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हनुमान के बाद अब योगी आदित्यनाथ ने महर्षि वाल्मीकि को बताया दलित

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(Image Credits: india.com)

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में मुख़्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भगवान राम को हमारी मुक्ति का आधार बताया है। उन्होनें कहा कि राम हमारे आदर्श है और हम सबका राम से साक्षात्कार कराने वाले महर्षि वाल्मीकि ही हैं और हम उन्हीं की परंपरा को भूल जाते हैं। हम वाल्मीकि समाज के लोगों से छुआछूत करते हैं, जब तक यह दोहरा चरित्र रहेगा तब तक कल्याण नहीं होगा। जब तक चरित्र में दोहरापन है तब तक व्यक्ति सफल नहीं हो सकता। इसलिए आचार और विचार में सौम्यता बेहद आवश्यक है।

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योगी आदित्यनाथ ने आयोध्या में आयोजित समरसता कुम्भ के मंच से वाल्मीकि को परोक्ष रूप से दलित कहा। इससे पूर्व योगी ने हनुमान को भी दलित वनवासी बता दिया था। मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि वेद की अधिकतर ऋचाओं किसने रचीं ? आज आप कहते हैं कि महिला वेद नहीं पढ़ सकती, दलित वेद नहीं पढ़ सकता। दरअसल, वेदों ऋचाओं को रचने वाले ऋषि हैं, जिन्हें आज हम दलित कहते हैं, वे उनके ही पूर्वज हैं।

मुख़्यमंत्री योगी ने कहा कि वाल्मीकि समुदाय के लोगों के प्रति हमारी छुआछूत की भावना है। यह दोहरा चरित्र जब तक रहेगा तब तक कल्याण नहीं होने वाला है। वेदों से हम सभी को साछात्कार कराने वाले, उन महर्षियों को हम भूल गए, हमने उस परंपरा को भुला दिया। हम आज राहुल गाँधी की तरह अपना नया गोत्र बनाने लगे तो दुर्गति तो होनी है।

मानवता का सबसे बड़ा मिलन स्थल, कुंभ

योगी ने कहा कि दुनिया में कुंभ यह सदेंश देता है कि धर्म और जाति का कोई भेदभाव नहीं है। पहला वैचारिक कुंभ बाबा विश्वनाथ की धरती पर संपन्न हुआ। दूसरा कृष्ण की धरती मथुरा में आयोजित हुआ। तीसरा कुंभ मर्यादा पुरषोत्तम भगवान श्री राम की नगरी आयोध्या में आयोजित किया जा रहा है। जिसमे देश दुनिया को मनुष्य के कल्याण से जुड़ा हुआ सदेंश दिया जा रहा है।


योगी ने कहा कि चौथा वैचारिक कुम्भ लखनऊ और पांचवा वैचारिक कुंभ प्रयाग में संपन्न होना बाकी है। हमने इससे पूर्व उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में कृषि कुंभ का आयोजन किया था। कुंभ का मतलब यह है कि भेदभाव नहीं होना चाहिए। सभी लोग एक समान हैं।

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