fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
अन्य

महाराष्ट्र सरकार ने आंबेडकर की रचनाओं पर आधारित अंग्रेजी के 17 वॉल्यूम्स का प्रकाशन रोका

Maharashtra-government-stopped-publishing-17-volumes-of-English-based-on-the-compositions-of-Ambedkar
(Image Credits: DNA India)

सविंधान का निर्माण करने वाले भीमराव आंबेडकर को पूरा भारत जानता है। उनके द्वारा बताये रास्ते और ज्ञान को आज हर कोई किताबो में पड़ता है। परन्तु अब अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित ‘कलेक्टेड वर्क्स ऑफ बाबासाहेब डॉक्टर आंबेडकर’ का प्रकाशन रुक गया है। जहाँ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भीमराव आंबेडकर की तारीफ करते नहीं थकते थे वही नरेंद्र मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद बाबासाहेब आंबेडकर का प्रकाशन रुक गया।

Advertisement

मोदी ने हमेशा अपने आप को बहुजन समाज के साथ बताया है, हमेशा ही आम्बेडकर के ज्ञान का बखान किया है। यूँ तो मोदी बहुजन समाज के साथ खड़े होने की बात करते है परन्तु देखा जाए तो वह बहुजन समाज के खिलाफ ही नजर आये है। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। बता दें कि पीएम नरेंद्र मोदी अपने भाषणों में आंबेडकर का खास तौर पर जिक्र करते रहते हैं। इसके अलावा, वह कांग्रेस पर आंबेडकर को हाशिए पर ढकेलने का आरोप भी लगाते रहे हैं। परन्तु मोदी सरकार खुद आम्बेडकर के विचारो पर सवाल उठाते रहा है।

द टेलिग्राफ में प्रकाशित खबर के मुताबिक, आंबेडकरवादी लेखकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसे ‘वैचारिक हमला’ करार दिया है। उनका कहना है कि कतिथ तौर पर बीजेपी और आरएसएस आंबेडकर द्वारा ब्राह्मणवादी मानसिकता और जाति व्यवस्था पर सवाल उठाए जाने के खिलाफ रहे हैं।

हालांकि, एक आधिकारिक सूत्र ने इसकी वजह आंबेडकर के पोते प्रकाश आंबेडकर की ओर से महाराष्ट्र सरकार के खिलाफ दाखिल कॉपीराइट केस को बताया है। जनसत्ता खबर के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार ने ही आंबेडकर की कई रचनाओं को प्रकाशित किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब यूपीए के शासन में कुमारी शैलजा सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय में थीं, तब केंद्र सरकार की संस्था डॉ आंबेडकर फाउंडेशन ने आंबेडकर के लेखों और भाषणों को इंग्लिश और सात अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद करने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी।


वहीं, महाराष्ट्र के शिक्षा विभाग ने पहले ही आंबेडकर के प्रकाशित रचनाओं को अंग्रेजी और मराठी में पेश किया था। राज्य सरकार ने फाउंडेशन को इस बात की इजाजत दी थी कि वे इनके अंग्रेजी वॉल्यूम को कलेक्टेड वर्क्स में शामिल करें। 2013 में फाउंडेशन ने आंबेडकर की रचनाओं को अंग्रेजी में 20 वॉल्यूम में प्रकाशित किया। फाउंडेशन इसे 7 अन्य भाषाओं में अनुवाद करने का काम भी कर रही है।

अंग्रेजी भाषा में आयी आंबेडकर की रचनाएं कुछ ही महीनों में खत्म हो गईं। मांग करने के बावजूद फाउंडेशन ने इसके किसी वॉल्यूम को दोबारा प्रकाशित नहीं किया। आधिकारिक सूत्र के मुताबिक, महाराष्ट्र सरकार ने भी आंबेडकर की रचनाओं पर आधारित अंग्रेजी के 17 वॉल्यूम्स का प्रकाशन रोक दिया।

बता दें कि प्राइवेट प्रकाशकों की ओर से आंबेडर की किताबें अभी भी मौजूद हैं। हालांकि, आंबेडकरवादी लेखक दिलीप मंडल का कहना है कि फाउंडेशन की किताबें ज्यादा सस्ती होती थीं। उनके मुताबिक, ये किताबें दलितों के बीच बेहद मशहूर हो गई थीं। वे शादी या अन्य मौकों पर एक दूसरे को ये किताबें भेंट करते थे।

मोदी और आरएसएस की विरोधी मानसिकता आम्बेडकर के विचारो को मानने से इंकार करती रही जिसके चलते अब आम्बेडकर के किताबो की छपाई बंद हो गयी है। इसी के साथ मोदी और आरएसएस का चेहरा सामने आता है। वह दुनिया के सामने खुद को बहुजन समाज के साथ दिखाते है परन्तु चेहरे के पीछे समाज के खिलाफ खड़े नजर आते है।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved