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मोदी सरकार को राशि देने के बाद RBI का आपात कोष घटा

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(image credits firstspot)

हालही में मोदी सरकार ने आरबीआई से उसके लाभांश और अधिशेष कोष में हस्तांन्तरित करने के आदेश मांगे थे और आरबीआई ने केंद्र सरकार को इस फैसले के लिए हाँ भी कह दिया था। इस फैसले के चलते मोदी सरकार ने आरबीआई से 1.76 लाख करोड़ रुपये से अधिक धनराशि अपने पास रख ली है। ऐसे में कई बड़े विशेषज्ञों ने इस फैसले पर असहमति जताई है और विपक्षी पार्टियो ने मोदी सरकार को फटकार भी लगाई। 

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ऐसे में देश को सबसे बड़ा नुकसान होने का अंदेशा लगाया जा रहा है। आरबीआई के आक्समिक कोष में अब कुछ ही राशि जमा है जो आपात स्तिथि में निपटने के लिए काफी नहीं है। 

रिजर्व बैंक का आकस्मिक कोष जून में समाप्त वर्ष में घटकर 1.96 लाख करोड़ रुपये रह गया। सरकार को रिजर्व बैंक से 52,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त भुगतान से उसकी आकस्मिकता निधि में यह कमी आई है। केद्रीय बैंक की 2018-19 की सालाना रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिजर्व बैंक का वित्त वर्ष जुलाई से जून होता है। यह वह कोष है जो केंद्रीय बैंक किसी आपात स्थिति से निपटने के लिये अपने पास रखता है।

रिजर्व बैंक के निदेशक मंडल ने विमल जालान समिति की रिपोर्ट के आधार पर अतिरिक्त राशि सरकार को हस्तांतरित करने का फैसला किया। समिति का गठन केंद्रीय बैंक के लिये उपयुक्त आर्थिक पूंजी नियम पर विचार करने और इस संबंध में जरूरी सिफारिशें देने के लिये किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार 30 जून 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में आकस्मिक कोष घटकर 1,96,344 करोड़ रुपये पर आ गया जो इससे पिछले साल इसी अवधि में 2,32,108 करोड़ रुपये पर था।

हालांकि, अतिरिक्त कोष में से 52,000 करोड़ रुपये का हस्तांतरण बाजार की उम्मीद से कम है। बाजार यह उम्मीद कर रहा था कि आरबीआई को अतिरिक्त पूंजी के रूप में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक हस्तांतरित करने पड़ सकते हैं। जालान समिति ने अधिशेष वितरण नीति को उसके सकल बही खाता आकार के समक्ष आरक्षित पूंजी भंडार को 5.5 से 6.5 प्रतिशत के दायरे में रखने का लक्ष्य रखा है।


आरबीआई ने 52,000 करोड़ रुपये के अलावा अपने लाभ में से 1,23,000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। यह हाल में किये गये भुगतान के मुकाबले लगभग दोगुना है। रिपोर्ट के अनुसार रिजर्व बैंक की घरेलू स्रोत से आय 30 जून 2019 को समाप्त वित्त वर्ष में 132.07 प्रतिशत बढ़कर 1,18,078 करोड़ रुपये रही जो इससे पूर्व वित्त वर्ष में 50,880 करोड़ रुपये रही थी। आय बढ़ने का मुख्य कारण ब्याज आय है। इसके अलावा प्रतिभूतियों, तरलता समायोजन सुविधा व सीमांत स्थायी सुविधा परिचालन के तहत शुद्ध ब्याज आय में वृद्धि हुई है।

मोदी सरकार के इस फैसले से सभी लोग हैरान भी है और परेशान भी है। आने वाले समय में बाजार को भारी नुकसान का बड़ा अनुमान लगाया जा रहा है और अब आरबीआई के पास इतनी राशि नहीं जो इस नुकसान को उठा सके। ऐसे में इस फैसले से देश में बड़ी मंदी आ सकती है। हालांकि ऑटो सेक्टर में भारी मंदी छाई है। मोदी सरकार ये सभी फैसले देश को आर्थिक रूप से कमजोर कर रहे है। 

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