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कंपनियों ने सरकार को चेताया, कहा GST करे कम वरना 10 लाख लोगों की जा सकती है नौकरी

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(image credits: The Financial Express)

केंद्र सरकार द्वारा लगाए गए GST के चलते बड़ी कंपनियों को नुकसान होने लगा है। ऐसे में बड़ी कंपनियों ने सरकार को चेतावनी दी है की अगर सरकार GST कम नहीं करती तो लाखो लोगो की नौकरी खतरे में पड़ सकती है। मोदी सरकार का दावा था की गुड सर्विस टैक्स से काले धन पर रोक लगेगी इससे सभी कंपनियों को भी लाभ पहुंचे। परन्तु GST से ऐसा कुछ भी होता नहीं दिख रहा। बल्कि कई ऐसी कम्पनियाँ है जो बंद हो चुकी है। ऐसे में अब मोटर सेक्टर में भी GST की वजह से काफी सुस्ती दिख रही है।

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ऑटो सेक्टर में सुस्ती का असर इस क्षेत्र में काम करने वालों लोगों पर पड़ने वाला है। ऑटो पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स ने चेतावनी दी है कि यदि ऑटो सेक्टर में इसी तरह कम काम होता रहा तो करीब 10 लाख लोगों की नौकरी जा सकती है। इन्होंने सरकार से GST की दर में कटौती कर 18 फीसदी की समान दर से लागू करने की मांग की है।

टेलीग्राफ में छपी खबर के अनुसार ऑटोमोटिक कंपोनेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ACMA) के अध्यक्ष राम वेंकटरमानी का कहना है कि ऑटोमेटिव इंडस्ट्री अभूतपूर्व सुस्ती का सामना कर रही है। इसका कारण सभी सेगमेंट में वाहनों की बिक्री में कमी होना है। पिछले कई महीनों से वाहनों की बिक्री में गिरावट जारी है।

वेंकटरमानी ने कहा कि ऑटो कंपोनेट वाहन उद्योग पर पूरी तरह से निर्भर हैं। इस संकट की स्थिति में 15-20 फीसदी उत्पादन में कटौती की जा चुकी है। यदि यही हाल चलता रहा तो करीब 10 लाख लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। ACMA ने पूरे वाहन उद्योग में 18 फीसदी की समान दर से जीएसटी की दर लागू करने की मांग की है।

वाहन उद्योग में पिछले 10 महीनों के बिक्री में काफी कमी देखने को मिल रही है। वर्तमान में 70 फीसदी वाहन के कल-पुर्जे 18 फीसदी GST स्लैब के अंतर्गत आते हैं। हालांकि, बाकी के 30 फीसदी 28 फीसदी के स्लैब के अंदर आते हैं। इसके अलावा ऑटोमोबाइल्स पर GST की दर 28 फीसदी है। इसके अतिरिक्त 1 से लेकर 15 फीसदी सेस भी देना पड़ता है।


वेंकटरमानी ने कहा कि अपने एसोसिएशन के सदस्यों से बातचीत के बाद यह बात सामने आयी है कि पिछले 10 महीने में 10-15 फीसदी लोगों की नौकरियां गई हैं। जब 20 फीसदी तक उत्पादन में कटौती हुई है तो इसका असर नौकरियों पर भी पड़ेगा। उन्होंने कहा कि कल-पुर्जे बनाने में 70 फीसदी कामगार कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर काम करते हैं।

जापान की वाहन निर्माता कंपनी निसान ने बुधवार को दुनियाभर में अपने यहां से 10 हजार से अधिक लोगों के छंटनी की घोषणा की। कंपनी की तरफ से यह फैसला साल की पहली तिमाही में ऑपरेटिंग प्रोफिट कम होने के कारण लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी अपनी योजनाओं के अनुसार काम करने में संघर्ष कर रही है।

केंद्र सरकार का गुड सर्विस टैक्स कंपनियों और लोगो की नौकरियों के लिए बेड सर्विस टैक्स बन गया है। इसकी वजह से लाखो लोगो की नौकरियां खतरे में पड़ गयी हैं। एक तरफ रोजगार की कमी  जा रही है दूसरी तरफ लोगो की नौकरियां खतरे में पड़ रही है। जनता का यही सवाल है कीआखिर इन सबका जिम्मेदार कौन है। 

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