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सृजन घोटाला: नीतीश कुमार ने रमैया के एहसान का बदला चुकाया?

सुनो कहानी!
रमैया, सृजन और नीतीश कुमार
सृजन घोटाले में एक दिलचस्प नाम के. पी. रमैया का है। IAS अफ़सर से 2014 में वोलंटरी रिटायरमेंट लेकर वे JD-U में शामिल हुए। पार्टी दफ़्तर में बड़ा आयोजन हुआ।
आँध्र प्रदेश के रहने वाले रमैया को टूटी-फूटी हिंदी आती है। बिहार के किसी समीकरण में नहीं आते।
लेकिन नीतीश कुमार ने रमैया को सासाराम से लोकसभा का उम्मीदवार बना दिया।
रमैया ने जब अपनी इलेक्शन एफिडेविट दाख़िल की तो उन्हें कई गंभीर धाराओं वाले मुक़दमों का ज़िक्र करना पड़ा।
लेकिन नीतीश कुमार ने इनकी परवाह नहीं की।
ख़ैर, रमैया कमज़ोर कैंडिडेट साबित हुए। उन्हें एक लाख से भी कम वोट मिले। विजेता और रनर अप को तीन-तीन लाख से ऊपर वोट आए।
अब थोड़ा पीछे चलते हैं।
रमैया ही वे अफ़सर हैं, जिन्होंने स्थानीय जेडीयू तथा बीजेपी नेताओं के सहयोग से सृजन घोटाले की नींव रखी थी।
उस समय रमैया भागलपुर के ज़िलाधिकारी थे।
उन्होंने आदेश दिया कि सरकारी ख़ज़ाने का पैसा सृजन के खाते में जमा किया जा सकता है।
उनका उस समय का बैंकों को लिखा गया पत्र सार्वजनिक हो चुका है।
उन्होंने ज़िला स्तर पर इतना बड़ा फ़ैसला ले लिया। फ़ायदा किसे हुआ?
क्या रमैया नीतीश कुमार के किसी राज को जानते है? सासाराम सीट पर रमैया को खड़ा करने का क्या मतलब है? क्या वे ब्लैकमेल कर रहे थे? या पार्टी को फ़ंड कर रहे थे।
या नीतीश कुमार ने रमैया के किसी एहसान का बदला चुकाया?

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(ये लेखक के निजी विचार हैं। दिलीप मंडल वरिष्ठ पत्रकार, बहुजन विचारक और लेखक हैं।)


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