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फर्जी राष्टवाद बनाम रोस्टरवाद का संघर्ष

False-Nationalism-versus-Roster-Conflict
(Image Credits: Janjwar)

इलाहाबाद हाई कोर्ट में रोस्टर पर फैसले के बाद University Grants Commission द्वारा 200 पॉइंट रोस्टर के स्थान पर 13 पॉइंट रोस्टर लाया गया। 200 पॉइंट रोस्टर में विश्वविधालय को इकाई मानकर आरक्षण दिया जाता था, लेकिन 13 पॉइंट रोस्टर में शिक्षण संस्थानों के विभाग को इकाई मानकर आरक्षण दिया जाएगा। दरअसल रोस्टर से ही निर्धारित होता है की कौन सा पद आरक्षित होगा और कौन सा अनारक्षित। 13 पॉइंट रोस्टर के अनुसार अगर किसी विभाग में 13 वैकेंसी निकलती है तो तभी दलित और आदिवासियों लोगो को निकाले गए पदों पर आरक्षण मिल सकेगा।

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UGC द्वारा उठाये गए इस कदम पर बहुत लोगो ने विरोध जताया है। देश में अनेको स्थानों पर दलित और आदिवासी समाज के लोगो ने इसका पुरजोर विरोध किया। इसके साथ साथ शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों ने भी इसके खिलाफ प्रदर्शन करके इसको वापस लेने की मांग की। जब से 13 पॉइंट रोस्टर लाया गया है तब से ही विश्विद्यालयों में इसके खिलाफ प्रदर्शन जारी है। इसी प्रकार काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में 5 मार्च को छात्र छात्राओं एवं शिक्षकों ने बंद का आयोजन किया है।

विश्वविद्यालय में SC, ST, OBC के छात्र छात्राओं एवं शिक्षकों ने उच्च शिक्षण संस्थानों में विभागवार आरक्षण के विरुद्ध समुचित प्रतिनिधित्व का अध्यादेश लाने की मांग तथा जमीन पर हक के लिये विवि बंद का आयोजन किया। अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग संघर्ष समिति के तत्वाधान में आयोजित बंद एवं प्रदर्शन में हजारों की संख्या में छात्र विश्वनाथ मंदिर गेट पर एकत्र हुये और वहां की सभी दुकानों को बंद करवा दिया, इसके बाद जुलूस लेकर छात्र विभिन्न संकायों होते हुए बीएचयू के मुख्य द्वार से निकलते हुए लंका मार्केट की सभी दुकानें बंद करवा दीं।

छात्रों का जुलूस रविदास गेट से पुनः बीएचयू मुख्य द्वार तक पहुंच कर विवि का मुख्य गेट कई घंटों तक बंद करने के बाद नारेबाजी प्रदर्शन करते रहे। बता दे की वहां पर एक सभा भी की गयी जिसमें वक्ताओं ने उच्च शिक्षण संस्थानों में विभागवार आरक्षण को रद्द कर SC, ST, OBC के लिये 49.5% आरक्षण के अध्यादेश को तुरंत लाने के लिए पुरजोर मांग की, जिसका वादा मानव संसाधन विकास मंत्री ने बजट सत्र में किया था।

बीएचयू के Professor Mahesh Prasad Ahirwar ने कहा कि केन्द्र सरकार ने देश की संसद में यह वचन दिया था कि सुप्रीम कोर्ट में उच्च शिक्षा में आरक्षण की पुनर्विचार याचिका खारिज होने पर वह वंचित वर्गों के हित के लिए अध्यादेश जारी करेगी किन्तु यह अत्यंत खेदजनक है कि अब वह अपने वादे से मुकर रही है। जबकि सरकार ने भी संसद में यह स्वीकार किया है कि विभागीय आरक्षण से SC, ST, OBC का प्रतिनिधित्व उच्च शिक्षा में खत्म हो गया है।


इसी कारण सरकार आदिवासियों के हितों का संरक्षण करने में सरकार पूरी तरह से असफल रही है और उनके जल जंगल व जमीन का हक छीना जा रहा है। प्रदर्शन को प्रो चौथीराम यादव, रविन्द्र प्रकाश भारती, मुकेश मानव, आदि ने संबोधित किया। ऊक्त अवसर पर प्रो जे.बी. कुमरैया, प्रो सुजाता गौतम, प्रो आर के गौतम, डॉ राजकिरण, डॉ बृजेश अस्थावल, डॉ अरुणा, डॉ मनोकामना, डॉ. प्रकाश चंद्र मणि, मनीष कुमार, चंद्रभान, बालगोविंद आदि के साथ ही हजारों की संख्या में छात्र छात्राओं ने भाग लिया।

मोदी सरकार की सचाई धीरे धीरे सामने आ रही है, पांच साल के कार्यकाल में सरकार ने सिर्फ झूठे वादें ही किये है। यह हम इसलिए कह रहे हैं क्यूंकि, सरकार ने संसद में यह यह मान लिया था की 13 पॉइंट रोस्टर प्रणाली से उच्च शिक्षा में SC, ST, OBC का प्रतिनिधित्व समाप्त हो गया है। परन्तु इसके बाद भी सरकार ने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इससे यह पता चलता है की सरकार सिर्फ दलितों के हितो की बात करती है, लेकिन वास्तव में जब उनके हितो की बात आती है तो सरकार अपने हाथों को पीछे हटती नजर आती है।

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