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फारूक अब्दुल्लाह: मौजूदा सरकार के कारण देश के अल्पसंख्यको के मन में बना हुआ है डर

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(Image Credits: FirstSpot Hindi)

देश में अक्सर लगभग सभी पार्टियां अल्पसंख्यक समुदाय लोगो के बारे में बाते करती है उनसे वादे करती है। परन्तु क्या सच में ऐसा है। यहाँ धर्म के नाम पर लोगो को बांटा जाता है। यहाँ तक की वोट पाने के लिए भी अलग अलग धर्मो और जाति के लोगो को लुभाया जाता है।

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परन्तु यह एक चिंता का विषय है अलग अलग अल्पसंख्यक समुदाय की बाते कर पार्टिया लोगो के
बीच दरार पैदा कर रही है। कही मुसलमानो कहीं हिन्दू। इसमें से सबसे बड़ा मुद्दा राम मंदिर का है जिसकी वजह से मुसलमान और हिन्दुओ के बीच काफी दुरी बन गयी।

बाबरी मस्जिद और राम मंदिर को लेकर सियासी जंग तो चलती रहती है परन्तु इन सबके
बीच अल्पसंख्यक समुदाय के लोग पीस रहे है।

पुलवामा में हुए घटना के बाद से ही मुसलमानो और कश्मीरियों पर भद्दी टिप्पड़ियां की जा रही है। अपने ही देश के मुसलमानो को इस प्रकार देखा जाता है जैसे मानो वह आतंकवादी हो।

इसी विषय में बात करते समय नेशनल कांफ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा कि मौजूदा सरकार विभिन्न धर्मों के बीच दरार पैदा कर रही है और अल्पसंख्यक ‘भयभीत’ महसूस कर रहे हैं।


अब्दुल्ला का कहना है की,‘दुर्भाग्यवश, इन चुनावों में, जो पार्टी सत्ताधारी है वह विभिन्न धर्मों के बीच खाई पैदा करने की कोशिश कर रही है और ये देश के लिए दुखद है। मुसलमान डरा हुआ महसूस कर रहे हैं। अल्पसंख्यक डरा हुआ महसूस कर रहे हैं…यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।

साफ़ तौर पर देखा जाता है की किस प्रकार धर्म जाति को लेकर सत्ता के लिए पार्टियां प्रचार करती है। इस वजह से लोगो की मानसिकता पर गहरा असर पड़ता है। लोगो के साथ भेदभाव की घटनाये भी सामने आयी है। इसमें कई घटनाएं तो ऐसी है जिसमे एक घर्म का दल दूसरे दल पर हावी हो रहा है।

अब्दुल्लाह ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा है की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह स्पष्ट करना चाहिए कि देश सिर्फ किसी ‘एक दल या एक विशेष पंथ के लोगों का ही नहीं हैं।

अब्दुलाह ने सुप्रीम कोर्ट के राजनीतिक रूप से संवेदनशील रामजन्म भूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने पर टिप्पणी की और यह भी कहा की वह अदालत के फैसले के विरोध में नहीं हैं।उन्होंने कहा,‘यह ठीक है कि दोनों पक्ष शीर्ष न्यायालय की निगरानी में मध्यस्थता करने के लिए सहमत हो गए हैं। और हम भी यह फैसला स्वीकार करते हैं।

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