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गुजरात: पेड़ से बांधकर दलित छात्र की दो लोगों ने की पिटाई

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(Image Credits: DBPOST)

मौजूदा सरकार में दलितों के साथ अत्याचार आय दिन बढ़ते जा रहे है। सरकार वैसे तो दलितों के अधिकारों की बाते करती है परन्तु सच्चाई लोगो के सामने है। सबका साथ सबका विकास की बात करनी वाली सरकार, समाज में किसी भी व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ रही है। मौजूदा सरकार समाज में हर तबके के लोगो के विकास की बात करती है। इसके साथ साथ सरकार हर समुदाय के लोगो के अधिकारों की रक्षा करने की भी बाते करती है। लेकिन सरकार के इतने दावे करने के बाद भी दलितों के साथ होने वाले घटनाओ में बढ़ोतरी होना सरकार की विफलता को दर्शाता है।

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हाल में ही एक सर्वे से पता चला है की गुजरात में दलित के साथ होने वाली घटनाओ में वृद्धि देखी गई। बता दें कि गुजरात मौजूदा प्रधानमंत्री का गढ़ भी माना जाता है। अब ऐसे में इस राज्य में किसी एक समुदाय के लोगो के साथ घटनाओ में बढ़ोतरी होना वहां के प्रसाशन पर सवाल उठाता है। राज्य में ऐसी घटनाओ के लगातार होने से यह पता चलता है की राज्य सरकार जानबूझकर को इन घटनाओ को अनदेखा करती रही है।

इसी प्रकार एक बार फिर गुजरात से ही दलित के साथ मारपीट का मामला सामने आया है। घटना गुजरात के पाटन की है जहाँ 17 वर्षीय दलित छात्र (मितकुमार) को पेड़ से बांधकर उसपर शारीरिक बल का प्रयोग करके उसको परेशान किया जाता है। घटना तब की है जब छात्र अपनी परीक्षा के लिए सेंटर के बाहर इंतजार कर रहा था। तभी एक शख्स उसे किसी काम के बहाने से सेंटर से दूर लेकर गया। इसके बाद आरोपी पीड़ित छात्र को अपनी साथी के साथ बाइक पर बैठाकर ले गया और पेड़ से बांधकर उसकी पिटाई की। फिलहाल छात्र मेहसाना के अस्पताल में भर्ती है और उसका इलाज जारी है।

अब हम आपको इस पूरे मामले के बारे में बताते है, दरअसल दलित छात्र के साथ हुई यह घटना गुजरात के पाटन जिले में चाणस्मा तालुका के गोराड गांव की है। जहां 18 मार्च को दलित छात्र मितकुमार नरेशभाई चावड़ा अपने इंग्लिश के बोर्ड एग्जाम के लिए सेंटर के बाहर खड़ा था। तभी दो लोग उसे बाइक पर खेत में ले गए और उसको पेड़ से बांध दिया। पीड़ित ने इस मामले को कुछ इस प्रकार कहा, मैं सार्वजनिक विद्या मंदिर हाई स्कूल में स्टेट ट्रांसपोर्ट बस से करीब एक बजे पहुंच गया था। मैं वहां इंतजार कर रहा था तभी वहां रमेश पटेल (स्टेट ट्रांसपोर्ट बस का कंडक्टर) आया और बोला कि उसे मुझसे कुछ काम है। यह बात बोलकर वो मुझे सेंटर से थोड़ी दूर लेकर गया जहां बाइक पर उसका एक साथी इंतजार कर रहा था। इसके बाद दोनों मुझे गोराड गांव के एक फार्म पर लेकर गए।

पीड़ित की माँ तरुना ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, रास्ते में उसके बेटे ने कहा कि उसका एग्जाम छूट जाएगा उसे जाने दें। लेकिन दोनों आरोपियों ने कहा कि वो इसकी चिंता न करे, वो एग्जाम शुरू होने से पहले उसे सेंटर छोड़ देंगे। इसके बाद उन्होंने खेत में उसे एक पेड़ से बांध दिया और लकड़ी से उसकी पिटाई शुरू कर दी। जब पीड़ित छात्र ने इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा कि उसे पढ़ाई नहीं बल्कि मजदूरी करनी चाहिए।


अब यहाँ सबसे हैरान करने वाली बात है यह है की आरोपियों ने छात्र को सिर्फ इसलिए परेशान किया क्यूंकि वह दलित होकर पढ़ाई कर रहा था। आजादी के इतने वर्ष बाद भी कुछ बेहद छोटी मानसिकता रखने वाले लोग आज भी ऐसा सोचते हैं, यह बिलकुल भी उचित नहीं है। आखिर जब देश का संविधान ही बिना भेदभाव के समाज में हर नागरिक को बराबर का अधिकार देता है तो ये कौन लोग है जो कुछ लोगो को उनके अधिकार से वंचित रखना चाहते हैं।

बता दें की छात्र की माँ तरुना एक प्लाईवुड फैक्ट्री में काम करती है। इस वजह से वो सभी मेहसाना में शिफ्ट हो गई। वहीं छात्र के पिता का हाल ही में एक्सीडेंट हो गया था जिसके बाद डॉक्टर्स ने उन्हें आराम करने के लिए कहा है।

इस घटना के बाद पीड़ित छात्र टैक्सी करके अपने घर आ गया और उसने एग्जाम भी नहीं दिया। इसके साथ ही मितकुमार ने डर की वजह से इस घटना के बारे में किसी को कुछ नहीं बताया। लेकिन बुधवार (20 मार्च) को जब मितकुमार की मां ने उसके जख्म देखे तो सारा मामला सामने आ गया।

जब मितकुमार की मां को घटना के बारे में पता चला तो माँ उसको लेकर अस्पताल गईं और इलाज के बाद पुलिस स्टेशन में एफआईआर करवाई। पुलिस ने आईपीसी की धारा 323, 341, 504, 506 (2) और 114 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इस मामले में डिप्टी एसपी आरपी जाला का कहना है कि चूंकि बस कंडक्टर का हमारे पास पूरा नाम नहीं है और पीड़ित उसे सिर्फ चेहरे से पहचानता है। इसलिए कार्रवाई में थोड़ी देरी हो रही है। लेकिन जांच जारी है। जल्द ही आरोपी पुलिस गिरफ्त में होंगे।

वहीँ इस मामले में यह भी सुनने को आ रहा है की पीड़ित छात्र का ऊंची जाति की लड़की के साथ अफेयर था। जिसके चलते यह घटना हुई है। परन्तु पीड़ित की मां ने इसे बिलकुल इंकार कर दिया। और कहा कि उसके बेटे को बदनाम करने के लिए यह अफवाह फैलाई जा रही है।

समाज में होने वाले इस प्रकार की घटनाओं से यह पता चलता है की आज भी हमारा देश कितना पिछड़ा हुआ है। एक तरफ हमारे प्रधानमंत्री सबके हितो और स्वाभिमान की बाते करते हैं। वहीं दूसरी तरफ उनके ही पार्टी के राज में इस प्रकार की घटना सामने आती है जो की बेहद निंदनीय है। समाज में इस प्रकार के वाक्याओं का बार बार होना, सरकार का इनके प्रति नरम रवैये को दर्शाता है। और अक्सर प्रशासन को भी इन मामलो से अपना बचाव करते हुए देखा जा सकता है।

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