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JNU विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के मुस्लिम होने के कारन किया जा रहा परेशान, कुलपति पर लगाए आरोप

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(image credits: The Indian Express)

जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी पिछले 5 से 6 सालो से विवादों का विषय बना हुआ है। कुछ साल पहले JNU के छात्र कन्हैया कुमार समेत कुछ लोगो को देशद्रोह के झूटे आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। जिसके कारण देश भर में विपक्षी दलों और कुछ लोगो ने मौजूदा सरकार पर गलत तरीके से कानून का इस्तेमाल को लेकर निशाना साधा था। इस घटना के कारण यह विश्वविद्यालय अब चर्चा का विषय बना रहता है।

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इसी प्रकार एक बार फिर यूनिवर्सिटी से एक और मामला सामने आता दिख रहा है। दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार विश्वविद्यालय में एक प्रोफेसर के मुस्लिम होने के कारन उसे परेशान किए जाने की शिकायत आई है। प्रोफेसर की शिकायत के बाद दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (डीएमसी) ने जेएनयू को शुक्रवार को एक नोटिस जारी कर जवाबी मांगा है।

वहीं जेएनयू जेएनयू प्राधिकारियों ने इन सभी आरोपों को इंकार कर दिया है। डीएमसी ने कहा कि जेएनयू में एक प्रोफेसर ने जेएनयू प्रशासन, विशेषकर ‘सामाजिक बहिष्कार और समावेशी नीति अध्ययन केंद्र’ के निदेशक द्वारा ‘‘क्रमबद्ध तरीके से उत्पीड़न’’की शिकायत की है। इसको लेकर विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार को नोटिस और अंतरिम आदेश जारी किए गए हैं।

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग ने कहा कि प्रोफेसर ने आरोप लगाया है कि यह सब जेएनयू के कुलपति की सहमति के कारण हो रहा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि उसके मुसलमान होने के कारण उसे परेशान किया जा रहा है ताकि अंतत: उसे संस्थान से ‘‘बाहर निकाला जा सके।’’ अब देखने वाली बात यह है की देश में एकतरफ इन दिनों ऐसी ही विषयों पर बहस छिड़ी हुई है, वहीं दूसरी और जेएनयू जैसे संस्थान से इस तरह की खबर आने से लोगों को निराशा और हैरानी हो सकती है।

बता दें कि हाल ही में मानव संसाधन एवं विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा था कि जेएनयू शोध के मामले में दुनिया का शीर्ष संस्थान है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने इसे बदनाम भी किया है। निशंक के मुताबिक हम उनके मंसूबों को कामयाब नहीं होने देंगे और जेएनयू को राष्ट्र की मुख्य धारा से दूर नहीं होने देंगे।


JNU जैसे शिक्षक संस्थान में प्रॉफेसर को किसी खास धर्म से ताल्लुक रखने के कारण उसे परेशान किया जाना सही नहीं लगता है। इस तरह के घटनाओं से वहां शिक्षा ले रहे विद्यार्थियों पर गलत सन्देश जाएगा, जो की बिलकुल भी उचित नहीं होगा। प्रशासन को इस पर कार्रवाई करना चाहिए और यह ध्यान देना चाहिए की आगे इस तरह के मामले सामने नहीं आए।

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