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आर्टिकल-15 फिल्म पर ब्राह्मणो ने मचाया बवाल, सुप्रीम कोर्ट पंहुचा मामला

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(image credits: Deccan Chronicle)

ब्राह्मण समाज को आजकल एक फिल्म ने खासा परेशान किया हुआ है। ब्राह्मण समाज की सच्चाई को दिखाने वाली फिल्म आर्टिकल-15 शुक्रवार 28 जून को सिनेमाघरों में लग चुकी है। फिल्म अपने मुद्दों को लेकर काफी चर्चा में है फिल्म में बखूबी से ब्राह्मण समाज की दलितों के प्रति मानसिकता को दिखाया गया है।

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फिल्म रिलीज़ होने के बाद से सवर्ण समाज बौखलाया हुआ है जिसके बाद आर्टिकल-15 फिल्म के रिलीज पर रोक लगाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। फिल्म को लेकर समाज ने देशभर के कई सिनेमाघरों के बाहर नारेबाजी की। बैनर और पोस्टर फाड़ दिए। कानपुर में बवाल को देखते हुए प्रबंधन ने पहले शो को इंटरवल के बाद बंद कर दिया। दर्शकों को टिकट के पैसे भी लौटा दिए। पुलिस और पीएसी के तैनात होने के बावजूद एक थिएटर को छोड़कर बाकी सिनेमाघरों ने फिल्म का संचालन नहीं किया।

फिल्म आर्टिकल-15 के रिलीज होने पर बदायूं के कटरा सदतगंज इलाके में फिल्म संचलन के दौरान कोई बवाल न हो, इसलिए शुक्रवार सुबह ही इस गांव को छावनी बना दिया गया। कटरा सदतगंज वही गांव है जहाँ दुष्कर्म की घटना हुई थी जिसपर यह फिल्म आधारित बताई जा रही है। डेढ़ सेक्शन पीएसी और छह थानों की पुलिस सुबह से लेकर दोपहर तक गांव में डेरा डाले हुई है । बाद में पुलिस ने गांव में घूमकर हालात देखे और गांव में मामला शांत देखकर दोपहर बाद पुलिस और पीएसी को हटा लिया गया। उधर ब्राह्मण समाज के लोगों के भारी विरोध को देखते हुए रुड़की में फिल्म आर्टिकल-15 के प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है।

एएसडीएम के आदेश के अनुपालन में सिविल लाइंस कोतवाली पुलिस ने सिनेमा हॉल मालिकों को अग्रिम आदेशों तक फिल्म प्रदर्शित नहीं करने के आदेश जारी किए हैं। दूसरी ओर, हरिद्वार में ब्राह्मण संगठनों ने सिडकुल स्थित सिनेमाघर के बाहर आर्टिकल-15 के विरोध में नारेबाजी करते हुए फिल्म का शो बंद करा दिया। इस दौरान सिनेमा हॉल पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।

बता दें कि तीन दिन पहले ही इलाहाबाद हाईकोर्ट में कानपुर के सामाजिक कार्यकर्ता पंकज दीक्षित की ओर से याचिका दाखिल करके फिल्म के प्रसारण पर रोक लगाने की मांग की गई थी। सवर्ण समाज के प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि फिल्म के निर्देशक अनुभव सिन्हा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक गांव में हुए चचेरी बहनों की दुष्कर्म वाली घटना पर फिल्म बनाए जाने की बात कही थी, लेकिन ये फिल्म सत्य घटना के विपरीत है।


इसमें निर्देशक ने ब्राह्मण को दुराचार और दलित विरोधी होना का आरोपी बताते हुए पूरे ब्राह्मण समाज की छवि धूमिल की है, जो सही नहीं है। ब्राह्मण समाज ने इस फिल्म के संचालन को रोकने के लिया अब सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाज़ा खटखटका दिया है। फिलहाल देखना यह है की अब सुप्रीम कोर्ट इस फिल्म को लेकर क्या प्रतिक्रिया देता है।

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