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हिन्दू समाज में भिखारियों के साथ भी जाति के आधार पर व्यवहार

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(Image Credits: thenational.ae)

भारत में दलितों के साथ होने वाले अन्याय कुछ इस तरह बढ़ने लगा है की लोग इसके लिए अब इंसानियत को पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं की क्यूंकि आज कुछ घटिया मानसिकता वाले लोगो ने भिखारियों के साथ भी दलित और ब्राह्मण के आधार पर व्यव्हार करना शुरू कर दिया है।

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जब हमे किसी भी लाचार व्यक्ति, जो गंदे कपड़े पहने हुए रेलवे स्टेशन या मंदिर या किसी भीड़ वाले स्थान पर हाथ में कटोरा पकड़कर पैसे मांगते हुए दिखाई देता हैं। तो हमारे मन में सबसे पहले ऐसे व्यक्ति के बारे में एक छवि बनती जिसे हम आम बोलचाल में भिखारी भी कहते हैं। हममे से कुछ लोग ये सोचेंगे की हमें उनकी मदद कर देनी चाहिए, लेकिन वहीं अब बात आती है ऐसे व्यक्तियों की जो मदद करने से पहले उनका नाम पूछते हैं ताकि ये उनकी जाति जान सकें।

हिन्दू समाज के अनुसार हिन्दू ब्राह्मण जाति के भिखारियों और दलित भिखारियों के बीच लोगो द्वारा भेदभाव किया जाता है। अक्सकर कुछ लोग ऊंची जाति के भिखारी को खाना या उनकी जरूरत की चीजे दे देते है, वहीं दुसरी और वह लोग जो जिन्हे समाज में वर्षो से जगह नहीं दी गई उनके साथ एकदम इसका विपरीत व्यवहार किया जाता है।

इन सबके पीछे सबसे बड़ा कारण है, समाज में एक खास समाज के लोगो को मुख्यधारा में न आने देना। हमेशा समाज में जानबूझकर ऐसे हालत बनाये जाते हैं जिससे की इस समाज के लोग मुख्यधारा से न जुड़ पाए। जिसके कारण इन लोगो को गरीबी और बेरोजगारी जैसे कठनाइयों का सामना करना पड़ता है। और अनंतत उन्हें मजबूर होकर मांगकर जिंदगी गुजर बसर करनी पड़ती है।

अब हमे यह सोचने की जरूरत हैं की क्या भारत में लोग जातिवाद को इंसानियत से ऊपर समझने लगे हैं? क्या हम सही में इस प्रकार की मानसिकता के शिकार हो चुके हैं? जहाँ हम किसी की मदद करने से पहले पूछने पर मजबूर हो जाते हैं को वो दलित है या ब्राह्मण या हिन्दू या मुस्लिम? अब देखने की बात तो यह है की भविष्य में हम इस प्रकार की मानसिकता और कितना शिकार होते रहेंगे।


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