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प्रधानमंत्री जी, कल रोईएगा नहीं क्योंकि….

कल हम आजादी का जश्न मनाएंगे। प्रधानमंत्री जी, मुझे ऐसा लगता है कि आप इस दिन भी लाल किले के प्राचीर से कुछ उसी तरह भावुक हो सकते हैं, जैसा रोहित वेमुला और गो रक्षकों की कारस्तानी पर भावुक हुए। लेकिन, इस अदने से आदमी की विनती है, प्लीज कल मत रोईएगा। क्योंकि, आंसू से ऑक्सीजन मिलते तो उन बच्चों की माएं रो-रो कर अपने बच्चों को जिन्दा कर लेतीं।

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प्रधानमंत्री जी, एक दरख्वास्त है. कल जब आप सरकार की उपलब्धि गिनाएंगे तो उसमें स्वच्छ भारत अभियान का जिक्र मत कीजिएगा. जानते हैं क्यों, क्योंकि आपके एक लाडले सीएम ने बोल दिया है कि बच्चे इसलिए भी मरे क्योंकि लोग अब तक स्वच्छता के प्रति जागरूक नहीं हैं। अब, उनसे ये कौन पूछे कि 20 सालों से आप उस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कुछ और करते या न करते, कम से कम अपने गोरखपुर को साफ ही बना देते क्योंकि गोरखपुर गोरक्षपीठ से अधिक बच्चों के कब्रगाह के लिए दुनिया भर में कुख्यात हो चुका है।

कल आप कोई आंकडा भी मत दीजिएगा। अब आंकडे डराते हैं। जैसा कि आपकी ही पार्टी के मंत्री ने जब बच्चों की मौत पर आंकडा पेश करना शुरु किया तो हर एक संवेदनशील मन सिहर उठा। तुर्रा ये कि अगस्त में तो बच्चे मरते ही हैं। मरना तो अंतिम सत्य हैं। एक दिन सब मरेंगे। लेकिन, इन बच्चों का मरना……

आप कल के भाषण में हमें कोई सपना भी मत दिखाईएगा। दिल से बोल रहा हूं, हमें स्मार्ट सिटी नहीं चाहिए बुलेट ट्रेन भी नहीं चाहिए। हमें कालाधन भी नहीं चाहिए। 24 घंटे बिजली नहीं मिलेगी तो भी चलेगा। बस, फिर बोल रहा हूं, दो काम कर दीजिए। आपके पास चुनाव में जाने से पहले 2 साल बचे हैं। आप अगली बार फिर पीएम बनें, मुझे कोई दिक्कत नहीं। 20 साल पीएम रहें, क्या फर्क पडेगा, अगर ऑक्सीजन जैसी चीज की कमी से इस देश में कोई बच्चा मर जाए.। क्या फर्क पडेगा, अगर देश में 321 बच्चे रोजाना डायरिया से मर जाएं। डायरिया का सीधा सँबँध साफ पीने के पानी से है।

https://www.youtube.com/watch?v=ZOj3_TrvI3I

हम आपसे चांद तारे भी नहीं मांग रहे। बस, हमारे लिए, हमारे बच्चों के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य की व्यवस्था कर दीजिए। जिस दिन इस देश का आम आदमी प्राइवेट स्कूल से अपने बच्चों के नाम कटवा कर सरकारी स्कूल में दाखिला दिलवाने लगे और हार्ट का ऑपरेशन अपने जिला अस्पताल में करवाने लगे, यकीन मानिए आप न सिर्फ हिन्दुस्तान बल्कि दुनिया के चहेते बन जाएंगे। फिर आप इस चुनाव और पीएम पद से भी बडी चीज बन जाएंगे। शायद गांधी के बाद की दूसरी शख्सियत।


बाकि, ये देश है और हम। सनातन हैं दोनों। चलता आ रहा है अपनी नियति से। आगे भी चलता रहेगा। मजबूत नेता रोते नहीं, मजबूत निर्णय लेते हैं। नोटबन्दी और जीएसटी जैसा। कुछ वैसा ही मजबूत निर्णय शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी लीजिए। जरूरी हो तो इसे राज्य से छीन कर केन्द्र सूची में शामिल कीजिए।अंत में, एक बार फिर ये दरख्वास्त है कि कल लालकिले के प्राचीर से अपने भाषण में रोईएगा मत। क्यों? क्योंकि, आंसू से ऑक्सीजन मिलते, तो उन बच्चों की माएं रो-रो कर अपने बच्चों को जिन्दा कर लेतीं…

(लेखक पत्रकार हैं। यह आर्टिकल उनकी फेसबुक वॉल से साभार लिया गया है।) 

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