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दलित महिला बसपा के लिए वोट डालना चाहती थी, डलवा दिया बीजेपी को वोट

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(Image Credits: Hindustan Times)

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोलिंग बूथ का वीडियो वायरल हुआ, जिसमे बीजेपी के पोलिंग एजेंट लोगो से जबरन बीजेपी को वोट डालने के लिए प्रभावित करते नजर आये। मामला हरियाणा के फरीदाबाद का है, जहाँ 12 मई को छठवें चरण के मतदान हुआ। हालाँकि आरोपी बीजेपी एजेंट को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके साथ ही निर्वाचन आयोग ने यहां फिर से वोटिंग कराने की बात कही है। वहीं साथ में , पोलिंग अफसरों पर भी ऐक्शन लिया गया।

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गिरिराज सिंह पर आरोप है कि उन्होंने कुछ महिला वोटरों की जगह जबरन वोट डाला। इन्ही महिलाओं में 23 साल की एक दलित महिला विवेचना भी शामिल हैं, जो असौती गांव की रहने वाली हैं। विवेचना सरकारी हाई स्कूल में बने इस पोलिंग बूथ पर पहली बार वोट देने पहुंची थीं। बहुत इंतजार करने के बाद वह आखिरकार बूथ नंबर 88 पर वोट डालने पहुंचीं।

बताया जा रहा है की, विवेचना ईवीएम पर बीएसपी का चुनाव निशान हाथी ढूंढ रही थीं। तभी उस दौरान बीजेपी के पोलिंग एजेंट गिरिराज सिंह वहां आए और बीजेपी के चुनाव चिह्न कमल के सामने का बटन दबा दिया। उनकी इस हरकत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। विवाद इतना बढ़ गया की चुनाव आयोग ने चुनाव रद्द करने के साथ साथ इसकी जाँच करने के भी आदेश दे दिए।

महिला ने बताया, मैंने उससे पूछा कि उसने मेरी जगह वोट क्यों डाला तो वह बोला कि अब यह हो चुका है। ऐसा कहकर वह अपनी टेबल पर चला गया। मैं बीएसपी के लिए वोट डालना चाहा लेकिन वोट पहले ही पड़ चुका था।’ पुलिस ने इस मामले में एक अन्य केस भी दर्ज किया है। गिरिराज के अलावा एक अन्य शख्स का वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह वोटरों को प्रभावित करते नजर आता है।

पोलिंग बूथ का यह वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने वीडियो में दिख रही तीनों महिलाओं से संपर्क किया। तीनों महिलाओं ने ही यह बात मानी कि उनकी जगह किसी दूसरे ने वोट दे दिया। विवेचना ने बताया, ‘मैंने वापस आकर अपने देवर से बताया कि क्या हुआ लेकिन उसने मामले को आगे नहीं बढ़ाया। यह घटना बूथ के दूसरे अधिकारियों के सामने हुई। इसका मतलब यह है कि वे भी शामिल थे। ऐसे में हम किसके पास जाते?’


हालांकि, बूथ नंबर 88 पर गिरिराज की हरकतों से प्रभावित होने वाली महिलाओं में सिर्फ विवेचना ही शामिल नहीं हैं। वीडियो में देखा गया की एक अन्य दलित महिला ने भी आरोप लगाया है कि सिंह ने उन्हें बीजेपी के लिए वोट डालने का सुझाव दिया। उन महिलाओं में से दूसरी महिला का नाम शोभा है।

शोभा ने बताया, ‘मैं सुबह करीब साढ़े 10 बजे वोट देने पहुंची। जैसे ही मैं बूथ के अंदर गई, गिरिराज आया और कमल के निशान की ओर इशारा करके मुझे बटन दबाने के लिए कहा। मैंने उससे कहा कि वह कोई नहीं होता जो मुझे यह बताए कि किसे वोट देना है। मैंने उसे कहा कि जिसे मैं चाहती हूं, मैं उसे ही वोट दूंगी। मैं हाथी के बगल वाला बटन दबाया और चली आई। बाद में मुझे पता चला कि उसने ऐसा ही बर्ताव बाकी लोगों के साथ भी किया है।’

एक अन्य दलित महिला वोटर विद्या ने बताया, ‘हम सभी काफी सालों से बसपा को वोट दे रहे हैं, यह सभी जानते हैं। हमेशा से एक दबाव था, लेकिन इस तरह की चीजें पहले नहीं हुईं। बूथ पर मौजूद लोग जानते थे कि हम किसे वोट देंगे, इसी वजह से हमें निशाना बनाया गया। उन्होंने मेरी भाभी के साथ भी ऐसा ही बर्ताव किया।’

विध्या ने इस मामले में गिरिराज के साथ एक और सख्स के होने की भी बात कही है, जिसका नाम विजय रावत है। विध्या के मुताबिक, उसकी जगह गिरिराज ने नहीं, बल्कि विजय रावत ने बीजेपी के लिए वोट डाला। विद्या के अनुसार, उसके भाई ने बताया कि रावत युवा राजपुताना संगठन का अध्यक्ष है, और बीजेपी से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा, ‘मैं अपना वोट डालने के लिए बूथ के अंदर गई लेकिन विजय आया और उसने मेरे कुछ करने से पहले कमल का बटन दबा दिया। यह सही नहीं है। वोट देना हमारा अधिकार है। वे कौन हैं यह तय करने वाले कि मुझे किसे वोट देना है? हम अपने घरों में सुविधाएं कैसे पाएंगे जब हमें अपने पसंद के प्रत्याशी को वोट डालने की इजाजत नहीं मिलेगी।’

बीजेपी एजेंट द्वारा दलित महिला को बसपा को वोट डालने से रोकना बिलकुल भी उचित नहीं है। महिलाओ को बसपा उम्मीदवार पर वोट न डालने देने से यह पता चलता है की राज्य में बीजेपी को हार का डर सताने लगा है। जिसके कारन पार्टी से जुड़े कुछ लोग इस प्रकार की घटिया हरकत करने से भी पीछे नहीं हट रहे है।

इतने बड़े स्तर पर हो रहे चुनाव के दौरान इस प्रकार की घटनाओ का होना, प्रशासन पर सवालिया निशान उठाता है। इसके साथ ही यह चुनाव आयोग की जिम्मदारी बनती है की आगे से इस प्रकार की घटनाओ को रोका जाए।

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