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लखनऊ: बीजेपी के ख़िलाफ़ पोस्ट लिखने पर दलित प्रोफेसर का अवाॅर्ड कर दिया गया रद्द

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(Image Credits: The print)

लखनऊ यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर रविकांत को फेसबुक पर बीजेपी के खिलाफ पोस्ट करना भारी पड़ गया. जिसके वजह से यूपी राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान द्वारा उन्हें मिलने वाले ‘रमन लाल अग्रवाल पुरस्कार’ को मिलने से पहले ही वापस ले लिया गया है. 1996 में स्थापित यह संस्था हिंदी में लिखने वाले प्रतिष्ठित साहित्यकारों प्रतिवर्ष 25 से अधिक पुरस्कार देता है. हाल ही में इसने दो गैर हिंदी भाषी कवियों या उपन्यासकारों को भी पुरस्कार देना शुरू कर दिया. इनमें से अधिकांश पुरस्कार राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित हैं.

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असिस्टेंट प्रोफेसर रविकांत को भी यही पुरस्कार मिलना था तभी उन्हें संस्थान की ओर से एक पत्र भेजा गया है जिसमें लिखा है कि उन्हें दिए जाना वाला पुरस्कार अब कैंसिल कर दिया गया है पत्र में फेसबुक पोस्ट को अवाॅर्ड कैंसिल की वजह बताया गया है. पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने इस मामले में बीजेपी पर निशाना साधा है।

रविकांत के मुताबिक, उन्हें 28 फरवरी को संस्था की ओर से पत्र मिला जिसमें उन्हें साहित्य में योगदान के लिए अवाॅर्ड दिए जाने की बात कही गई. इसमें 11 हजार नगद राशि भी दी जाती है. ये अवाॅर्ड उन्हें आगामी 17 मार्च को मिलने वाला था जो कि अब कैंसिल हो गया है. पत्र में कहा गया है कि दिल्ली में एक एनजीओ के सीएमडी द्वारा रविकांत के कई फेसबुक पोस्ट पर आपत्ति जताई गई है. इसी कारण संस्थान द्वारा उनका अवाॅर्ड कैंसिल किया जाता है.

प्रोफेसर ने अपनी फेसबुक पोस्ट में लिखा की “संतकबीर नगर में भाजपा के त्रिपाठी सांसद ने अपनी पार्टी के बघेल विधायक को जूतों से पीटा।
यही है समरसतावाद!
दलित पिछड़ों की भाजपा में यही औकात है।
कब सुधरोगे नालायकों?
क्या अभी भी भाजपा में ही मरोगे?
संविधान और लोकतंत्र की ताकत को पहचानों और ब्राह्मणवाद से मुक्ति पाओ।”

वही रविकांत एक और फेसबुक पोस्ट किया जिसमे उन्होंने विंग कमांडर अभिनन्दन रिहाई को लेकर पोस्ट लिया था जिसमे उन्होंने लिखा की “भक्तों का हाल देखिए…ट्रम्प के चुनाव जीतने के लिए यज्ञ करते हैं, उसके जन्मदिन पर दिल्ली में फोटो को केक खिलाते हैं, इनके देवता नवाज शरीफ की माँ के पैरों में नतमस्तक होते हैं और बिना बुलाए बर्थडे में पहुँचते है, तब भी वे देशभक्त और उनका देवता महान है।


हमारे विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई पर हमने इमरान की समझ, शांतिप्रियता की तारीफ क्या कर दी,भक्त तो तिलमिला गए।उनकी नजरों में हम गद्दार,देशद्रोही हो गए।उनकी गालियाँ बरसने लगीं।”

इसी तरह के पोस्ट असिस्टेंट प्रोफेसर रविकांत भाजपा लो लेकर करते आये है जिसके वजह से भाजपा के अंध भक्तो को मिर्ची लग गई वही उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार वाली राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान में प्रोफेसर रविकांत के पोस्ट से हलचल मची हुई है। वही इस पुरे मुद्दे पर उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम व सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस पर जत्ताई है. उन्होंने ट्वीटर पर इसे भाजपा का दलितों से भेदभाव करना बताया है. उनके मुताबिक ये बीजेपी का तथाकथित राष्ट्रवाद है. अखिलेश ने इस ट्वीट में रविकांत के साथ की तस्वीर भी साझा की है जिसमें वह अपनी किताब आज के आइने में राष्ट्रवाद उन्हें भेंट कर रहे हैं.

लखनऊ यूनिवर्सिटी के असिस्टेंट प्रोफेसर रविकांत ने बताया कि ये अवाॅर्ड उन्हें साहित्य में योगदान के लिए दिया जाना था लेकिन कैंसिल फेसबुक पोस्ट की वजह से किया गया है. फेसबुक पर वह बीजेपी पर कई तंज कस चुके हैं. उनका कहना है कि ये उनके निजी विचार हैं जबकि सम्मान उनके साहित्य के योगदान के लिए दिया जाना था. वे थोड़े दुखी जरूर हैं लेकिन फेसबुक से अपने पोस्ट नहीं डिलीट करेंगे. उनके मुताबिक विचारों की स्वतंत्रता हर किसी को है. ऐसे में कोई फेसबुक पोस्ट को लेकर आहत हो जाए तो इसमें वह क्या कर सकते हैं. जबकि इसी संस्थान ने पिछले साल साहित्य गौरव पुरस्कार उन्हें दिया था.

रविकांत को इस विवाद बढ़ जाने के बाद से सोशल मीडिया पर कई लोगों का समर्थन मिल रहा है. अवाॅर्ड देने वाले संस्थान राज्य कर्मचारी साहित्य संस्थान का कहना है कि विवादों से बचने के लिए अवाॅर्ड कैंसिल किया गया है. हालांकि अब अवाॅर्ड कैंसिल होने के बाद विवाद ज्यादा बढ़ गया है.ये संस्थान राज्य सरकार द्वारा वित्त पोषित है. अखिलेश के ट्वीट के बाद अब विपक्षी दलों के निशाने पर बीजेपी सरकार आ गई है.

कांग्रेस ने भी इस पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने कहा है कि प्रो. रविकांत से जो पुरस्कार वापस लिया गया है कांग्रेस पार्टी इसक निंदा करती है. भारत का संविधान प्रत्येक व्यक्ति को आजादी देता है अभिव्यक्ति की और किसी की भी आलोचना करने की. निश्चित तौर से यह उन सभी संवैधानिक अधिकारों का हनन है. इससे यह साबित होता है कि भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ जो भी आवाज उठाएगा जो भी बात करेगा उसकी आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है.

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