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मालेगांव कांड: पीड़ित के पिता ने साध्वी प्रज्ञा की लगाई क्लास, चुनाव लड़ने पर उठाया सवाल

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जेल से बाहर आने के बाद अब प्रज्ञा सिंह ठाकुर भाजपा में शामिल हो गयी है और अब चुनाव लड़ने जा रही है। भाजपा ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को भोपाल लोकसभा सीट से कांग्रेस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के खिलाफ मैदान उतारा है। भाजपा में शामिल होने के बाद ही प्रज्ञा अपने बयानों के चलते विवादों में आ गयी। आरोप प्रत्यारोप में प्रज्ञा सिंह भी शामिल हो गयी। वहीँ एक बार फिर से मालेगांव काण्ड को लेकर विवाद खड़ा हो गया। मालेगांव  में हुए बम धमाके में  बेटा खोने वाले निसार अहमद सईद बिलाल ने बॉम्बे हाईकोर्ट से यह अपील की है है की प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव न लड़ने दिया जाए।

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इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, 2008 के मालेगांव काण्ड में जान गवाने वाले छह लोगों में से एक के पिता ने कहा है कि इस मामले में आरोपित प्रज्ञा सिंह ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोका जाए। इसके लिए उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपनी याचिका दायर की है। इस पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश वीएस पाडलकर ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर को याचिका पर जवाब देने को कहा है.
साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर बीते 17 अप्रैल को भाजपा में शामिल हो गईं। भाजपा ने प्रज्ञा को मध्य प्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया है जहां से कांग्रेस से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह उम्मीदवार हैं। निसार अहमद सईद बिलाल ने पिछले साल प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दिए जाने के फैसले पर भी विरोध किया था।


वकील शाहिद नदीम के जरिये से दायर याचिका में निसार अहमद ने कहा है कि प्रज्ञा ठाकुर को 25 अप्रैल, 2017 को सेहत खबर होने के चलते जमानत दे दी गई थी। जबकि वह भंयकर गर्मी के मौसम में चुनाव लड़ने योग्य स्वस्थ है। उन्होंने अदालत को गुमराह किया है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, जमानत देते समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह आठ साल से ज्यादा समय से हिरासत में थीं। जमानत याचिका के साथ उनके मेडिकल प्रमाण-पत्र को भी पेश किया गया था, जिसमें वह स्तन कैंसर से पीड़ित थीं।


कोर्ट ने कहा था कि अपीलकर्ता ( प्रज्ञा सिंह ठाकुर) की मेडिकल रिपोर्ट बताती है कि वह बहुत कमजोर हो गई हैं। बिना सहारे के चल फिर नहीं सकती. प्रमाण-पत्र के मुताबिक उनका इलाज आयुर्वेदिक अस्पताल में चल रहा है. इसलिए कैंसर से पीड़ित अपीलकर्ता को आयुर्वेदिक अस्पताल में उचित उपचार दिया जाए।अदालत अपने आदेश में कहा था कि इस मामले की तथ्यों और परिस्थितियों की समग्रता को देखते हुए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को जमानत दे दी जाए।कोर्ट द्वारा निर्धारित शर्तों में से एक शर्त यह था कि वह सुनवाई के दौरान विशेष अदालत में जरूर उपस्थित हों।


निसार अहमद ने कहा है कि प्रज्ञा ठाकुर को जमानत इस शर्त पर दी गई थी कि वह सुनवाई में हिस्सा लेंगी, लेकिन अपने आपको अस्वस्थ और स्तन कैंसर से पीड़ित बताकर सुनवाई में हिस्सा नहीं ले रही हैं। इससे पहले गुरुवार को सामाजिक कार्यकर्ता तहसीन पूनावाला ने चुनाव आयोग में प्रज्ञा ठाकुर के चुनाव लड़ने के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. शिकायत में तहसीन पूनावाला ने प्रज्ञा ठाकुर को चुनाव लड़ने से रोकने की मांग की थी। हालांकि चुनाव आयोग ने पूनावाला की शिकायत को खारिज कर दिया चुनाव आयोग ने कहा था कि प्रज्ञा ठाकुर किसी भी मामले में दोषी नहीं हैं। उन पर कोई भी दोष साबित नहीं हुआ है।



भाजपा अब में अब उन लोगो के शामिल होने का दौर शुरू हो गया जो किसी आपराधिक मामले में जेल जा चुके है। और ऐसा ही मामला प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ भी है। कोर्ट ने कहा है की उन पर कोई भी दोष शामिल नहीं हो पाया परन्तु उनका नाम मालेगांव काण्ड के जुड़ा है। उनके अलावा लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित और छह अन्य आरोपी हैं। 
देखना यह है की कोर्ट को गुमराह करने और चुनाव लड़ने पर कोर्ट क्या फैसला लेती है। 

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