fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

दलित प्रोफेसर के साथ उत्पीड़न, 4 प्रोफेसरों पर एफआईआर, शिक्षकों के साथ साथ छात्र भी आरोपी के बचाव में खड़े हुए

IITK_New kanpur
(Image Credits: Collegedunia)

आईआईटी कानपूर के दलित प्रोफेसर डॉ. सुब्रमण्यम सदरेला के उत्पीड़न मामलें में चार आरोपी प्रोफेसरों पर एफआईआर दर्ज करने के बाद पूरा कैंपस दो भाग में बट गया है। शिशकों के साथ साथ कैंपस के छात्र भी दो गुटों में बट गए हैं। सोमवार को फैकल्टी और स्टूडेंट फोरम में अपनी अलग अलग आपातकाल बैठक बुलाकर इस विषय पर चर्चा करी।

Advertisement

इस फोरम की बैठक में 130 से अधिक शिक्षक शामिल हुए। सभी शिक्षकों ने अपने साथी प्रोफेसरों पर किये गए एफआईआर की निंदा करी। उपनिदेशक प्रोफेसर मणिंद्र अग्रवाल और एके घोष एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष पर मामले पर एक पक्ष का साथ देने का आरोप लगाते हुए पद से हटाने की मांग का प्रस्ताव पास किया।

कहा जा रहा कि जब बोर्ड ऑफ़ गवर्नेंस बीजीएओ ने चारों प्रोफेसरों को एससी-एसटी उत्पीड़न मामले से बरी कर दिया था, तब चारों प्रोफेसरों पर इस धारा में एफआईआर क्यों किया गया है।

शिक्षकों ने एक मत में इस मसले पर कहा की इंस्टीट्यूट प्रशासन के तरफ से चारों प्रोफेसरों का बचाव करना चाहिए और कहा की चारों प्रोफेसरों को विधि संबंधी मदद करनी चाहिए। उन चारों प्रोफेसरों द्वारा परिजनों को भी हर तरह की सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

24 घंटे के अंदर शिक्षकों के सामने पूरी बात रखें निदेशक


शिशकों ने एक स्वर में कहा कि निदेशक की यह जिम्मेदारी बनती है की वह अभी तक के पुरे प्रकरण से हर शिशकों को अवगत कराये। सभी शिशकों ने यह मांग करी की 24 घंटे के अंदर निदेशक को शिकायत से लेकर अभी तक के पुरे प्रक्रिया की जानकारी और उसकी रिपोर्ट साझा करनी होगी।

सुरक्षा प्रभारी प्रो. दीपू फिलिप को हटाने की मांग

प्रोफेसरों का कहना है कि रविवार की रात जब वो लोग निदेशक से मिलने गए थे, तब  सुरक्षा कर्मियों ने उनकी वीडियो बना ली थी। यह बेहद गलत है। उन्होनें कहा की क्या कोई प्रोफेसर अपने निदेशक से खुलकर बात भी नहीं नहीं कर सकता है। प्रोफेसरों ने एक स्वर में कहा की अगर यह वीडियो निदेशक के निर्देश पर बनाई गई है तो  उन्हें सभी प्रोफेसरों से माफ़ी मांगनी चाहिए। लेकिन अगर यह वीडियो सुरक्षा प्रभारी प्रो. दीपू फिलिप के निर्देश पर बनाई गई है तो, उन्हें तुरंत ही पद से हटा देना चाहिए।

प्रेस को इस बात की सूचना दी जाए

सभी शिक्षकों ने इस मामले में मीडिया की भूमिका पर भी चर्चा की है। उन्होनें यह प्रस्ताव पास किया कि इंस्टीट्यूट प्रशासन को इस मसले में एक बात स्पष्ट करनी चाहिए कि चारों प्रोफेसरों को जांच में दलित उत्पीड़न का दोषी नहीं पाया गया है।

फैकल्टी फोरम में यह भी प्रस्ताव हुए पास

-फोरम में शामिल सभी सीनेटर्स इंस्टीट्यूट प्रशासन से सीनेट की आपात बैठक बुलाने के लिए अनुरोध करें।

-चारों प्रोफेसरों को उनके इस केस से छुटकारा दिलाने के लिए उन्हें हाईकोर्ट जाना पड़ेगा। इसलिए सभी फैकल्टी मिलकर उन्हें आर्थिक सहायता देंगे।

-फैकल्टी फोरम में शामिल सभी बैठकों का बहिष्कार करेंगे, जिसमें उप निदेशक प्रो. मणिंद्र अग्रवाल और एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष सदस्य या चेयरमैन हैं।

छात्रों ने कहा, कैंपस का विवाद बाहर न जाए, कैंपस में ही सुलझे

कैंपस के लगभग 200 की संख्या में छात्रों ने भी आपात बैठक बुलाकर पुरे मसले की चर्चा की। छात्रों द्वारा तय किया गया है की चारों प्रोफेसरों का समर्थन किया जाएगा। इस पूरे विवाद को कैंपस में ही सुलझाने के लिए कहा गया।

कुछ छात्रों ने कैंपस में मीडिया के प्रवेश का प्रतिबंधित करने को कहा क्योंकि इससे इंस्टीट्यूट की छवि खराब हो जाएगी। कुछ अन्य छात्रों ने भी मीडिया के कैंपस में प्रवेश का विरोध किया।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved