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भारतीय सेना में 32 साल काम कर चुके एक सैनिक को घोषित किया अवैध नागरिक

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(Image Credits: Hindu)

असम में लागू राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गया है। आपको बता दे की देश में असम इकलौता राज्य है जहां सिटिजनशिप रजिस्टर की व्यवस्था लागू है।

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असम में सिटिजनशिप रजिस्टर देश में लागू नागरिकता कानून से अलग है। यहां असम समझौता 1985 से लागू है और इस समझौते के मुताबिक, 24 मार्च 1971 की आधी रात तक राज्‍य में प्रवेश करने वाले लोगों को भारतीय नागरिक माना जाएगा। जिस व्यक्ति का सिटिजनशिप रजिस्टर में नहीं होता है उसे अवैध नागरिक माना जाता है्। इसे 1951 की जनगणना के बाद तैयार किया गया था।

राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर यानी एनआरसी में लगातार कई खामिया भी सामने आती रही है इसको लेकर सुप्रीम कोर्ट असम की बीजेपी सरकार को कई बार फटकार भी लगा चुका है। इस बीच एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। ऐसे ही एक मामले में भारतीय सेना में 32 साल काम कर चुके मोहम्मद सनाउल्लाह और उनके परिवार को ‘विदेशी’ करार देकर पुलिस कस्टडी में ले लिया गया है। 52 वर्षीय मोहम्मद सनाउल्लाह दो दशक पहले भारतीय सेना में रहते हुए कारगिल युद्ध में देश के लिए लड़े थे।

मोहम्मद सनाउल्लाह भारतीय सेना में कैप्टन के पद से रिटायर हुए थे। सनाउल्लाह जम्मू-कश्मीर और नॉर्थ-ईस्ट के राज्यों के काउंटर इंसरजेंसी ऑपरेशंस घुसपैठ रोधी अभियान का हिस्सा भी रह चुके हैं। इसके आलावा उन्होंने वॉलियन्ट्री रिटायर्मेंट के बाद एसआई बॉर्डर पुलिस के तौर पर भी काम किया है। इसके बाद भी इनके पूरे परिवार का नाम एनसीआर में नहीं है। जहा देश के सैनको के लिए भाजपा सरकार बड़ी बड़ी बाते करती है वही तीन दशकों तक देश की सेवा करने वाले सैनिक को उसी मोदी सरकार ने विदेशी करार दे दिया और गिरफ्तार कर डिटेंशन कैम्प भेज दिया।

वही उल्लाह के वकील और उनके परिवार के सदस्यों का कहना है कि वह मूल रूप से भारत के नागरिक हैं। उन्होंने देश के लिए अपनी सेवाएं दी है। उल्लाह के वकील शाहिदुल इस्लाम ने कहा कि वह ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील करेंगे। मोहम्मद सनाउल्लाह सीमा पुलिस में सहायक उप-निरीक्षक (एएसआई) के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं जो की सीमा पुलिस असम की वह इकाई है, जो अक्सर सेवानिवृत्त सेनाकर्मियों और अर्धसैनिक कर्मियों को नियुक्त करती है।


सेना में जूनियर कमीशन अधिकारी के पद से सेवानिवृत्त हुए मोहम्मद अजमल हक ने बताया कि असम में जन्म के बीस साल बाद 1987 में सनाउल्लाह सेना में शामिल हुए थे। वह 2017 में सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद सीमा पुलिस में शामिल हो गए। उन्होंने एक सुनवाई में गलती से 1978 में सेना में शामिल होने का उल्लेख किया। इस गलती के आधार पर न्यायाधिकरण ने उन्हें विदेशी घोषित कर दिया गया फिलहाल इस पुरे मामले में पूछताछ और करवाई चल रही है।

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