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स्वच्छता दिवस, भ्रष्टाचार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

2 अक्टूबर साल का इकलौता ऐसा दिन था.. जिस दिन सत्य, अहिंसा की कहानियां सुनाई जाती थीं.. बताया जाता था की कैसे बिना हिंसा के भी अपनी बातें मनवाई जा सकती हैं… आज भी याद है की अब की तरह उस दिन छुट्टियां नहीं हुआ करती थी.. उस दिन वो पाठ पढ़ाया जाता था जिसकी ज़रूरत शायद अब हर एक हिंदुस्तानी को हैं.. वो पाठ था सच्चाई, ईमानदारी, सदाचार, समर्पण और अहिंसा का

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आप सोच रहे होंगे की मैं यहाँ बचपन की बातें आपसे क्यों करने लगा.. दरअसल पिछले कुछ सालों से हम गांधी जयंती पर देश को स्वच्छ करने के लिए हाथ में झाड़ू लेकर निकल पड़े हैं जिसका सारा श्रेय प्रधानमंत्री जी को जाता हैं जिन्होंने 2 अक्टूबर को स्वछता दिवस घोषित कर कहा की अब बापू का सपना पूरा होगा होगा. पर आपको तो पता ही हैं हिंदुस्तान की आदत, यहां के सभी नियम एक नए भ्रष्टाचार को जन्म देते हैं. आप सोच रहे होंगे कि स्वछता से कैसे भ्रष्टाचार हो सकता हैं.. तो आपको समझने के लिए कुछ आंकड़े दे रहा हूँ..

1 -ग्रामीण भारत में 12 लाख टॉयलेट बनवाने का अनुमानित लागत हैं ₹1.96 लाख करोड़
2 – स्वच्छ भारत अभियान पर खर्च करने की उम्मीद लगभग ₹620 बिलियन हैं

अब आप अपने घर या गाँव के आस पास जाइएगा और खुद ही देख लीजियेगा की जो सरकार भ्रष्टाचार ख़त्म करने के दावे करके सत्ता में आई है उसकी योजनाओं में ही कितनी खूबसूरती के साथ भ्रष्टाचार हो रहा है.

ये भी कहा मैं स्वच्छता दिवस के दिन भ्रष्टाचार की बातें करने लगा.. मैं इंतज़ार कर रहा हूँ 5 साल बीतने का उसके बाद आंकड़ों पर ही बात करके ये साबित करने की कोशिश करूंगा की गांधी के देश में ईमानदारी बची कहा हैं अब.. अब देश में सिर्फ ज़्यादातर वही ईमानदार हैं जिसे आज तक बेईमानी करने का मौका नहीं मिला.


खैर, सफाई दिवस पर वापस लौटते हैं जैसे ही प्रधान सेवक ने 2 अक्टूबर के साथ स्वच्छता दिवस की मुहीम को शुरू किया वैसे ही पूरा हिंदुस्तान लग गया सफाई में .. पूरा हिंदुस्तान बोले तो सभी मंत्री, सभी नेता, अभिनेता .. ऐसा लगा की हिंदुस्तान को पहली बार कोई राजनितिक त्योहार मिल गया हो सफाई का.. जिसे जहां कूड़ा दिखा लग गया सफाई में.. जिसे नहीं दिखा उन्होंने कूड़ा डलवा कर सफाई की और हां ”सेल्फी विद कूड़ा” वाली फोटो सोशल मीडिया पर अपलोड करना नहीं भूले.. और ये लगातार जारी हैं.. आदरणीय प्रधानसेवक जी देश को एक नया राजनीतिक त्योहार देने के लिये आपको बहुत बहुत बधाई.

मैं हिंदुस्तान की आवाम की तरफ से सवाल पूछना चाहता हूँ हर उस सियासतदान, अफसरों, नेताओं से जिन्होंने झाड़ू लेकर फोटो खिंचवाई या चूक गए खिंचवाने से कि अगर यही सफाई सत्तर सालों से बंद पड़ी फाइलों और पेंडिंग पड़े कामों पर किया गई होती तो आज पूरा हिंदुस्तान दिल से उन्हें सलाम कर रहा होता.

याद है मुझे कि प्रधानसेवक ने कहा कि स्वछता से सबसे ज़्यादा फायदा गरीबों को होगा तो मैं आपसे पूछना चाहता हूँ कि 70 सालों से पड़ा कूड़ा तो आपको दिख गया पर आपको सड़कों पर कूड़े के सामान ज़िन्दगी जीते इंसान नहीं दिखा.. कही दूर जाने कि ज़रूरत नहीं हैं देश कि राजधानी के फ्लाईओवर के नीचे झांककर देख लीजियेगा दिख जाएंगे.. दरअसल उन्हें सिर्फ दो वक़्त कि रोटी और रहने के लिए एक कमरा चाहिए.. पर जब आप उन गरीब लोगों से बात करेंगे तो वो आपसे सब्सिडी नहीं मांगेंगे वो सिर्फ काम और अपने हक़ का दाम चाहते हैं.. जिससे वो अपने घर का गुज़ारा चला सके.. फिर किसी रोज़ फ़क़्र के साथ खुद हाथ में झाडू लेकर अपने मोहल्ले को भी साफ़ करें.

मैं ये सब बाते लिख कर बिलकुल भी स्वछता दिवस के खिलाफ नहीं हूँ.. दरअसल ये एक काबिले तारीफ़ कदम हैं.. पूरा हिंदुस्तान आपका समर्थन कर रहा हैं.. सफाई के साथ वो टैक्स भी दे रहा हैं जो आपने सिर्फ स्वछता के लिए लगाया.. अब उस टैक्स से आये पैसों का इस्तेमाल आपने कितना और कैसे किया उस पर बात आपके 5वें साल में करेंगे फैक्ट्स के साथ… बस अपने मंत्रियों और नेताओं से कह दीजिये कि झाड़ू लगाने के लिए हिंदुस्तान कि सारी आवाम खड़ी हैं आप लोग ये दिखावापन बंद करके थोड़ा काम कर लें..

वैसे जो स्वच्छता दिवस पर आपके बैनर लगे हैं हर गली हर चौराहों पर.. जिसमे राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी झाड़ू लगा कर अपना सपना साकार करने की जद्दोजहद में लगे हैं वही आप राष्ट्र के प्रधानसेवक जी बगल में खड़े मुस्कुरा रहे हैं अपनी उपलब्धियों पर.. की कम से कम 70 सालों से लाठी लेकर खड़े बापू जी को को भी कुछ नया काम देकर हाथ में झाड़ू भी पकड़ा दी.. अन्यथा ना ले तो एक बात कहूं आदरणीय प्रधानमंत्री जी.. जो काम इतने सालों में कोई ना कर सका वो आपने 3 सालों में कर दिया.. ”गाँधी जी के नाम का इस्तेमाल गाँधी जयंती को ख़त्म करने में कर दिया” दरअसल अभी ख़त्म नहीं हुआ हैं पर भविष्य में लोग इसी स्वछता दिवस भी तो कह कर बुलाने लगेंगे.. क्या पता आप इस दिन को अंतर्राष्ट्रीय मान्यता भी दिला दे “INTERNATIONAL SWACHHTA DIWAS” तब तो खैर आने वाली जनरेशन भूल ही जायेगी..ये बात तो मैंने ऐसे ही कह दी.. वैसे मैंने आज झाड़ू तो कही नहीं लगाईं पर सार्वजनिक जगहों पर गन्दगी ना फैलाने की कसम ले रखी हैं आपको और देशवासियों को भी स्वछता दिवस की शुभकामनाये..

(ये लेखक के निजी विचार हैं। प्रशांत तिवारी टीवी पत्रकार हैं।)

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