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बीजेपी वित्त राज्य मंत्री ने मंदी पर लोगो से पुछा सवाल, जवाब सुनकर मंत्री की हुई किरकिरी

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(image credits: firstspot)

मंदी को लेकर चल रही देश की नाराज जनता के बीच बीजेपी वित् राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर फसते नजर आए। एक सम्मेलन के दौरान उन्होंने मंदी के पीछे कारण जानना चाहा तो तुरंत एक व्यक्ति ने बीच में उठकर ऑटो सेक्टर में मंदी के पीछे नोटबंदी को जिम्मेदार बताया।

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 दरअसल बीजेपी मंत्री शुक्रवार को एक कार्यक्रम में उस समय अजीबोगरीब स्थिति का सामना करना पड़ा जब सभागार में उपस्थित एक प्रतिभागी ने उन्हें बीच में टोकते हुये कहा कि नोटबंदी की वजह से वाहन क्षेत्र में मंदी छाई है। अनुराग ठाकुर वाहन कलपुर्जे बनाने वाली कंपनियों के संगठन एसीएमए के सालाना सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

जीएस आटो लुधियाना के जसबीर सिंह ने वित्त राज्यमंत्री को बीच में टोकते हुए कहा, यह नोटबंदी का देरी से सामने आने वाला प्रभाव है। लोगों के पास पैसा नहीं है। इसलिये मांग नहीं बढ़ रही है। हालांकि, ठाकुर ने संयम बरतते हुये अपना संबोधन जारी रखा और प्रतिभागी को बार-बार धन्यवाद कहा। संबोधन के बीच टोके जाने के बाद ठाकुर ने शांत रहते हुए कहा, अगर यह नोटबंदी का देरी से सामने आया प्रभाव है तो अब देखना है कि यहां से कैसे आगे बढ़ा जाये?

अनुराग ठाकुर ने कहा, रिजर्व बैंक के हाल के कदम के बाद ब्याज दर में कटौती, कंपनियों द्वारा छूट की पेशकश और केंद्र सरकार की कई पहल के बावजूद आखिर उद्योग पहले की तरह मांग क्यों नहीं देख रहा। ठाकुर ने सवालिया लहजे में पूछा, मांग में पूरी दुनिया में गिरावट आ रही है या फिर केवल स्थानीय स्तर पर ही इसमें गिरावट आ रही है?

 उन्होंने वहां मौजूद लोगों से कहा, अन्य मुद्दा यह है कि लोग अब कैब का इस्तेमाल करने लगे हैं। उनके सामने एक और विकल्प इलेक्ट्रिक वाहन अथवा बीएस मानक वाले वाहन का है …आखिर मुख्य कारण क्या है? इसके कई अन्य कारण हो सकते हैं। क्या यह केवल चक्रीय प्रभाव है?


बता दे की देश में आई मंदी के कारण बहुत से लोगो के रोजगार पर बन आई है। एक के बाद एक बड़ी कम्पनिया अपने उद्योग की कुछ इकाइयों में उत्पादन को कम कर रहे है। ऑटो और टेक्सटाइल उद्योग में इसका काफी बूरा प्रभाव देखा जा सकता है। वहीं इन सेक्टरों से समबन्धित लगभग 10 लाख लोगो की रोजगार पर बूरा प्रभाव पड़ा है।

वहीं दूसरी ओर सरकार इन सब से निपटने के लिए कई कदम उठाने का दावा तो कर रही है। परन्तु उनके कदमो से अर्थव्यसव्था की गति में कुछ सुधार देखने को नहीं मिल रहा।

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