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पढ़िए… देशवासियों में राष्ट्रवाद जगाने के रामबाण उपाय

क्यों जनाब आप भाजपा और संघ के राष्ट्रवाद की आलोचना क्यों करते हैं?

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असल में देश में राष्ट्रवाद की बहुत कमी है। देखिये मज़दूर मज़दूरी मांगता रहता है। छात्र सस्ती शिक्षा के लिये आन्दोलन करते रहते हैं। औरतें समान अधिकारों का रोना रोती रहती हैं। दलित जाति पांति का विरोध करते रहते हैं। अल्पसंख्यक भी बहुसंख्यकों जैसा व्यवहार चाहते हैं। लेकिन अगर यह सभी लोग राष्ट्रवादी हो जायें…

तो मज़दूर, छात्र, औरतें और अल्पसंख्यक सिर्फ राष्ट्र के लिये सोचेंगे। राष्ट्रवादी बनने के बाद ये सभी पाकिस्तान को धूल में मिला देने और चीन को सबक सिखाने के बारे में ही सोचेंगे। सोचिये क्या होगा जब हर भारतीय सिर्फ पाकिस्तान और चीन से नफरत करेगा और उसे मिटाने और हराने के ही बारे में सोचेगा। सोचिये जब हर बच्चा बूढ़ा जवान स्त्री पुरुष सब कुछ भूलकर सिर्फ पाकिस्तान से नफरत करेगा। उस दिन ना छात्रों की कोई मांग बचेगी, ना औरतों की, ना दलितों की ना अल्पसंख्यकों की। फिर चुनावों में सिर्फ वीरता और पाकिस्तान और चीन को धूल में मिला देने की बातें होंगी।

आइये ऐसा भारत बनायें जिसमें पाकिस्तान और चीन को पैरों तले रौंद देने का प्रण करने वाले शूरवीर ही चुनाव जीत सकें। और तब जाति की बात करने वाले दलित, ये विकास पर सवाल उठाने वाले आदिवासी, बराबरी के लिये झंडा उठाकर घूमने वाले छात्र और मुसलमान की बात कोई ना कर पाये। आइये देश को कमज़ोर करने वाले इन कम्युनिस्टों को हमेशा के लिये दफन कर दें। और सिर्फ पाकिस्तान और चीन के नाश की बात करें।

राष्ट्रवाद जगाने के लिये हर यूनिवर्सिटी के सामने एक एक टैंक रखवा देना चाहिये। अगर जगह कम पड़े तो एक छोटी तोप तो ज़रूर ही रखवाई जाये। मुसलमानों के मुहल्ले के बाहर वाली तोप के ऊपर भगवा झन्डा भी फहराया जाय ताकि उन्हें याद रहे कि भारत हिन्दुओं का है। तो पूरे भारत को राष्ट्रवाद में डुबो देना चाहिये।


फिर अंबानी या अडानी साहब जब बस्तर या झारखण्ड में आदिवासियों की ज़मीन पर कब्ज़ा करेंगे तो कोई आदिवासी चूं भी नहीं करेगा। और अगर मुट्ठी भर आदिवासी चूं चपड़ करेंगे भी, तो भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारों के शोर में आदिवासियों की आवाज़ तो वैसे ही दब जायेगी।

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वैसे इस समस्या से निपटने के लिये एक उपाय और भी किया जा रहा है। अब हमारे कार्यकर्ताओं द्वारा आदिवासियों को भगवा गमछे और तलवारें बांटी जा रही हैं। अब आदिवासी को हमारे लोग समझा रहे हैं कि तुम्हारे दुश्मन ये मुसलमान और इसाई हैं, इनसे लड़ो तुम तो। तभी से आदिवासी अडानी का विरोध छोड़ ईसाई के पीछे पड़ा हुआ है। विश्वास ना हो तो बस्तर में जाकर देख लो…

कई सारे आदिवासियों के गांवों के बाहर बोर्ड लगा दिये गये हैं कि इस गांव में गैर हिन्दुओं का प्रवेश वर्जित है। इससे ये हुआ है कि आदिवासी अब सरकार और अडानी साहब से नहीं बल्कि आपस में ही लड़ रहा है। तो हम ऐसे ही राष्ट्रवाद बढ़ाते जायेंगे और देश के लोग अपनी अपनी भूल के बस पाकिस्तान और चीन को मिटाने के सपनों में डूबे रहेंगे।

https://youtu.be/bFcmp42sXto

बस आप सब बीच बीच में जय श्री राम के नारे लगाते रहिये। संसद से आदिवासियों के गांव तक बस जय श्री राम, भारत माता की जय और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे ही सुनाई पड़ने चाहिये। फिर इसके अलावा तो कोई और आवाज़ तो देश में उठ ही नहीं सकती। और अगर कोई दूसरी आवाज़ उठायेगा तो हम बोल देंगे कि ये राष्ट्रद्रोही है पाकिस्तानी, खांग्रेसी, सिकुलर, कौमनष्ट, आपी है। तो सब मिलकर जयकारा लगाइये, भारत माता की जय जय श्री राम।

(हिमांशु कुमार सामाजिक कार्यकर्ता हैं ये उनके निजी विचार हैं।)

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