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गुजरात: घोड़ी चढ़ा दलित दूल्हा तो पंचायत ने किया पुरे समाज का बहिष्कार, गांव में तनावपूर्ण माहौल

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(Representational Image) (Image Credits: The Hindu)

गुजरात के मेहसाणा जिले के एक गांव में दलित परिवारों का बहिष्कार करने का मामला सामने आया है। यहां एक दलित दूल्हे को अपनी शादी में घोड़ी पर बैठना भारी पड़ गया दलित दूल्हे की घुड़चढ़ी पर सवर्ण समाज के लोग खफा हो गए।

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जिसके बाद गांव में एक पंचायत हुई और पूरे गांव ने दलित समुदाय के लोगों का सामाजिक बहिष्कार कर दिया। साथ ही समुदाय के लोगों से बात करने या उनके साथ किसी तरह का मेलजोल रखने वालों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाये जाने की भी घोषणा भी कर डाली। बात यहींं खत्म नहीं हुई, इसके बाद उन्होंने पूरे दलित समुदाय का ही पूर्ण बहिष्कार कर साथ ही फैसला लिया कि दलितों को रोजमर्रा की जरूरी चीजें और सेवाएं भी उपलब्ध नहीं कराई जाएं।

जानकारी के अनुसार, मामला मेहसाणा जिले के कडी तालुका के लोर गांव का है। यहां मंगलवार को गांव के मेहुल परमार की शादी थी। परिजनों ने घोड़ी पर बैठाकर मेहुल परमार की बारात निकली। जिससे सवर्ण जाति के लोग दूल्हे के घोड़ी चढ़ने के कदम से कथित रूप से नाखुश थे। गांव के सरपंच विनूजी ठाकोर ने गांव के अन्य नेताओं के साथ फरमान जारी कर गांववालों को दलित समुदाय के लोगों का बहिष्कार करने को कहा।

मेहुल परमार के घोड़ी चढ़ने पर सरपंच विनूजी ने दलितों के सामाजिक बहिष्कार की घोषणा की। इसके अलावा समुदाय के लोगों से बात करने या उनके साथ किसी तरह का मेलजोल रखने वालों पर 5,000 रुपये का जुर्माना लगाये जाने की भी घोषणा की गयी थी। अब गांव के दुकानदार दलितों को दूध जैसी जरूरी चीजें तक देने से इनकार कर रहे हैं। अन्य ग्रामीणों ने बताया कि बहिष्कार के बाद ऑटो रिक्शा वाले भी उन्हें नहीं बैठा रहे हैं। वे दलितों को कड़ी कस्बे तक ले जाने से भी मना कर रहे हैं।

दलित नेता और वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यह गंभीर मामला है, सरकार को सख्त फैसला लेकर सामाजिक न्याय की मिसाल पेश करनी चाहिए. वहीं, गुजरात सरकार में सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्री ईश्वर परमार ने कहा कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। घटना में शामिल लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।


गुरुवार को फोन पर पुलिस उपाधीक्षक मंजीत वंजारा को दलितो ने सारी बात बताई। जिसके बाद गांव पहुंची वंजारा ने सारी जानकारी ली। मीडिया से बात करते हुए पुलिस उपाधीक्षक मंजीत वंजारा ने बताया कि 7 मई को मेहुल परमार की बारात गांव से गुजर रही थी। चूंकि परमार एक दलित है इसलिए गांव के कुछ नेताओं ने इस पर आपत्ति की और समुदाय के लोगों को अपनी हद पार नहीं करने की चेतावनी दी।

उन्होंने बताया कि गांव के सरपंच विनूजी ठाकोर की गिरफ्तारी के अलावा चार अन्य के खिलाफ भी अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अत्याचार रोकथाम अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामले दर्ज किये गये हैं। इसके बाद काफी संख्या में दलित समाजसेवी अपने समुदाय के लोगों की मदद के लिए गांव पहुंच गए। माहौल तनावपूर्ण होता देख क्षेत्र में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

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