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‘भारत के सबसे बदनाम बिल्डर को टिकट देकर नीतीश ने अपनी राजनीति की लाज बचा ली’

आज संडे है। शहर का मौसम अच्छा है। कल के ट्रेन हादसे की बात सरकार भूल चुकी है। इसलिए आज कोई राजनीति नहीं, सिर्फ एक कहानी। कई हज़ार साल पहले की बात है। तब धरती चपटी हुआ करती थी और नाग अपने सिर पर इसे नचाता था। उस समय एक देश था। नाम कुछ भी रख लेते है। चलिए मान लेते हैं नाम था भारत। तो फिर क्या हुआ कि उस देश में एक बिल्डर पैदा हुआ। अब बिल्डर का काम है घर बनाना। लेकिन वह पैसे बनाता था।

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उसका भी एक नाम था। चलिए उसका नाम रख लेते है अनिल शर्मा। उसकी एक कंपनी भी थी। कंपनी का नाम आम्रपाली रख लेते हैं। वैसे भी नाम में क्या रखा है। कटहलपाली भी रख लें तो क्या फ़र्क़ पड़ता है? तो आम्रपाली ने सपने बेचने का काम शुरू किया। घर का सपना। साठ हज़ार से ज़्यादा लोगों ने अनिल शर्मा को रुपए दे दिए कि अनिल घर बनाकर देगा। लेकिन अनिल के इरादे तो कुछ और थे। उसने कुछ घर तो बनाए, लेकिन लगभग 40,000 घर बनाए ही नहीं।

अब अनिल क्या करे।
जनता दौड़ाए, अनिल दौड़े।

आम्रपाली अब भारत का सबसे बदनाम बिल्डर बन चुका था। अनिल परेशान। फिर उसे समझ में आया कि राजनीति में ही जान बच सकती है। अनिल भारत देश के एक प्रांत के सूबेदार को जानता था। वह आस-पास ही पैदा हुआ था। सूबे का नाम बिहार और सूबेदार का नाम नीतीश कुमार रख लेते हैं।

अब कहानी को वास्तविक रूप देते हैं। 2014 का लोकसभा चुनाव नीतीश अकेले लड़ रहे थे। उन्होंने जहानाबाद लोकसभा सीट का जेडीयू का टिकट अनिल शर्मा को थमा दिया। पार्टी की लोकल इकाई में बग़ावत हो गई।


बताते है कि इस सीट का सौदा 100 करोड़ रुपए में हुआ। इलेक्शन एफिडेविट में अनिल शर्मा ने अपनी जायदाद 850 करोड़ रुपए बताई। अनिल शर्मा ने पैसा पानी की तरह बहाया। नीतीश कुमार ने ख़ुद जहानाबाद में वोट माँगे। पर अनिल बुरी तरह हार गए।

चुनावी ख़र्च ने उनकी बची-खुची कमर तोड़ दी। आम्रपाली ग्रुप अब लगभग दीवालिया है। कंपनी की देनदारी 19,500 करोड़ रु से ज़्यादा है। कंपनी के CEO और अनिल का साला ह्रितिक सिन्हा एक बार जेल हो आए हैं। अनिल शर्मा और ग्रुप के दो अन्य डायरेक्टर के पासपोर्ट ज़ब्त कर लिए गए हैं ताकि वे विदेश न भाग जाएँ।

कंपनी के ब्रैंड एंबेसडर महेंद्र सिंह धोनी ने आम्रपाली के लिए प्रचार करने से मना कर दिया है। इनका ऑफ़िस सील हो चुका है। अनिल शर्मा के खिलाफ 406 और 420 में FIR दर्ज है। कंपनी का डायरेक्टर निशान्त मुकुल एक दफ़ा गिरफ़्तार हो चुका है। यह भारत का सबसे बड़ा हाउसिंग घोटाला है। इसके तार नीतीश कुमार और जेडीयू से जुड़े हैं। भारत के सबसे बदनाम बिल्डर को टिकट देकर नीतीश ने अपनी राजनीति की लाज बचा ली।

(दिलीप मंडल वरिष्ठ पत्रकार हैं।)

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