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मध्यप्रदेश: भोपाल के शहीद भवन में ‘कन्यादान’ नाटक द्वारा भारतीय समाज में फैले जातिवाद और भेदभाव को दिखाया गया

Madhya-Pradesh:-Racism-and-discrimination-spread-across-Indian-society-shows-by-the-play-'Kanyadan'-in-Shaheed-Bhawan, -Bhopal
(Image Credits: Patrika)

शहीद भवन में बुधवार को नाटक कन्यादान का मंचन किया गया। यह मंचन एकजुट थिएटर एंड वेलफेयर समिति की तरफ से आयोजित करवाया गया था। इस 1.50 मिनट के नाटक की सहायता से भारतीय समाज में फैले हुए जातिवाद, भेदभाव और वैचारिक मतभेद को दर्शाया गया है।

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मंचन के निर्देशक पाचौड़े ने बताया कि इस नाटक के जरिए बताया गया है कि समाज को बदलने की जब बात आती है और परिवर्तन लाना होता है तब तो लोग पीछे हटने लगते हैं। इस नाटक का लेखन विजय तेंदुलकर का है। नाटक में अहम किरदार कलाकार तान्या लोकवानी ने निभाया।

नाटक की कहानी इस प्रकार है

नाटक की कहनी एक सामाजिक कार्यकर्त्ता पति पत्नी से शुरू होती है, जिसकी बेटी को एक दलित युवक से प्रेम हो जाता है। यह बात वह अपने माता पिता से बताती है, इसमें पिता तो मान जाते हैं लेकिन उसकी मां नहीं मानती और लड़के का विरोध करने लगती है।

लड़की की मां विरोध करते हुए कहती है कि मैं एक दलित को अपना दामाद नहीं बनाउंगी। अब इसमें दो विचारधाराओं के बीच अंतर विरोध शुरू हो जाता है। लड़की की मां एक तरफ तो समाज में परिवर्तन की बात करती हैं वहीं दुसरी ओर दलित युवक से बेटी की शादी होने के खिलाफ खड़ी हो जाती हैं। वह अपने को एक सामाजिक कार्यकर्ता होने के साथ ही मां होने का भी हवाला देती हैं।


नाटक की अगली कड़ी में बेटी उस दलित लड़के से शादी कर लेती है। शादी के कुछ दिनों बाद उन दोनों के बेच झगड़ा शुरू हो जाता है। वह अपने पति का घर छोड़कर पिता के घर चली जाती है।

इसके बाद वह लड़का एक पुस्तक के विमोचन के लिए लड़की के पिता को अध्यक्ष के रूप में बुलाता है, पुस्तक के विमोचन के दिन लड़की के पिता भाषण देते हैं, जिसमे वे आदर्श की बात करते हैं वहीं उनकी बेटी भी मौजूद होती है।

अपने पिता द्वारा आदर्श की बात सुनकर लड़की उनसे लड़ने लगती है और कहती है कि, बातें तो आदर्श की होती हैं, लेकिन होता कुछ और है। इतना कहते हुए लड़की लड़के के पास वापस चली जाती है।

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