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धोनी की पत्नी साक्षी ने ट्वीट कर बीजेपी की खोली पोल, कहा- घंटो बिजली रहती है गुल

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(image credits: newsd)

चुनावी माहौल के शुरूआती दिनों से ही कई पार्टियों ने EVM के खिलाफ मोर्चा खोला था। और आज भी कई पार्टियां EVM के खिलाफ है। कई विपक्षी पार्टियों का मानना है की EVM में गड़बड़ी होने के चलते बीजेपी को जीत मिली। दूसरी और चुनाव आयोग इन बातो को मानने से इंकार करती रही।

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चुनाव का समय नज़दीक है  ऐसे में सभी पार्टियां चुनाव प्रचार में लगी है। सबकी नजर बीजेपी पर भी है की वह किस प्रकार चुनाव प्रचार में अपने किये कामो को गिनाती है। वैसे ही आज कल बीजेपी सरकार अपने 100 दिन पुरे होने का जश्न मन रही है। परन्तु सभी लोग यह जानते है की इन 100 दिनों में देश की हालत खस्ता हो गई है।

परन्तु इस बात चुनाव प्रचार से पहले ही लोगो ने बीजेपी के नाकामियों को गिनाना शुरू कर दिया है। लोग बीजेपी के कामो और उनके किये झूठे वादों से परेशान है। कही बिजली तो कही पानी की समस्या से परेशान लोग बीजेपी सरकार के खिलाफ शिकायत लेकर बैठे है। झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दस जहाँ अपने क्षेत्र में पानी और बिजली की सम्याओ को दूर करने की बात करते है तो दूसरी और लोग की बातो से पता चलता है की बिजली और पानी की समस्या ज्यो-की-त्यों बनी है।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की पत्नी साक्षी ने भी ट्वीट कर बीजेपी की पोल खोली है। झारखंड में आने वाले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री रघुवर दास दिन-रात प्रदेश में हुए विकास कार्यों के प्रचार प्रसार में जुटे हैं।

जिसमें शहरी क्षेत्रों में 24 घंटे निर्बाध गति से बिजली की आपूर्ति भी शामिल है। लेकिन, उनके इस दावे की पोल साक्षी ने खोल दी है। साक्षी धोनी ने बिजली की कटौती से परेशान होकर ट्वीट किया कि रांची में लोग प्रत्येक दिन बिजली कटौती का अनुभव करते हैं। इसकी रेंज चार से सात घंटे की होती है।


साक्षी ने अपने ट्वीट में लिखा कि पांच घंटे से बिजली न होने का का कोई कारण नहीं है, मौसम अच्छा है और कोई त्योहार नहीं है। शाम 4.37 बजे किए गए अपने इस ट्वीट में उन्होंने लिखा कि मुझे आशा है कि इस समस्या का संबंधित अथॉरिटी द्वारा संज्ञान लिया जाएगा।

बीजेपी के लोग अपने कार्यकाल के 100 दिन पुरे होने का त्यौहार मना रहे है तो वही उनके खिलाफ शिकायते भी आ रही है। इससे साफ़ पता चलता है की इन 100 दिनों में भी बीजेपी शासित क्षेत्रों में बजली से जुडी समस्या दूर नहीं हुई है। चुनाव प्रचारो के दौरान सभी बीजेपी नेता और मंत्री अपने कामो की बढ़ाई करते लेकिन सच्चाई क्या है यह तो जनता ही जानती है। 

कई बार चुनाव आयोग पर यह भी आरोप लगा की वह बीजेपी के साथ मिली है जिस वजह से EVM की गड़बड़ी हो रही है। फिर से एक बार चुनाव आयोग ने अपना बयान जारी किया है जिसमे कहा गया है की चुनाव EVM मशीन से ही होंगे।

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के साथ हरियाणा और झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव में बैलेट पेपर के इस्तेमाल को खारिज किया है। इसके साथ ही आयोग ने कहा कि बैलेट पेपर अब ‘इतिहास’ हो गये हैं। उन्होंने ईवीएम का बचाव करते हुए कहा कि इन मशीनों से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। बता दें कि कांग्रेस और एनसीपी ने चुनाव में ईलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन के इस्तेमाल को लेकर आपत्ति जताई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त यानि सीईसी सुनील अरोड़ा ने राज्यों में चुनाव तैयारियों की समीक्षा के बाद कहा कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चुनावी खर्च की सीमा में फिलहाल बदलाव नहीं हो सकता। जानकारी हो कि शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानि एनसीपी जैसी पार्टियों ने प्रति उम्मीदवार चुनावी खर्च की सीमा मौजूदा 28 लाख रूपये से बढ़ाने की मांग की थी।

सीईसी ने कहा कि आगामी विधानसभा चुनावों में महाराष्ट्र के वामपंथी चरमपंथ से प्रभावित क्षेत्रों में अधिक केंद्रीय सशस्त्र बल तैनात किए जाएंगे। सुनील अरोड़ा ने कहा, ‘‘पार्टियां ईवीएम मुद्दे को उठाती रही हैं। हमने उन्हें प्यार और दृढ़ता से कहा है बैलेट पेपर अब इतिहास हो गये हैं और मैं आपसे कह सकता हूं कि ईवीएम के साथ छेड़छाड़ नहीं हो सकती है।

सीईसी ने आने वाले दिनों में त्योहार और चुनाव तारीख के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी मामले में तारीखों पर फैसला करने में आयोग विभिन्न कारकों को ध्यान में रखता है जैसे कि छुट्टियां और स्कूल, बच्चों की परीक्षाएं, विभिन्न धर्मों के महत्वपूर्ण त्योहार. उन्होंने कहा कि चुनाव कार्यक्रम की घोषणा दिल्ली में की जाएगी। सुनील अरोड़ा ने कहा कि मतदान की तारीखें तय करने में केंद्रीय बलों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना एक महत्वपूर्ण कारक है।

विपक्षियों ने हमेशा ही बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है। परन्तु बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग दोनों ही बैलेट पेपर से चुनाव कराने के पक्ष में नहीं। ऐसे में विपक्षी पार्टियां अपनी पूरी कोशिश में है की EVM की जगह बैलेट पेपर से ही चुनाव हो।

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