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लालू यादव को ‘चारा चोर’ बनाने का सच

कर्नाटक के पूर्व डीजीपी एवं चारा घोटाले के मुख्य जांच अधिकारी एपी दुराई (IPS) ने अपनी आत्मकथा “परसूट आफ ला एंड ऑर्डर” (Pursuit of law and order) में अध्याय 26 “द सीबीआई वर्सेज लालू प्रसाद यादव” (The CBI Vs Lalu Prasad Yadav) में पृष्ठ 230, 231, 232 में लिखा है कि सीबीआई ने अपने द्वारा दायर 49 मुकदमो में से 7 में लालू प्रसाद यादव को मुजरिम बनाया है। उन्होंने लिखा है कि लालू प्रसाद यादव एवं कुछ आईएएस को फंसाने का गम्भीर षड़यंत्र किया गया। देश की न्यायिक व्यवस्था में ऐसा होना ठीक नही है। मीडिया ने भी लालू प्रसाद यादव को बिना मुजरिम सिद्ध हुए खुद ही ट्रायल कर उन्हें अपराधी घोषित कर दिया।

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आईपीएस अधिकारी एपी दुराई की यह स्वीकारोक्ति इस देश के बहुजन, शोषित, दमित समाज को हजार वर्षों से अपराधी, नकारा, असुर, राक्षस आदि घोषित करने की निकृष्ट परम्परा को उद्घाटित करता है। एपी दुराई साहब ने जो कुछ भी अपनी किताब में खुद की आत्मकथा में लिखा है वह वंचित समाज की ऐसी व्यथा कथा है जो शायद ही सुनने को मिले। यह देश और इस देश का तथाकथित बुद्धिजीवी जो सदैव ही परजीवी रहा है कमरों/अर्जकों/उत्पादकों की कमाई का, वह सर्वदा ही श्रम करने वालो को हिकारत की नजर से देखता रहा है और गाहे-बगाहे जब भी मौका पाया है उन्हें अपमानित व लांछित कर ने का कुकर्म किया है जिसका एक घृणित उदाहरण लालू प्रसाद यादव को चारा चोर सिद्ध कर डालने का षणयंत्र करना है।

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एपी दुराई ने जो इस पशुपालन घोटाले के जांच अधिकारी थे, स्पष्ट कर दिया है कि लालू को व कुछ आईएएस को फंसाने की गहरी साजिश हुई। आखिर लालू को फंसाने की साजिश क्यो हुई? आखिर वह लालू जिन्होंने शिवहर कोषागार में हुए खेल का खुलासा कर रपट दर्ज कराया वही लालू मुजरिम क्यों और कैसे हो गये? वह जगन्नाथ मिश्र जिसने इस पशुपालन घोटाले का सृजन किया वह चाराचोर न होकर पण्डित जगन्नाथ मिश्र और खेल को उजागर करने वाले लालू प्रसाद यादव चारा चोर? -अद्भुत ब्याख्या है इस देश का।

मैं समझता हूं लालू प्रसाद यादव का अहीर/पिछड़ा होना ही उन्हें अपराधी घोषित करने के लिए काफी था। सीबीआई द्वारा लालू को क्रश करने की योजना को मूर्त रूप दिया गया क्योंकि लालू इस देश की हजार वर्ष पुरानी सनातन एवं जड़ हो चुकी व्यवस्था को चुनौती दे दिए थे। लालू ने रामरथ रोक दिया था। लालू ने आरक्षण के लिए पुरजोर जोर लगा दिया था। लालू ने मण्डल कमीशन को लागू करवाने के लिए अपनी पूरी पूंजी/ताकत झोंक डाली। लालू ने रामजेठमलानी को मण्डल कमीशन के केस का वकील हायर कर सुप्रीम कोर्ट में इसे लेकर लड़ाई लड़ने का कार्य किया। लालू जी ने बिहार में मनहीनो को भी जीवंतता दी। दमित-पीड़ित लोग अब लालू के कारण बोलने लगे।


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लालू प्रसाद यादव वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य के ऐसे महानायक हैं जिन्हें घटा करके कोई राजनीतिक गठबन्धन नही हो सकता है। लालू सामाजिक न्याय और साम्प्रदायिक सद्भावना के लिए अपरिहार्य हैं। लालू के मान मर्दन का लगातार प्रयास जारी है ।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। चंद्रभूषण सिंह यादव त्रैमासिक पत्रिका ‘यादव शक्ति’ के प्रधान संपादक हैं।)

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