान करने,महिला आरक्षण विल में दलित, दमित, पिछड़ी महिलाओं को आरक्षण देने की बात रखी जायेगी तो भारतीय जनता पार्टी की कलई खुल जाएगी क्योकि वे इसके विरुद्ध खड़े मिलेंगे। जब उपरोक्त एजेंडे घोषित कर दिये जाएगे और ऐलान हो जाएगा कि अगली बनने वाली सरकार इन उपरोक्त मुद्दों को अमली जामा पहनाएगी तो भारतीय जनता पार्टी का हिंदुत्व के नाम पर दलित/पिछड़े वर्गो के बीच उनके सैद्धांतिक धोखाधड़ी का खुलासा हो जाएगा।

शरद यादव जी! लोहा गरम है, चोट करने हेतु आप आगे आइये और इस देश मे हजारो वर्ष से अधिकार विहीन जमातों को अधिकार सम्पन्न बनाने की मुहिम को तीब्र कीजिए तथा मनुवादी सत्ता के परिवर्तन हेतु एक समर्थ नेतृत्व प्रदान करिए।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका यादव शक्ति के प्रधान संपादक हैं।)

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