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कर्नाटक: 3 साल से 52 एससी/एसटी लोगों को बना रखा था बंधुआ मजदूर, विरोध करने पर होता था यौन उत्पीड़न

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(Representational Image) (Image Credits: news18)

कर्नाटक से चौकाने वाली खबर सामने आई है, यहां करीब तीन साल से 52 एससी/एसटी लोगों को गुलाम बनाकर रखा गया था। जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल है इसमें 16 महिलाएं और 4 बच्चे थे। पुलिस ने बताया कि इन लोगो को लगातार 19 घंटे काम करने के लिए मजबूर किया जाता था और विरोध करने पर उन्हें चाबुक से पीटा जाता था और महिलाओं का तो यौन उत्पीड़न किया जाता था।

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कर्नाटक के हसन क्षेत्र की एक शेड में पुलिस ने रविवार को छापा मारा जहां पीड़ित अमानवीय स्थिति में रह रहे थे। कुछ पीड़त तो करीब तीन सालों से इसे झेल रहे थे। पुलिस को इसकी जानकारी तब मिली जब एक बंधुआ मजदूर 12 फ़ीट लम्बी दीवार कूदकर मदद मांगने के लिए सामने आया।

इस मामले आईपीसी की धारा 323, 324 (गलत तरीके से कारावास) 344 (चोरी), 356 (यौन उत्पीड़न) बंधुआ श्रम प्रणाली (उन्मूलन अधिनियम) और एससी, एसटी (अत्याचार अधिनियम की रोकथाम) के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने इस मामले में दो लोगो को गिरफ्तार किया है।

बता दें कि पुरे देश में बंधुआ मजदूरों के मामले सामने आये है मामले में सबसे कम उम्र के दो पीड़ित छह साल के लड़के है, वहीं सबसे बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र 62 गणेश हैं। पुलिस ने बताया की इस शेड में कुछ व्यक्तियों को तीन वर्षों से जबरदस्ती रखा गया था, जबकि एक व्यक्ति को यहाँ लाये हुए सिर्फ एक महीना हुआ था।

इंटरनेशनल जस्टिस मिशन की एम प्रतिमा ने यहां कैद लोगों की स्थिति के बारे में बताते हुए कहा, ‘उन्हें रात में बंद कर दिया जाता था. जब लोगों ने कहा कि उन्हें रात में बाथरूम जाना होता है तो उनके लिए शेड में ही पाइप लगा दी गई और कहा गया कि शेड के एक कोने को वे बाथरूम की तरह इस्तेमाल करें. महिलाएं बाथरूम के लिए जाती थीं तो उनके पति उन्हें कपड़े या चादर से चारों तरफ से कवर लेते थे.’


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