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अयोध्या मामले में कोर्ट का अहम फैसला, पांचो दिन होगी सुनवाई

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(image credits: the hans india)

अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट अब रोजाना सुनवाई कर रही है। ऐसे में मामले पर जल्दी फैसला आने की उम्मीद बढ़ गयी है। इस केस को लेकर कई नयी बाते भी सामने आ रही है।

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बता दें कि मध्यस्थता के जरिए इस विवाद के समाधान की कोशिश नाकाम होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सुनवाई का फैसला किया है। मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली 5 सदस्यीय संविधान बेंच अयोध्या मामले की सुनवाई कर रही है। इस बेंच में जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर भी शामिल हैं। बेंच ने 2 अगस्त को 3 सदस्यीय मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट का संज्ञान लिया था।

अयोध्या मामले पर पांचो दिन की सुनवाई पर तैयारी हो चली है परन्तु आखिरी यानी पंचे दिन की सुनवाई को लेकर थोड़ी अटकले सामने जरूर आयी है। अयोध्या मामले की सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के पांचवें दिन मुश्किल पक्ष के वकील राजीव धवन ने पांचों दिन की सुनवाई पर ऐतराज जताया है। वकील राजीव धवन ने कहा कि हमें कई तैयारियां करनी पड़ती हैं। अगर हफ्ते में पांच दिन सुनवाई हुई तो मुश्किल होगी।

वहीँ दूसरी और सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में वकील परासरण ने कहा कि जन्मस्थान को लेकर सटीक स्थान की आवश्यकता नहीं है, लेकिन आसपास के क्षेत्रों में भी इसका मतलब हो सकता है। उन्होंने कहा कि हिंदू और मुस्लिम पक्ष दोनों ही विवादित क्षेत्र को जन्मस्थान कहते हैं।

एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में गोपाल विषारद की तरफ से पेश हुए वकील के पराशरण ने कहा, “रामायण में कम से कम 3 बार बताया गया है कि राम का जन्म अयोध्या में ही हुआ था।” इस पर कोर्ट ने पूछा, “क्या ईसा मसीह का जन्म बेथलेहम में हुआ था? जैसे सवाल क्या कभी किसी कोर्ट में उठे हैं?” इसका जवाब देते हुए पराशरण ने कहा कि उन्हें ये चेक करना पड़ेगा।


बुधवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट में जजों ने निर्मोही अखाड़ा से पूछा कि क्या आपके पास कोई दस्तावेज या कोई सबूत हैं कि आप साबित कर सके कि रामजन्मभूमि की जमीन पर आपका कब्जा है. इसके जवाब में निर्मोही अखाड़ा ने कहा कि 1982 में एक डकैती हुई थी, जिसमें उनके कागजात खो गए।

मामले में पक्षकार निर्मोही अखाड़े की ओर से पेश सीनियर वकील सुशील जैन ने चीफ जस्‍ट‍िस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के सामने दूसरे दिन भी दलीलें जारी रखीं।

निर्मोही अखाड़े ने अदालत में विवादित 2.77 एकड़ जमीन पर अपनी दावेदारी पेश की। अखाड़े ने तर्क दिया कि 1934 से मुस्लिमों का उस स्थान पर प्रवेश नहीं हुआ है।

अयोध्‍या जमीन विवाद मामले में आज भी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है। रोजाना आधार पर सुनवाई का आज दूसरा दिन है। निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि सैकड़ों साल से मंदिर परिसर में हमारा नियंत्रण रहा है. निर्मोही अखाड़ा ने इस क्षेत्र के प्रबंधन और नियंत्रण की मांग की। निर्मोही अखाड़े ने बताया कि 1961 में वक्फ बोर्ड ने इस पर दावा ठोका था। लेकिन हम ही वहां पर सदियों से पूजा करते आ रहे हैं, हमारे पुजारी ही प्रबंधन को संभाल रहे थे।

निर्मोही अखाड़े के वकील ने कहा, मुस्लिम पक्ष ने ये स्‍वीकार किया है कि उस मस्जिद में आखिरी बार नमाज 16 दिसंबर, 1959 को पढ़ी गई थी। साल 1934 तक वे नियमित रूप से नमाज पढ़ते आए थे। उसके बाद तो शुक्रवार को भी नमाज अदा नहीं की गई। सुप्रीम कोर्ट ने केएन गोविंदाचार्य के उस अनुराध को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्‍होंने सुनवाई की ऑडियो/वीडियो रिकाॅर्डिंग या लाइव स्‍ट्रीमिंग की मांग की थी।

सभी पक्षों की दलीले सामने आ रही है ऐसे बस केस का फैसला आने का इंतज़ार है। लोगो को अयोध्या मामले से जुडी हर खबर का इंतज़ार है। देखना यह  है की कोर्ट अपना फैसला कब तक सुनाती है।

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